डी फार्मा : पेशेवरों की बढ़ती मांग      Publish Date : 10/11/2025

                       डी फार्मा : पेशेवरों की बढ़ती मांग

                                                                                                                                                                                       प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“भारत में फार्मा उद्योग के विकास के लिए नई-नई नीतियां बनाई जा रही हैं। यह देखते हुए मेडिकल क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं-“

भारत ही नहीं बल्किमें फार्मा इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री ने विभिन्न जीवनरक्षक दवाओं के अनूठे आविष्कारों के साथ तेजी से वृद्धि की है।

मेडिकल साइंस दिन प्रतिदिन उत्कृष्ट रिसर्च और टेक्नोलॉजी के साथ और बेहतर होती जा रही है। इस कारण फार्मास्यूटिकल के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। दवाओं के वितरण से लेकर मार्केटिंग, पैकेजिंग और मैनेजमेंट सभी फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के प्रमुख हिस्से हैं।

इसलिए इस क्षेत्र में कई संभावनाएं उभर रही हैं, ऐसे में फार्मेसी की अच्छी जानकारी प्राप्त करने के लिए यदि आप एक शॉर्ट टर्म विशेष कोर्स का चयन करने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए डी फार्मा एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। भारत में फार्मा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए नई-नई नीतियां बनाई जा रही हैं, ताकि देशी और विदेशी कंपनियों को भारत में अपने उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जा सके।

आने वाले समय में फार्मा विशेषज्ञ और इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों की मांग और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही कई सरकारी व प्राइवेट संस्थान कुशल फार्मासिस्ट तैयार करने के लिए डी फार्मा, बी फार्मा, एम फार्मा और फार्मास्यूटिकल मैनेजमेंट डिप्लोमा जैसे कई कोर्स करा रहे हैं। इसमें छात्रों के लिए डिग्री, डिप्लोमा से लेकर रिसर्च करने के अवसर मौजूद हैं।

                                                              

कैसे मिलेगा दाखिला

डी फार्मा कोर्स करने के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। अंकों के आधार पर उन्हीं छात्रों को दाखिला दिया जाता है, जिन्होंने न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान अथवा गणित आदि विषय पढे हों। सरकारी संस्थानों में दाखिला आमतौर पर कट ऑफ के आधार पर दिया जाता है। प्राइवेट संस्थानों के अपने नियम होते हैं, जिनके बारे में संस्थानों से संपर्क करके जानकारी हासिल की जा सकती है।

कोर्स की जानकारी

डी फार्मा कोर्स दो साल का होता है और इसमें चार सेमेस्टर होते हैं। डिप्लोमा कोर्स के तहत दवाओं का निर्माण (उत्पादन), मार्केटिंग और वितरण की बारीकियां सिखाई जाती हैं। डिप्लोमा करने के बाद किसी भी फार्मेसी कंपनी में आसानी से नौकरी पाई जा सकती है।

अवसर

भारत में हेल्थ सेक्टर और हेल्थ टूरिज्म का तेजी से विस्तार हो रहा है, तो दूसरीओर बड़े पैमाने पर सरकारी और निजी अस्पताल व स्वास्थ्य संस्थान खुल रहे हैं। फार्मा क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की मांग बढ़रही है। कोर्स के बाद रोजगार के अवसरों मेंशामिल कंसल्टेंट फार्मासिस्ट, डिस्पेंसरी कम्युनिटी एवं फार्मासिस्ट मेडिसिन के साथ-साथ मैनेजमेंट टेक्नीशियन में अपना कॅरियर बना सकते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने वाली प्रमुख कंपनियों में रैनबैक्सी, फाइजर, सिप्ला, पिरामल आदि कंपनियां बड़ी तादाद में रोजगार देती हैं।

वेतनमान

                                                                   

इस क्षेत्र में शुरुआती वेतन 20 से 30 हजार रुपये तक होता है। कुछ साल का अनुभव हासिल करने के बाद 50 से 50 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं। रिसर्च स्तर के छात्रों को 40 से 50 हजार रुपये प्रतिमाह का पैकेज दिया जाता है तथा विदेश में नौकरी करने पर 30-35 लाख रुपये प्रति वर्ष का पैकेज प्राप्त कर सकते हैं।

प्रमुख सस्थान

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल

                     www.niperhyd.ac.in

  • इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च

                     www.pharmadiplomas.com

  • आर्यन कॉलेज ऑफ फार्मेसी

                   www.aitgab.ac.in

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।