पहली नौकरी से पहले आजमाएं अपने हुनर      Publish Date : 03/12/2025

                  पहली नौकरी से पहले आजमाएं अपने हुनर

                                                                                                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

कॉलेज कोर्स के दौरान किसी कंपनी में इंटर्नशिप एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। इंडस्ट्री और व्यावहारिक स्थितियों में कार्य अनुभव के लिए यह उतनी ही जरूरी भी होती है। उस पर इंटर्नशिप के तौर-तरीकों में भी लगातार परिवर्तन हो रहा है। कैसे बढ़ाएं अपने अनुभव और कैसे इसे शामिल करें अपने रिज्यूमे में-

इन दिनों जॉब बाजार में स्किल का बोलबाला है, लेकिन एक रिपोर्ट की मानें, तो नियोक्ताओं की अपेक्षाओं और ग्रेजुएट्स के सॉफ्ट स्किल्स में एक बड़ा अंतर महसूस किया जा रहा है। कामकाज के दौरान ये अपने आप सुधरते हैं। वहीं इंडस्ट्री के तौर-तरीकों से पहले से ही वाकिफ होना आपको किसी भी कंपनी के लिए नियुक्त होते ही बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार करता है।

ऐसे ही कई कारणों के चलते पढ़ाई खत्म होने तक एक-दो इंटर्नशिप करना जरूरी होता है। ताकि आपके रिज्यूमे में दर्ज ये अनुभव आपको अवसर पाने में बढ़त दे सकें। इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट वर्क, वालंटियर वर्क पहली नौकरी से पहले कार्य अनुभव पाने का एक सरल माध्यम हैं। हालांकि इनमें भी कई ट्रेंड्स सामने आ रहे हैं।

समझें इंटर्नशिप को

इंटर्नशिप ऐसा कार्य अनुभव होती है, जिसके माध्यम से आप जान पाते हैं कि आपने अपने क्षेत्र विशेष में जो सीखा है, उसे किस तरह से अमल में लाना होगा। ये लगभग सभी प्रोफेशनल कोर्सेस का हिस्सा होती हैं। आप इसे अलग से भी कर सकते हैं। आमतौर पर स्टाइपेंड यानी भुगतान व कार्य अनुभव का सर्टिफिकेट भी मिलता है। इसकी अवधि 6 महीने से एक-दो साल की भी हो सकती है। विभिन्न जॉब बोर्ड्स और प्लेटफॉर्म्स पर इंटर्नशिप के ऐसे मौकों की जानकारी ली जा सकती है।

शॉर्ट टर्म और माइक्रो इंटर्नशिप

यह चलन इंटर्नशिप की अवधि के बारे में है। भारत में हाल ही में टाटा समूह की ओर से माइक्रो इंटर्नशिप का मौका निकाला गया था। ये केवल 4 से 6 घंटे की इंटर्नशिप थी। हालांकि भारत में माइक्रो इंटर्नशिप का चलन अभी शुरू हुआ है, पर शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप (1 से 6 महीने) का चलन काफी देखने को मिल रहा है। जैसे इंफोसिस का स्प्रिंगबोर्ड इंटर्नशिप प्रोग्राम 2023 आठ हफ्तों का था। ऐसे अवसर नियमित या रिमोट, दोनों मोड में हो सकते हैं।

लाभः

  • विविध स्किल और कार्य अनुभव लेने का मौका, क्योंकि जितनी अवधि में आप एक कंपनी की एक इंटर्नशिप करते हैं, उतनी अवधि में आप दो-तीन कंपनियों के तीन-चार प्रोजेक्ट का हिस्सा बन चुके होते हैं।
  • नेटवर्किंग के ज्यादा मौके और बड़ा संपर्क का दायरा।
  • कामकाज का फ्लेक्सिबल तरीका, जो छात्र की पढ़ाई को बाधित नहीं करता।
  • ऐसी इंटर्नशिप उन छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती हैं, जो लंबी अवधि तक की इंटर्नशिप नहीं चुनना चाहते।

चुनौतियां

  • आपको नए कौशल और प्रोजेक्ट की अपेक्षाओं को शीघ्रता से समझने की आवश्यकता पड़ती है।
  • छोटी अवधि की इंटर्नशिप में हो सकता है कि आपकी भागीदारी सीमित हो। जिससे संभवतः जटिल काम के बारे में और जानने का अवसर कम मिले।
  • कंपनियां कम समय सीमा के भीतर काम को अंजाम देने की उम्मीद कर सकती हैं, जिससे दबाव/निराशा की संभावना बनती है।

वर्चुअल इंटर्नशिप

                                                                   

