
सागर की गहराइयों में भी है कॅरियर Publish Date : 11/01/2026
सागर की गहराइयों में भी है कॅरियर
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
मानवीय उन्नति में समुद्र का हमेशा योगदान रहा है। जब आदमी ने विकास के लिए कारोबार करना शुरू किया तो सड़कों रेलमार्गी और हवाई मार्गों से पहले समुद्र मार्ग का ही इस्तेमाल किया गया। आज भी दुनिया का 80 फीसदी से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय कारोबार समुद्र के रास्ते से ही होता है।
लेकिन समुद्र केवल अंतर्राष्ट्रीय कारोबार का ब्यापारिक मार्ग भर नहीं है। यह विभिन्न तरह के खनिज संसाधनों का भंडार, ऊर्जा का अक्षय स्रोत असंख्य जैव प्रजातियों का निवास स्थल तथा सी फूड का खजाना है। यही कारण है कि समुद्र पर दिन पर दिन मानव की निर्भरता बढ़ती जा रही है। लेकिन विज्ञान के इतने उच्चतम विकास के बावजूद आज तक दावे के साथ कोई भी यह नहीं कह सकता है कि उसने समुद्र की थाह ले ली है। समुद्र की बनावट, उसकी गहराई, उसमें विद्यमान खनिज पदार्थ, सी फूड जैसी अकूत निधियों के बारे में लोगों को पूरी तरह से कुछ नहीं पता। यही वजह है समुद्र के व्यापक अध्ययन के लिए समुद्र विज्ञान का अध्ययन किया जाता है।

चूंकि समुद्र में आज भी मानव के आर्थिक और जैविक विकास के लिए अनंत संभावनाएं मौजूद हैं इसलिए समुद्र विज्ञान का अध्ययन कॅरियर की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
समुद्र विज्ञान में कई चीजों का अध्ययन किया जाता है। समुद्र के विस्तार, उसकी गहराई, अलग-अलग गहराई के स्तर, जैविक प्रजातियों की उपलब्धता, समुद्र तटों की बनावट, तली की संरचना, समुद्र के पानी में मौजूद लवणता, तापमान, घनत्व, ज्वालामुखी, समुद्र के जल का प्रवाह, धाराएं और समुद्र से सम्बंधित तमाम दूसरे विषय शामिल हैं। समुद्र विज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो दिनोंदिन विस्तारित हो रहा है। अपनी संभावनाओं के लिए लिहाज से भी और नयी जानकारियों के लिहाज से भी। इसलिए समुद्र विज्ञान के अध्ययन में कॅरियर का शानदार भविष्य लगभग सुनिश्चित है। समुद्र में वैज्ञानिक शोधों और महासागरोंके गहन अध्ययन को चार भागों में बांटा गया है-
1. समुद्र के भौतिक वातावरण का अध्ययन।
2. समुद्र में मौजूद रसायनों का अध्ययन।
3. समुद्री जीवों का अध्ययन।
4. समुद्र की तली और उसकी भूगर्भीय संरचना का अध्ययन।
इस क्षेत्र में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों की एकेडमिक क्वालिफिकेशन के लिहाज से 10+2 विज्ञान विषयों से अच्छे अंक प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण होना चाहिए। स्नातकोत्तर डिग्री के लिए विज्ञान और गणित विषयों से स्नातक होना चाहिए जबकि मैरीन शोध में पीएचडी के लिए स्नातकोत्तर की उपाधि विज्ञान विषयों के तहत होनी चाहिए। भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में समुद्र विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर या पीएचडी के पाठ्यक्रम संचालित किये जाते हैं।
जहां तक प्रवेश प्रक्रिया का सवाल है तो जरुरी शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ कुछ संस्थानों में प्रवेश परीक्षा एवं व्यक्तिगत तौर पर जांच-परख भी होती है। दरअसल उस क्षेत्र में जाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के मौसम, जीव और जल विज्ञान पर रुचि की जानकारी परखी जाती है। वैसे आमतौर पर कम से कम 50 प्रतिशत अंकों वाले अभ्यर्थियों को ही प्रवेश परीक्षाएं या साक्षातकार के लिए बुलाया जाता है। लेकिन अगर सीटें उपलब्ध हुई तो इससे कम अंकों वाले अभ्यर्थियों को भी मौका मिल सकता है। समुद्र विज्ञान के विभिन्न पाठ्यक्रमों की आमतौर पर अवधि 2 से 3 वर्ष की होती है और इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने के बाद अभ्यर्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधि दी जाती है।

