
एमबीए की डिग्री का कोई विकल्प नहीं Publish Date : 29/01/2026
एमबीए की डिग्री का कोई विकल्प नहीं
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“इससे स्टार्टअप से जुड़े जरूरी कौशल तो मिलेंगे ही, साथ ही प्रतिस्पर्धी बाजार में टिके रहने में भी मदद मिलेगी”
अधिकांश युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का सपना देखते हैं और उनमें से करने का सपना देख के जालौरहा है कि क्या व्यवसाय शुरू करने के लिए एमबीए की डिग्री आवश्यक है? तो आपको बता दें कि उद्यमी बनने के लिए एमबीए की डिग्री होना जरूरी नहीं। लेकिन एमबीए की डिग्री से व्यवसाय शुरू करने वालों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है। इसीलिए वर्तमान समय में युवा अपना स्टार्टअप या व्यवसाय शुरू करने से पहले एमबीए करना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि यह व्यवसाय से जुड़े महत्त्वपूर्ण उपकरण और कौशल प्रदान करती है, जो न केवल आपकी उद्यमशीलता को मजबूत बनाएगी, बल्कि कंपनी को इस प्रतिस्पर्धी बाजार में भी टिके रहने में भी मदद करेगी।
नए अवसरों की पहचान
व्यवसाय के लिए मार्केट की प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं की समझ होना बेहद जरूरी है। एमबीए प्रोग्राम के जरियेवित्तीय प्रबंधन, टीम मैनेजमेंट के साथ-साथ अपने उत्पाद एवं सेवाओं की मार्केटिंग करना भी सीखते हैं। साथ ही आप नए-नए अवसरों की पहचान करके कारोबार के लिए प्रभावी रणनीति बना पाएंगे।
नेटवर्किंग से जुड़ने का अवसर

एमबीए करने के दौरान कॉलेज समय-समय पर सेमिनार का आयोजन करते रहते हैं। इससे छात्रों को सफल उद्यमियों से बातचीत करने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिलता है। साथ ही उन्हें उद्यमिता की दुनिया में नए तरीके से सोचने के लिए सही दिशा भी मिलती है। वे छात्रों को अच्छे बिजनेस आइडिया के लिए वित्तपोषण और अन्य संसाधन के बारे में जानकारी भी देते हैं।
समाज पर सकारात्मक प्रभाव
एमबीए प्रोग्राम दायरे से बाहर जाकर सोचने और रचनात्मक तरीके से काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे आप अपने स्टार्टअप्स या व्यवसाय के जरिये समाज में बदलाव लाने के लिए नए-नए नवाचार कर पाएंगे और नए, अच्छे और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना पाएंगे। एमबीए प्रोग्राम सामाजिक उद्यमिता के महत्व को भी बढ़ावा देते हैं, जहां कारोबार के सिद्धांतों का उपयोगकर सामाजिक समस्याओं को हल किया जा सकता है।
सीखने को बहुत कुछ
एमबीए कोर्स के दौरान कॉलेज छात्रों को विभिन्न अवसर जैसे इंटर्नशिप, स्टार्टअप प्रतियोगिता और स्कॉलरशिप जैसी सुविधाएं भी प्रदान करते हैं। उन्हें छोटे बिजनेस मॉडल पर काम करने, केस स्टडीज, प्रेजेंटेशन, आर्टिकल राइटिंग जैसे असाइनमेंट दिए जाते हैं। ये सभी छात्रों के ज्ञान को विकसित करने के लिए तो जरूरी होते ही हैं, साथ ही इससे छात्रों को उद्यमिता के प्रारूप को समझने में भी आसानी होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
