
विदेशी भाषाओं में छिपा है कैरियर Publish Date : 26/11/2025
विदेशी भाषाओं में छिपा है कैरियर
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“दुभाषिया या इंटरप्रेटर ही वह शख्स होता है जो एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद कर आपके बीच परदेश में प्रतिनिधिमंडलों में होने वाली राजनीतिक वार्ताओं में, पर्यटन में, विश्व सुंदरी एवं अन्य सौंदर्य प्रतियोगिताओं में विदेशी दूतावासों में अथवा लायब्रेरियों में संवाद कायम कराता है।“
आपका बातूनी होना, जिज्ञासु होना और त्वरित सौखने की क्षमता आपको एक जोरदार कैरियर दिला सकती है। आप विदेशी भाषा सीखकर अपना बहुमुखी कॅरियर संवार सकते हैं। दुभाषिया या इंटरप्रेटर ही वह शख्स होता है जो एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद कर आपके बीच परदेश में प्रतिनिधिमंडलों में होने वाली राजनीतिक वार्ताओं में, पर्यटन में, विश्व सुंदरी एवं अन्य सौंदर्य प्रतियोगिताओं में विदेशी दूतावासों में अथवा लायब्रेरियों में संवाद कायम कराता है।
लिहाजा अगर आपको किसी विदेशी भाषा में महारत हासिल है तो निश्चित है कि आपको यह हुनर दौलत ती दिलायेगा ही, साथ-साथ कई हस्तियों से मिलने और भ्रमण के अवसर भी उपलब्ध करायेगा. वर्तमान में जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, जापानी, रशियन, पुर्तगोज, चोनी, अरबी, पाश्तो, थार्ड, बर्मी, तिब्बती, इटेलियन एवं कई अन्य विदेशी भाषा के अध्ययन और अध्यापन की सुविधाएं विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पाठ्यक्रम- विदेशी भाषा में सर्टिफिकेट डिप्लोमा एवं डिग्री कोर्स विभिन्न संस्थानों द्वारा संचालित किये जाते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि लगभग 1 वर्ष तक होती है जबकि डिप्लोमा एवं डिग्री कोसों की अवधि दो वर्ष ढाई वर्ष तक होती है। विभिन्न विदेशों दूतावासों द्वारा भी समय समय पर भाषाई प्रशिक्षण शिविर एवं सेमीनारों का आयोजन किया जाता है जो कि 1 सप्ताह से 3 माह तक हो सकता है।
शैक्षिक योग्यता- प्रायः सभी भाषाओं में सर्टिफिकेट कोर्सों के लिये 10+2 या किसी भी मान्यता प्राप्त यूनीवर्सिटी/बोर्ड से समकक्ष उत्तीर्ण होना आवश्यक है। लेकिन स्नातक उत्तीर्ण उम्मीदवारों को वरीयता दी जाती है। कुछ विश्वविद्यालय स्नातक स्तर पर विदेशी भाषा अध्ययन की वैकल्पिक सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं, जिसमें जवाहरलाल नेहरू वि.वि. नई दिल्ली प्रमुख हैं। यदि आपने किसी विदेशी भाषा में डिप्लोमा कोर्स उत्तीर्ण कर लिया है तो आप उस भाषा में स्नातकोत्तर (एम.ए.) भी कर सकते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया- सभी वि.वि. नये शिक्षा सत्र से ही कक्षाएं प्रारंभ करते हैं, जिनकी प्रवेश सूचना प्रक्रिया से संबंधित विज्ञापन सभी प्रमुख समाचार पत्रों में जनवरी माह से प्रकाशित होनी आरंभ हो जाती है।
प्रमुख संस्थान- सेण्ट्रल इंस्टीट्यूट आफ फारेन लैंग्वेज, हैदराबाद और विदेशी भाषा विद्यालय नई दिल्ली विदेशी भाषा प्रशिक्षण में प्रमुख स्थान रखते हैं। विदेशी भाषा विद्यालय रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है, इसीलिये वहां अनुशासन को भी प्रधानता दी जाती है। यहां जून माह में ही प्रवेश लिया जा सकता है। लेकिन इस विद्यालय की गृह विशेषता है कि यह अपनी प्रवेश प्रक्रिया संबंधी कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं करता। सामान्यतः शासन द्वारा प्रायोजित कर्मचारी ही इसमें प्रवेश लेते हैं, परंतु सामान्य अभ्यार्थियों के लिये भी इसमें प्रवेश की सुविधाएं हैं।
अन्य संस्थान

1. जवाहर लल नेहरू बि.वि., शहीद भगत सिंह मार्ग, नई दिल्ली 110067।
2. दिल्ली वि.वि., कारेन लेंग्वेज डिपार्टमेंट, नई दिल्ली।
3. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, विदेशी भाषा विभाग, वाराणसी (उ.प्र.)।
4. यूनीवर्सिटी आफ पुणे, फॉरेन लैंग्वेज डिपार्टमेंट, पुणे (महाराष्ट)।
5. विश्वभारती विश्वविद्यालय, विदेशी भाषा विभाग, शांति निकेतन (पश्चिम बंगाल)।
6. मेण्ट्रल इंस्टीट्यूट आफ इंग्लिश एण्ड फारेन लैंग्वेज हैदराबाद।
7. द ब्रिटिश इंस्टीट्यूट, यूको बैंक बिल्डिंग, तीसरी मंजिल, फ्लोरा फाउंटेन 359, पो.बा.नं. 1025,डी.एन. रोड, मुंबई।
8. फ्रेंच कल्चरल सेंटर, 2, औरंगाबाद रोड, नई दिल्ली 110 041।
9. विदेशी भाषा विभाग, देवी अहिल्या वि.वि. 162, आर.एन.टी. मार्ग, इंदौर 10. मेक्स मूलर भवन, कस्तूरबा गांधीमार्ग, नई दिल्ली।
अवसर व संभावनाएं
1. विभिन्न होटल समूहों एवं पर्यटन केंद्रों पर गाइड, दुभाषिये के रूप में आप काफी मुद्राएं अर्जित कर सकतें हैं।
2. समाचार पत्रों एवं टी.वी. चैनलों हेतु अथवा बोबोसी, रायटर्स, भाषा, वार्ता जैसी सुप्रसिद्ध समाचार एजेंसियों में पत्रकार संवाददाता या अनुवादक के रूप में भी अपना भविष्य संवार सकते हैं।
3. यदि आपने योगा, मेडिटेशन, काउंसलिंग, आर्ट आफ लिविंग, टाइम मैनेजमेंट, स्ट्रेस मैनेजमेंट का व्यवहारिक ज्ञान भी हासिल किया है तो विदेशी भाषा की जानकारी आपके लिये वरदान सिद्ध हो सकती है।
4. विदेशी भाषा से नेट परीक्षा/स्नातकोत्तर उत्तीर्ण कर विभिन्न विश्वविद्यालयों/ व्याख्याता/अनुवादक या दुभाषिये के रूप में भी आप कार्य कर सकते हैं।
5. आप स्वयं की कोचिंग संस्था स्थापित कर विदेशी भाषा प्रशिक्षण भी दे सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
