तालमेल जिंदगी और काम के बीच      Publish Date : 03/02/2026

                   तालमेल जिंदगी और काम के बीच

                                                                                                                                                                प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“नई पीढ़ी में नौकरी बदलने की एक वजह दफ्तर और जीवन के बीच तालमेल न बिठा पाना भी है। इससे उपजी निराशा उन्हें कार्य में सकारात्मक नहीं होने देती। कैसे संभव है यह तालमेल, जानें इस लेख में”-

मार्केटिंग पेशेवर रागिनी सुबह लगभग 8 बजे घर से निकलती हैं, ताकि 9.30 तक दफ्तर पहुंच जाएं। घर से दफ्तर तक पहुंचने के दौरान भी टारगेट अचीव करने का दबाव दिमाग पर हावी रहता है। काम के दबाव के साथ घर के कुछ काम न कर पाने का अपराध-बोध मन को मथता रहता है। महानगरीय जीवनशैली में दफ्तर और जीवन के बीच तालमेल बैठाने का दबाव पुरूषों के साथ भी है।

आसान नहीं ये तालमेलः घर-बाहर का तालमेल बनाना मुश्किल काम है। एक जॉब पोर्टल की मानें तो लगभग 60 प्रतिशत भारतीय पेशेवर मानते हैं कि घर-दफ्तर के बीच सामंजस्य बिठाना उनके लिए दूर की कौड़ी है। इससे अनिद्रा, बेचैनी और अवसाद जैसी कई समस्याएं हो रही हैं।

                                                       

संतुलन का सवाल: आखिर दफ्तर और जीवन के बीच तालमेल का मतलब क्या है? 22 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिनव कहते हैं, 'मेरे लिए इसका अर्थ है काम के लचीले घंटे, अपने शौक और रुचियों के लिए कुछ वक्त निकाल पाना और हां, घर लौटने के बाद और छुट्टी के दिन काम न करने और वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी है। संगीत और कला के शौकीन अभिनव को अपनी रुचियों के लिए समय नहीं मिल पाता, जिससे वह परेशान हैं और नौकरी बदलने के प्रयास में जुटे हैं।

नियोक्ता भी दे रहे हैं साथ

शहरों में कई कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की बड़े सुविधाएं शुरू की हैं, लेकिन भारतीय पारिवारिक ढांचे में यह व्यवस्था बहुत सफल नहीं कही जा सकती। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को छुट्टियों पर जाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके लिए अतिरिक्त भत्ते भी दिए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बार-बार नौकरियां बदलने के चलन को देखते हुए कंपनियां इस पर भी विचार कर रही हैं कि कैसे उनके कर्मचारी काम के साथ ही अपनी छुट्टियां भी ले सकें, ताकि वे दफ्तर और जीवन में बेहतर तालमेल बना सकें।

 कैसे बिठाएं तालमेल

• सबसे पहले तो यह स्वीकार करें कि अगर कोई एक मोर्चे पर सफल है तो दूसरे में कमी जरूर रहेगी। इसलिए वास्तविक स्थितियों के हिसाब से ही खुद से अपेक्षाएं रखें।

• अपने लिए वही काम चुनें, जिससे प्यार करते हों। अगर ऐसे पेशे में हैं, जिससे प्यार नहीं करते तो उसके साथ सहज नहीं रह सकेंगे।

• अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें। कोई भी काम इतना महत्वपूर्ण नहीं कि उसके लिए स्वास्थ्य को नकारा जाए।

• सब कुछ करने के बजाय लोगों के बीच जिम्मेदारियां बांटना सीखें। चाहे घर हो या दफ्तर, टीम वर्क ही सबके हित में है।

• खुद को काम से अलग करना भी सीखें। कई बार काम इतना हावी हो जाता है कि खाली समय में भी लोग उसी के बारे में सोच रहे होते हैं। दिमाग को शांत रखने के लिए ध्यान या योग का सहारा लें। काम को समय पर पूरा करें और बीच-बीच में परिवार के साथ समय बिताने के लिए छुट्टियां लें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।