डेयरी टेक्नोलॉजी: बढ़ते कारोबार में बनें भागीदार      Publish Date : 22/10/2025

             डेयरी टेक्नोलॉजी: बढ़ते कारोबार में बनें भागीदार

                                                                                                                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“एग्रो बेस्ड इंडस्ट्रीज का प्रमुख हिस्सा है डेयरी सेक्टर, जिसमें सरकारी और निजी दोनों ही स्तरों पर बड़े पैमाने पर विकास कार्य हो रहे हैं। डेयरी प्लांट के बढ़ते व्यापार के चलते इसमें विशेषज्ञों की मांग बनी ही रहती है।“

आजकल सरकार डेयरी सेक्टर को प्रोत्साहित करने में लगी हुई है। इस कवायद के पीछे सरकार की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी आबादी को भी रोजगार उपलब्ध कराने की है। डेयरी इंडस्ट्रीज भारत के एग्रो-बेस्ड अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश भारत में डेयरी उद्योग का आकार अगले साल तक दोगुना होने का अनुमान है।

डेयरी इंडिया के नतीजों के मुताबिक, डेयरी उद्योग में 2011 तक संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी काफी बढ़ेगी, जबकि छोटो कंपनियों की हिस्सेदारी में गिरावट आएगी। इस क्रम में दूध और इससे बने उत्पादों में कारोबारी विस्तार साफ तौर पर नजर आएगा। ऐसे में इस फील्ड के प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी।

                                                                

कोर्स से जुड़ी जानकारी

डेयरी टेक्नोलॉजी परंपरागत रूप से वेटरेनरी ऐंड एनिमल हसबैंडी कोर्स का ही एक हिस्सा है जो एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जाता है। अनेक संस्थान डेयरी टेक्नोलॉजी से संबंधित कोर्स करवा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी केमिस्ट्री तथा डेयरी बैक्टीरियोलॉजी की पढ़ाई की जाती है। कोर्स के दौरान छात्रों को मिल्क प्रोडक्शन, डेयरी इक्वीपमेंटऐंड यूटीलिटीज, मिल्क प्रोसेसिंग ऐंड पैकेजिंग, डेयरी प्रोडक्ट्स, इंश्योरेंस, डेयरी मैनेजमेंट एवं अन्य मार्केटिंग से संबंधित जानकारियां प्रदान की जाती है।

बारहवीं के बाद दाखिला

डेयरी सेक्टर को जॉब ओरिएंटेड फील्ड माना जाता है। इसमें कैरियर बनाने के लिए कई तरह के कोर्स कराए जा रहे हैं। इसके लिए छात्रों को साइंस स्ट्रीम में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उतीर्ण होना आवश्यक है। बारहवीं की परीक्षा में बैठने वाले छात्र भी इसमें रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। एग्रीकल्चर और एनिमल साइंस के छात्रों को भी प्रमुखता दी जाती है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय दसवीं के बाद बीपीपी (बैचलर प्रिपेटरी प्रोग्राम) कोर्स करवाता है। उसके पश्चात छात्र डिप्लोमा कोर्स के लिए योग्य हो जाते हैं। डेयरी टेक्नोलॉजी का कोर्स पूरा करने के बाद एग्री- बिजनेस मैनेजमेंट या रूरल मैनेजमेंट जैसे कोर्स करना अच्छा माना जाता है।

कार्य का स्वरूप

सफलतापूर्वक कोर्स पूरा करने के पश्चात छात्र प्राइवेट अथवा पब्लिक सेक्टर में काम कर सकते हैं। इस सेक्टर में प्रशिक्षित लोगों की मांग बढ़ी है। प्रमुख भारतीय कंपनियां, जैसे अमूल, मदर डेयरी आदि में हर वर्ष काफी नियुक्तियां होती हैं। देश में अनेक डेयरी प्लांट हैं जहां प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ती है। इसके अतिरिक्त डेयरी फेडरेशन, को-ऑपरेटिव रूरल बैंक, मिल्क प्रोडक्ट प्रोसेसिंग ऐंड मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज, ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े विभाग, कृषि विभाग, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री आदि में हर वर्ष डेयरी टेक्नोलॉजीसे संबंधित प्रोफेशनलों की जरूरत होती है। काफी संख्या में डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट स्वरोजगार के रूप में भी अपने कैरियर को दिशा दे सकते हैं।

पाठ्यक्रमों की भरमार

डेयरी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा, ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट लेवल पर कई कोर्सेज संचालित किए जाते हैं। ऐंडमिशन के लिए प्रवेश-परीक्षा से गुजरना होता है। इसमें बारहवीं स्तर के भौतिकी, रसायन, गणित, कृषि एवं एनिमल साइंस से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। विभिन्न संस्थानों में नामांकन के लिए वेटरेनरी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा ऑल इंडिया कॉमन प्रवेश परीक्षा कराई जाती है। कुछ प्रमुख पाठ्यक्रमों की सूची निम्न प्रकार है-

                    कोर्स का नाम

योग्यता

अवधि

डिप्लोमा इन डेयरी टेक्नोलॉजी

बारहवीं

2 वर्ष

बीएससी इन डेयरी टेक्नोलॉजी

बारहवीं

3 वर्ष

बीटेक इन डेयरी टेक्नोलॉजी

बारहवीं

4 वर्ष

एमटेक इन डेयरी टेक्नोलॉजी

स्नातक

2 वर्ष

एमएससी इन डेयरी टेक्नोलॉजी

स्नातक

2 वर्ष

महत्वपूर्ण संस्थान

  • नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल (हरियाणा), www.ndri.res.in.

  • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू), नई दिल्ली, www.ignou.ac.in.

  • इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट, इलाहाबाद www.aaidu.org.

  • आनंद एग्रीकल्वरल यूनिवर्सिटी, आनंद (गुजरात), www.aau.in.

  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (मध्य प्रदेश), www.igau.edu.in.

  • राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार), www.pusavarsity.org.in.

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।