एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग डिमांड में है कोर्स      Publish Date : 24/11/2025

                 एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग डिमांड में है कोर्स

                                                                                                                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर केंद्रित है। इसलिए यह क्षेत्र रोजगार मुहैया कराने के मामले में भी आगे है। लेकिन आज देश की लगातार बढ़ती जनसंख्या की वजह से नई तकनीक और बेहतर सिंचाई व्यवस्था आदि की जरूरत महसूस की जा रही है।

हमारे करियर विशेषज्ञ डॉ0 आर. एस. सेंगर, कहते हैं कि एग्रीकल्चर ईजीनियर अपनी इंजीनियरिंग स्किल की बदौलत कृषि उत्पाद से जुड़ी इन समस्याओं को सुलझाने की दिशा में कार्य करते हैं। देश में कृषि के विशाल क्षेत्र को देखते हुए एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में करियर की अच्छी संभावनाएं हैं।

क्या करते हैं एग्रीकल्चर इंजीनियर्स?

इनका काम कृषि उत्पाद से संबंधित तकनीकी समस्या को दूर करना होता है, जैसे- इरिगेशन, ड्रेनेज सिस्टम, फ्लड ऐंडवाटर कंट्रोल सिस्टम, मशीन डिजाइन आदि।

योग्यता और कोर्स

यदि आप एग्रीकल्चर इंजीनियर के रूप में करियर बनाने की सोच रहे है, तो बारहवीं में साइंस सब्जेक्ट यानी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स/बायोलॉजी जरूर होने चाहिए। अधिकतर एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी एग्रीकल्चर इंजीनियर के बीई/बीटेक प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन करती है। इस कोर्स की अवधि चार वर्ष होती है।

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में आप डिप्लोमा कोर्स भी कर सकते है। इस कोर्स की अवधि दो-तीन वर्ष होती है। कुछ इंस्टीट्यूट में एडमिशन बारहवीं के अंक के आधार पर भी हो जाता है। इसके बाद यदि आप एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग के एमई/एमटेक प्रोग्राम्स में प्रवेश लेना चाहते हैं, तो इसके लिए ग्रेजुएट एप्टिट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) पास करना होगा। आईआईटी, खड़गपुर, और इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली से पीएचडी कोर्स भी कर सकते हैं।

कहां है रोजगार के अवसर

                                                                       

एग्रीकल्चर इंजीनियर के लिए पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं।

पब्लिक सेक्टर

  • एग्रीकल्चर डिपॉर्टमेंट (राज्य और केंद्र सरकार)
  • डेवलेंमेंट ऑर्गनाइजेशन
  • यूनिवर्सिटी / इंस्टीट्यूट
  • लैब

प्राइवेट सेक्टर

  • एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव्स
  • एग्रीकल्चर

मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स

  • फर्टिलाइजर और इरिगेशन

कंपनीज

  • फार्मिंग कंपनीज
  • सर्विस ऑर्गनाइजेशन
  • स्वयं सेवी संस्थान

इसके अलावा, एग्रीकल्चर इंजीनियर के लिए मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट, फॉरेस्ट्री, फूड प्रोसेसिंग, रूरल डेवलपमेंट आदि में जॉब की तलाश कर सकते हैं। एग्रीकल्चर इंजीनियर एनजीओ के साथ मिलकर विभिन्न प्रोजेक्ट और स्कीम पर भी काम करते हैं। हमारे करियर विशेषज्ञ डॉ0 आर. एस. सेंगर कहते हैं कि कृषि के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के कदम रखने से इस क्षेत्र में स्टूडेंट्स का भविष्य काफी अच्छा है।

कार्य क्षेत्र

                                                                

इनका काम अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न होता है। वाटर सप्लाई और वाटर इरिगेशन की फील्ड में बहाइडोलाजिकल है मडिजाइन, कैनाल, पाइप लाइन, पम्प सिस्टम, माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम्स और ड्रेनेज सिस्टम आदि से जुड़ा होता है, जबकि एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन के तहत इंजीनियर ट्रैक्टर, अन्य मशीनों की टेस्टिंग, नए मशीन, उपकरण के लिए डिजाइन तैयार करने का कार्य करते हैं। मृदा संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियर मृदा संरक्षण से जुड़े उपाय, बाढ़ के पानी का सही तरीके से निकासी आदि संबंधित कार्यों से जुड़ें होते है।

सैलरी है आकर्षक

इस क्षेत्र से जुड़े इंजीनियर की, सैलरी इंजीनियरिंग के दूसरे ब्रांच से जुड़े प्रोफेसल्स की तरह ही होती है। शुरुआत में आपकी सैलरी 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह तक होती है। अनुभव के आधार पर आप अच्छी सैलरी प्राप्त कर सकते हैं।

इंस्टीट्यूट वॉच

इस समय देश में लगभग, 43 एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज (स्टेट, सेंट्रल और डीम्ड) संचालित की जा रही हैं। इन यूनिवर्सिटीज से आप एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग से जुड़े अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा, आईआईटीज भी एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग से जुड़े कोर्स ऑफर करते हैं।

  • इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली।
  • चौधरी चरण सिंह हरियाना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार।
  • शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस ऐंडटेक्नोलॉजी, श्रीनगर।
  • पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना।
  • महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर ऐंडटेक्नोलॉजी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।