इस क्षेत्र में जहां तक रोजगार अवसरों का सवाल है तो वहां रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। सिर्फ मैरीन सेवाओं व तेल सम्बंधित उपक्रमों के लिए ही नहीं बल्कि पयांवरण सुरक्षा, प्राकृतिक गैस और सी फूड जैसी विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में भी इस क्षेत्र के योग्य प्रोफेशनलों को रोजगार के ढेरों अवसर मिल सकते हैं। मौसम, समुद्री इंजीनियरिंग, भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी समुद्र विज्ञान की डिग्री रखने वालों की बेहद जरूरत होती है। इसलिए इस क्षेत्र में नौकरी तो कोई समस्या ही नहीं है। भारतीय सेनाओं में भी समुद्र विज्ञान में स्नातकोत्तरों की अच्छी खासी मांग होती है।
साथ ही साथ मौसम विज्ञानी आजकल कृषि क्षेत्र में भी बड़ी तदाद में रखे जा रहे हैं। जब से प्राइवेट कंपनियां भी मौसम का आंकलन और भविष्यवाणियां करने लगी हैं। तब से इस क्षेत्र में भी इनकी जबरदस्त मांग बढ़ गयी है।
जहां तक समुद्र विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तरों की सरकारी सेवाओं में चयन की बात है तो इन क्षेत्रों में वेतन 20000 से 25000 रुपये के मूल प्रारंभिक वेतन पर आराम से नौकरी मिल जाती है। जबकि अन्य विशिष्ट समुद्र विज्ञान संस्थानों और गैर-सरकारी बहुराष्ट्रीय उपक्रमों में मासिक वेतन 25,000 से लेकर 45,000 तक बहुत आसानी से मिल जाता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानक वेतनमानो पर इस क्षेत्र में अध्यापन के लिए अवसरों की भी कमी नहीं है। बल्कि जब से प्राइवेट संस्थानों की भरमार हुई है तब से इन संस्थानों में अच्छे वेतनमानों पर समुद्र विज्ञान क्षेत्र के विशेषज्ञों की जरूरत बढ़ी है।
अगर पत्रकारिता, फिल्म और गोताखोरी के क्षेत्र में किसी की रुचि हो तो इस क्षेत्र में भी समुद्र विज्ञान में दक्ष लोगों के लिए भरपूर मांग है। डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफी, एनिमल प्लानेट जैसे तमाम टीवी चैनल हैं। जहां समुद्र विज्ञान के जानकार लोगों की बड़े पैमाने पर जरूरत बनी रहती है। यहां पर अच्छा-खासा वेतन भी मिलता है 160,000 से 1,80,000 मासिक वेतन यहां आमतौर पर आसान है। देश में हर साल 34 लाख विश्वविद्यालय ग्रेजुएट निकलते हैं। लेकिन एक दशक पहले तक विश्वविद्यालय में आर्ट विषयों के छात्रों की तादाद ज्यादा होती है। हालांकि अभी भी आर्ट विषयों से होने वाले स्नातकों की संख्या ज्यादा है लेकिन अब धीरे-धीरे विज्ञान विषय के स्नातकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है और जैसे-जैसे विकास के विभिन्न आयामों का विकास हो रहा है वैसे-वैसे वैज्ञानिक, स्नातकों की मांग बढ़ रही है। समुद्र विज्ञान में प्रशिक्षण देने वाले विशिष्ट विश्वविद्यालयों की संख्या कुछ इस तरह है-
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मंगलोर विश्वविद्यालय, मंगल गंगोत्तरी (कर्नाटक)।
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कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्चि (केरल)।
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उत्कल विश्वविद्यालय, वाणी बिहार, भुवनेश्वर (उड़ीसा)।
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कर्नाटक विश्वविद्यालय पयाते नगर, धारवाड़ (कर्नाटक)।
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गोवा विश्वविद्यालय, सांताक्रूज, गोवा।
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बरहामपुर विश्वविद्यालय गांजा बिहार, गंजम (उड़ीसा)।
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अन्नामलाई विश्वविद्यालय अन्नामलाई (तमिलनाडु)।
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मद्रास विश्वविद्यालय, चेपक, चेन्नई (तमिलनाडु)।
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आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापटनम (आंध्र प्रदेश)।
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जाधवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
