तेजी से उभरता क्षेत्र है डेटा साइंस      Publish Date : 06/01/2026

                  तेजी से उभरता क्षेत्र है डेटा साइंस

                                                                                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“डेटा साइंस का क्षेत्र नियुक्तियों और वेतन के संदर्भ में सबसे ज्यादा मांग वाले पांच क्षेत्रों में शामिल है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में इसकी और मांग बढ़ेगी। ऐसे में छात्रों के लिए डेटा साइंटिस्ट का काम एक शानदार करियर विकल्प साबित हो सकता है”।

बिजनेस बढ़ाने के उद्देश्य से बिभिन्न कंपनियों ऐसे विशेषज्ञों को नियुक्तियां देती हैं, जो इंटरनेट की दुनिया में सर्च किये जाने वाले डेटा को एकत्र कर उसका विश्लेषण कर सकें। इस विश्लेषण के आधार पर व्यापार के विस्तार को लेकर योजनाओं पर निर्णय लिए जाते है। आंकड़ों का विश्लेषण कार प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर कार्य योजना तैयार करना ही डेटा साइंस है और इसके विशेषज्ञ डेटा साइटिस्ट कहलाते हैं।

आज की उच्च तकनीक से लैस दुनिया में असीमित मात्रा में डेटा मौजूद है, जिसे इकट्ठा करना, इसमें से काम का डेटा निकालना और इस डेटा का अपने लिए किस तरह उपयोग किया जाए, वे सबसे बने सवाल हैं। यही गुत्थी डेटा साइंटिस्ट सुलझाते हैं।

क्या होंगे काम

                                                 

वर्तमान समय में डेटा साइंटिस्ट के काम में सांख्यिकी, विश्लेषण क्षमता, प्रोग्रामिंग रिकल और संबंधित क्षेत्र की समझ को मिलाकर काम किया जाता है। एक बेटा साइंटिस्ट डेटा को जुटाता है, उसको स्टोरकरता है। उसके बाद डेटा की पैकेजिंग यानी विभिन्न श्रेणियों में उनकी छंटाई करता है और अंत देगा डिलिवरी करता है।

जरूरी आईटी स्किल्स

डेटा साइंस थोड़ा मुश्किल काम जरून है। मुख्यतः यह काम आपकी रुचि और स्किल पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे लेते हैं। इसके लिए प्रोग्रामिंग, मशीन लर्निंग, स्टैटिक्स, डेटा विजुअलाइजेशन, डेटा रेंगलिग, लिनियर अलजेब्रा, कैलकुलस, मॉडलिंग और प्रॉबेबिलिटी का अध्ययनबहुत जरूरी है। साथ ही आपको पाइथन, जाबा, आर, एसएएस जैसी प्रोग्रामिंग विदेश में पहले से है भारी मांग इसलिए आपको इन लैंग्वेज की भी जानकारी होनी चाहिए।

कौन सी डिग्री जरूरी

डेटा साइटिस्ट बनने के लिए कंप्यूटर साइंस, मैथ्स, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, आईटी या इससे संबंधित फील्ड में बैचलर की डिग्री होना जरूरी है। बैचलर डिग्री हासिल करने के बाद एक से दो साल में बतौर डेटा साइंस में महारत प्राप्त हो सकती है। इसके बाद आप काम करते हुए मास्टर्स की डिग्री के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत में कई यूनिवर्सिटी डेटा साइंस में एम-टेक करवाती है, जो डिस्टेंस लर्निंग में भी उपलब्ध है। अधिकतर डेटा साइंटिस्ट के पास मास्टर या पीएचडी डिग्री होती है। तभी एक सफल डेटा साइंटिस्ट बन पाते हैं।

क्या मिलेंगे कोर्स

डेटा साइंस और एनालिस्ट के लिए देश में कई संस्थानों द्वारा बिजनेस ऐनालिटिक्स स्पेशलाइजेशन में शॉर्ट टर्म कोर्स कराए जा रहे हैं। साथ ही उडेमी, कोर्सेरा जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी हैं। संस्थान के नाते आईआईएम कोलकाता, आईएसआई कोलकाता और आईआईटी खड़गपुर मिल कर दो वर्षीय फुल टाइम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस ऐनालिटिक्स प्रोग्राम करवा रहे हैं। इसके अलावा ऐंडवांस्ड ऐनालिटिका, एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम इन बिजनेस ऐनालिटिक्स, ऐंडवांस्ड चिजनेस ऐनालिटिक्स ऐंड बिजनेस ऑप्टिमाइजेशन प्रोग्राम, मास्टर्स इन मैनेजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन मार्केट रिसर्च ऐंड डेटा ऐनालिटिक्स, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस ऐनालिटिक्स जैसे कोर्सेज भी उपलब्ध हैं।

नियुक्तियों के अवसर

                                                   

गूगल, अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट, लिंक्डइन, फेसबुक और ट्विटर जैसी बढ़ी कंपनियों में काम के मौके डेटा साइंटिस्ट के पास हैं। इसके अलावा डेटा साइंटिस्ट की डेटाबेस ऐंड इन्फॉर्मिशन इंटिग्रेशन, क्लाउड कम्प्यूटिंग, नेचुरल प्रोसेसिंग, सोशल ऐंड इन्फॉर्मेशन नेटवर्क, वेब इन्फॉर्मेशन एक्सेस, डेटा/बिजनेस एनालिसिस फील्ड में भी काम मिलता है।

क्या होगा वेतन

डेटा साइटिस्ट शुरुआत में ही औसतन 6 से 9 लाख रुपये सालाना कमाता है। इस पेसे में उच्यतम वेतन-स्किल्स डाटा माइनिंग/ डाटा वेयरहाउस, मशीन लर्निंग, जावा, एपेक, हेप और पाइथन में हैं। अनुभव से वेतन बहुत ज्यादा बढ़ेगा। विदेशी अवसरों में बहुत ही आकर्षक पैकेज मिलता है।

प्रमुख संस्थान

इंस्टीट्‌यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई।

• इंस्टीट्यूट ऑपा टेक्नोलॉजी, खड़गपुर।

• इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बेंगलुरु।

• इंस्टीट्‌यूट ऑफ मैनेजमेंट, राही।

• स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्‌यूट, कोलकाता।

• इंस्टीट्‌यूट ऑफ साहस, बेंगलुरु।

• स्कूल या विजनेस, हैदराबाद।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।