महामारी के दौरान अधिकतर कंपनियों ने अपने इंटर्नशिप प्रोग्राम्स को वर्चुअल या रिमोट आधार पर कर दिया था। तब मजबूरीवश बना यह ट्रेंड अब मुख्यधारा में आ चुका है। अब अधिकतर इंटर्नशिप रिमोट माध्यम से ऑफर हो रही हैं। आमतौर पर प्रोजेक्ट आधारित होती हैं। इसीलिए 6-8 महीने से ज्यादा की नहीं होतीं। ग्रेजुएट्स इनके माध्यम से इंडस्ट्री में वास्तविक चुनौतियों के बीच काम करने का अनुभव रिमोट मोड में प्राप्त कर पाते हैं।

लाभः

  • ग्लोबल वर्ककल्चर के अनुभव का मौका। क्योंकि इनसे लोकेशन संबंधी सीमा नहीं होती। आप दुनिया की किसी भी कंपनी में इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट से जुड़ने का अवसर पाते हैं।
  • इसके माध्यम से युवा पढ़ाई, निजी जीवन व अन्य शॉर्ट टर्म कोर्स, सहित अपनी उस वक्त की जिम्मेदारियों को एक साथ निभा पाते हैं।
  • आने-जाने का समय बचता है।

चुनौतियां

  • आमने-सामने की बातचीत के सीमित अवसर। सीखने के मौकों की कमी होती है।
  • संवाद में विशेष सजगता बरतनी होती है, अन्यथा गलतफहमी के अवसर ज्यादा होते हैं।
  • टाइम जोन के अंतर के चलते टीम के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर काम करना आसान नहीं होता।
  • तकनीकी समस्याएं, जैसे कनेक्टिविटी, साफ्टवेयर वर्कफ्लो को बाधित कर सकती हैं।

एक्सटर्नशिप आजमाएं

इस टर्म का उपयोग विदेश में ज्यादा है। इसमें आप इंडस्ट्री के किसी व्यक्ति के साथ उसके कामकाज के दौरान रहते हुए अनौपचारिक रूप से काम के बारे में सीखते हैं। यानी हो सकता है कि आप उसकी वर्कशॉप का हिस्सा हों, या कुछ दिन नए प्रोजेक्ट की टीम के साथकाम देखें। इसे वालंटियर वर्क भी कह सकते हैं। किन क्षेत्रों में कर सकते हैं स्टार्टअप, मेडिकल और लॉ जैसे क्षेत्रों में इस तरह के मौके मिलते हैं।

चुनौतियां:

  • इसका प्रमाणपत्र नहीं मिलता। ऐसे में इससे मिली सीखों को रिज्यूमे में दर्ज जरूर करें।
  • सीखे स्किल के अभ्यास का मौका नहीं मिलता।

इंटर्नशिप किन क्षेत्रों में मिलेगी

फाइनेंस, आईटी और टेक्नोलॉजी, मेडिकल, डिजाइनिंग, बायोटेक और फार्मास्यूटिकल, मार्केटिंग ऐंड सेल्स, हॉस्पिटैलिटी और मीडिया ऐंड कम्यूनिकेशन से सम्बन्धित उद्योगों में इंटर्नशिप प्रोग्राम निकलते हैं। आईटी एवं टेक, बैंकिंग, डिजाइनिंग, कंटेंट क्रिएशन, डिजिटल मार्केटिंग, वेब डेवलपमेंट, कम्यूनिकेशन, एजुकेशन आदि के क्षेत्र में वर्चुअल व शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप के मौके आसानी से मिलेंगे।

कैसे ढूंढ़ें मौके

ऑनलाइन मंच जैसे Letsintern, Internshala, Yonthwork, Indianinternship, Stumag आदि पर रजिस्टर करके मौके देख सकते हैं।

  • विभिन्न जॉब पोर्टल पर शॉर्ट टर्म या श्रिमोटश् के फिल्टर लगाकर ढूंढ़ें।
  • एक्सटर्नशिप के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कंपनियों को फॉलो करें और संपर्क करें।
  • कॉलेज के वरिष्ठों, नेटवर्किंग आदि के माध्यम से वर्क वालंटियर कर सकते हैं।

ये प्रश्न मदद करेंगे

हर इंटर्नशिप का हर मौका आपके काम का हो, यह जरूरी नहीं। पहले खुद से ये पूछे:

  • मुझे यह इंटर्नशिप क्यों चाहिए?
  • मैं कौन से कौशल सीखना चाहता हूं?
  • क्या इससे मुझे अपने करियर में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी? और
  • मेरी क्या जिम्मेदारियां होंगी?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।