फॉरेस्ट्री जंगल में मंगल      Publish Date : 13/12/2025

                               फॉरेस्ट्री जंगल में मंगल

                                                                                                                                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

जंगल न सिर्फ वन्य जीव जंतुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि हमारी जिंदगी के लिए भी इसकी महत्ता अतुलनीय है। वानिकी के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण फॉरेस्ट्री के प्रोफेशनल्स की मांग और बढ़ने लगी है। ग्लोबल वार्मिंग और विश्व स्तर पर जलवायु में होनेवाले परिवर्तन ने वन संपदा की देखरेख की जरूरत को और बढ़ा दिया है।

व्यक्तिगत योग्यता

प्रकृति के प्रति लगाव तो होना चाहिए, साथ ही इस फील्ड में रिसर्च की भी दिलचस्पी होनी चाहिए। इसके आलावा आउटडोर में काम करने की क्षमता भी जरूरी है। लंबे समय तक काम करने की योग्यता के अलावा वन में बिखरी तमाम चीजों को मैनेज करने की कला की में जानकारी भी जरूरी है।

कैसे-कैसे कोर्स

देश में दर्जनों विश्वविद्यालयों में फॉरेस्ट्री पढ़ाई की व्यवस्था है। इसके तहत बीएससी फॉरेस्ट्री, एमएससी फॉरेस्ट्री, बीएससी वाइल्डलाइफ, एमएससी वाइल्डलाइफ और एमएससी वुड साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई होती है। स्नातक स्तर की पढ़ाई कहीं 3 और कही 4 साल की है। स्नातक स्तर पर वानिकी से संबंधित विभिन्न विषयों की पूरी जानकारीदी जाती है। इसके बाद एमएससी इन फॉरेस्ट्री का विकल्प भी खुला रहता है। इस दौरान स्पेशलाइज्ड कोर्स किया जा सकता है, जैसे वाइल्डलाइफ साइंस, फॉरेस्ट मैनेजमेंट, फॉरेस्ट इकोनॉमिक्स, वूड साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी, कॉमर्शियल फॉरेस्ट्री आदि। विभिन्न संस्थानों द्वाराफॉरेस्ट मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा जैसे कोर्स भी उपलब्ध हैं।

शैक्षणिक योग्यता

यदि आप फॉरेस्ट्री से संबंधित किसी भी क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि आप इस विषय में स्नातक हों। इसके लिए विज्ञान (बायोलॉजी) विषय से 12वीं उत्तीर्ण होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए वानिकी में स्नातक होना जरूरी है।

कैरियर विकल्प

यदि वानिकी में कैरियर की बात करें तो इसमें कई तरह के विकल्प हैं:

फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर- एक अधिकारी के रूप में वन में स्थित बोटेनिकल गार्डन, सैंक्चुअरी आदि की देखरेख के अलावा जंगल में एंट्री संबंधी आवागमन के लिए भी यह जिम्मेदार होता है। इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर इस पद पर नियुक्ति होती है।

डेंड्रोलॉजिस्ट- इसका कार्य पेड़ पौधों की विभिन्न प्रजातियों की देखरेख से संबंधित होता है। वृक्षारोपण का कार्य भी इसी के जिम्मे होता है।

फॉरेस्टर- यह जंगल और वन्य जीव संरक्षण के लिए जिम्मेदार होता है। बजट को मैनेज करना भी इसी का काम होता है।

एन्थोलॉजी- जानवरों के व्यवहार को समझना, उनके लिए भोजन की व्यवस्था करना और उनके निवास की उचित व्यवस्था करना इसके जिम्मे होता है।

एंटोमोलॉजिस्ट- जंगल में जब भी बीमारियां फैलती है, उनके बारे में पता लगाने और उनकी रोकथाम की व्यवस्था करना एंटोमोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होती है।

जू क्यूरेटर- यह चिड़ियाघरों और एनिमल वेलफेयर से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए उत्तरदायी होता है।

जूनियर स्टाफ- जंगल और जानवरों की देखभाल के लिए बर्ष संख्या में जूनियर स्टाफ की जरूरत होती है। इनसे संबंधित रिक्तियां स्थानीय समाचारपत्रों में निकलती रहती हैं। 10वीं पास केलिए भी इसमें अवसर उपलब्ध होते हैं।

कहां-कहां हैं मौके

                                                              

कोर्स करने के बाद फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ से संबंधित विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी मिलती है। निजी नौकरियों की भी कोई कमी नहीं। वन और वन्य जीव संरक्षण के लिए काम कर रहे एनजीओ में जॉब के मौके उपलब्ध हैं। लकड़ी के कारोबार के अलावा उन तमाम औद्योगिक घानों में मौके मिलते हैं, जहां वन संदा का इस्तेमाल विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है। टीचिंग और रिसर्च के के भी उपलब्ध होते हैं। साथ ही वाइल लाइफ जर्नलिज्म, फोटोग्राफी और फिल मेकिंग में भी मौके मिलते हैं। इसके अलावा वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड, सेंटर फॉर एंवॉयरनमेंट एजुकेशन जैसे संगठनों में भी फॉरेस्ट्री के डिग्रीधारियों के लिए अवसर उपलब्ध हैं।

प्रमुख संस्थान

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल

www.iifm.ac.in

नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग

www.nehu.ac.in

फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून

www.fri.icfre.gov.in

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून

www.wii.gov.in

डॉ. वाई एस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टीकल्चर ऐंड फॉरेस्ट्री, सोलन (हिमाचल प्रदेश)

www.yspuniversity.ac.in

बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, रांची

www.baujharkhand.org

सीसीएस हरियाणा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, हिसार

www.hau.ernet.in

गोविंद वल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर ऐंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर

www.gbpuat.ac.in

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।