
सुखी मन से करें नौकरी Publish Date : 04/02/2026
सुखी मन से करें नौकरी
प्रोफेसर आर. एस. सेगर
“नौकरी से कहीं बड़ा दायरा होता है करियर का। हो सकता है कि आप अच्छे वेतन वाली बढ़िया नौकरी कर रहे हों। पर संतुष्ट भी हों, ये जरूरी नहीं। नौकरी करते हुए कुछ गलतियों से बचना चाहिए। असुरक्षा, चिंता और दबाव किसी भी नौकरी के मुख्य पहलू होते हैं। लेकिन जो इन पर विजय पा लेता है, उसके लिए संभावनाओं की नयी राहें निरंतर खुलती रहती हैं”।
आज के इस प्रतिस्पर्धी दौर में नौकरी करना और सफल करियर की ओर कदम बढ़ाते रहना आसान नहीं है। बेशक, आज भी करियर में सफल होने के गुर-मेहनत, लगन, ईमानदारी, सूझबूझ और जोखिम उठाने की क्षमता ही माने जाते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि वे कौन सी गलतियां हैं, जिनके कारण इतना समय नौकरी में देने के बावजूद हम खुश नहीं रह पाते? मौजूदा दौर में वैसे भी नौकरी की संभावनाएं कठिन और जटिल होती जा रही हैं, इसलिए जरूरी है कि कुछ गलतियों का ध्यान रखा जाए। आमतौर पर लोग अपने करियर में तीन तरह की गलतियां कर बैठते हैं।
• खुद को कमतर आंकना
• एक ही ढर्रे पर चलना
• भविष्य को लेकर लक्ष्य निर्धारित न करना
असुरक्षा की भावना है घातक

आपने अकसर देखा होगा कि कुछ लोग- आत्मविश्वास से लबरेज होते हैं और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य दुनिया जीतना होता है। लेकिन कुछ लोग थोड़े दब्बू और डरपोक किस्म के भी होते हैं, जिन्हें अपनी काबिलियत पर भरोसा नहीं होता। वह सुरक्षित महसूस करने के लिए जीवन से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं नहीं रखते और जितना मिलता है, उसी में काम चला लेते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से वह सुरक्षित रहेंगे, जबकि यह सरासर गलत है। जब आप खुद से कम अपेक्षाएं रखते हैं, तो आप अपनी क्षमताओं काकमतर आकलन करने लगते हैं और अपनी क्षमताओं से कमतर कार्य को करते ही रहते हैं। ऐसा आप अपनी नौकरी बचाने के लिए नहीं करते, क्योंकि आपने खुद को एक दायरे में बांध लिया होता है और लगता है कि उस दायरे से बाहर निकलते ही आपका सब कुछ छिन जाएगा। इसलिए आप कभी खतरा नहीं उठाते।
नयेपन की तलाश से दूर
जीवन कभी एक-सा नहीं रहता। इसलिए यह स्वीकारना जरूरी है कि बदलाव संसार का नियम है। यह जरूरी नहीं कि जो स्थिति किसी दूसरे के लिए सही हो, वह आपके लिए भी उपयुक्त हो। आपको दफ्तर में रोजाना एक ही सीट पर बैठकर काम करना होता है। लेकिन किसी नये प्रोजेक्ट या कार्य के सिलसिले में आपको बाहर भेजा जा रहा है, तो उसमें असहज होने की जरूरत नहीं है। चुनौतियां इंसान को तेज और मजबूत बनाती हैं। जिसे एक नये माहौल से तालमेल बिठाना आ जाता है, वह तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन चुनौतियों को स्वीकारनेके बजाय आप पुराने ढर्रे पर ही चलते रहेंगे, तो कोई और आगे निकल जाएगा।
लक्ष्य तय करना जरूरी
जब आप नौकरी के लिए आवेदन करने जाते हैं, तो आपको अपना पूरा आत्मविश्वास दिखाना होता है, ताकि वह पद आपको मिल सके। ऐसा आप इसलिए करते हैं, क्योंकि आपने यही सीखा है कि चाहे अंदर से कितना भी डर लग रहा हो, बाहर से आपको खुद को मजबूती से पेश करना होता है। लेकिन असली तरक्की स्वयं के विकास से ही आती है। जब आप खुद को लेकर उच्च लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो आपको आत्मविश्वास से भरे होने का ढोंग नहीं करना पड़ता, क्योकि उस समय वास्तव में आप आगे बढ़ना चाहते हैं, इसलिए मानसिक रूप से खुद को तैयार करते हैं।
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि असुरक्षा, चिंता और दबाव किसी भी नौकरी के मुख्य पहलू होते हैं। लेकिन जो इन पहलुओं पर विजय पा लेता है, उसके लिए संभावनाओं की नयी राहें निरंतर खुलती रहती हैं।
हम अकसर सुनते हैं कि बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाला कोई इनसान बेहद ऊंचे पद पर पहुंच गया। ऐसा सिर्फ उसके स्वयं पर विश्वास, चुनौतियों को स्वीकारने की क्षमता और आगे बढ़ने की चाह से ही संभव हो पाता है। आप नौकरी के दौरान इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो यह आपको एक मजबूत व्यक्तित्व प्रदान करती हैं।

इसलिए बहुत जरूरी है कि आप यह समझें कि जीवन सिर्फ नौकरी करने का नाम नहीं है। या विकास का मतलब सिर्फ नौकरी में तरक्की नहीं होता, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जो निरंतर चलती रहती है और आपके पूरे जीवन को बेहतर बनाती है। संभावनाओं के नये दरवाजे भी खोलती है। आप इतिहास उठाकर देख लीजिए कि विश्व के सभी महान और सफल व्यक्तियों ने अपने जीवन की दिशा निर्धारित करने के लिए कुछ नियम बनाए, जिन्हें उन्होंने दुनिया के सामने घोषित तो नहीं किया, लेकिन अपने व्यक्तित्व में संपूर्ण तरीके से उतार लिया। तभी वे सफल हो पाए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
