
नौकरी न मिल पाने का कारण यह गलतियाँ भी हो सकती हैं- Publish Date : 17/09/2025
नौकरी न मिल पाने का कारण यह गलतियाँ भी हो सकती हैं-
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
ऐसा हो सकता है कि कई प्रयासों के बाद भी आपकी जॉब सर्च ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा परिणाम नहीं दे रही हो। इसके पीछे कई एक कारण हो सकते हैं। हमारे कॅरियर विशेषज्ञ बता रहे है आपको यह गलतियाँ-
हो सकता है कि आपके रिज्यूमे में आपने अपने पद, कार्य जिम्मेदारियों, उपलब्धियों, चुनौतीपूर्ण कार्य में सफलता आदि को लेकर केवल सतही तौर पर जानकारी दी हो। इससे स्पष्ट रूप से आपने क्या किया और क्या अनुभव है, इसका पता नहीं चल पा रहा हो।
बिंदुवार अपने काम का विस्तार ना देना
क्या करें: रिज्यूमे में बिंदुवार पद, प्रोजेक्ट या काम का नाम, काम की प्रवृति, बताते हुए अपनी सफलता के बारे में लिखें। आमतौर से इसमें एंट्री लेवल के काम और पद आदि के बारे में तब तक उल्लेख नहीं किया जाता, जब तक कि आवेदित पद के लिए वे महत्वपूर्ण न हों। रिज्यूमे हड़बड़ी में तैयार करना, उसमें जानकारी आधी-अधूरी होना, स्पेलिंग्स की गलतियां आदि भी एटीएस यानी एप्लीकेट ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर द्वारा रिज्यूमे अस्वीकृत कर दिए जाने कर कारण बनती है। वहीं इससे आपके व्यक्तित्च में धैर्य की कमी भी दिखती है। रिज्यूमे भेजने से पहले कम से कम दो बार उसे पूरा जरूर पढ़ें।
परिचित रिफरेंस से आपके बारे में बुरा फीडबैक
क्या करें: जॉब के लिए आवेदन में आपके पुराने नियोक्ता में से किसी का संपर्क मांगा जाता है। ध्यान रहे कि आप जिसका भी सपर्क सूत्र दें, उससे पहले ही इसके बारे में बात करके यह स्पष्ट कर लें कि आपके लिए वहां से पॉजिटिव फीडबैक भावी नियोक्ता को मिलेगा। कई बार पुराने नियोक्ता का खराब फीडबैक भी हाथ आई नौकरी के हाथ से जाने का कारण बन सकता है।
जॉब हॉपिंग की वजहें दर्ज ना करना
क्या करेः करियर में आगे बढ़ने की इच्छा से जॉब हॉपिंग यानी जल्दी-जल्दी जाँव बदलना एक आम बात है। लेकिन इसे अपने रिज्यूमे में बहुत तरतीब से दर्ज करना चाहिए, अन्यथा यह आपकी प्रतिवद्धता पर सवाल खड़े करता है. और जॉब के मोके कम कर सकता है।
अगर एक ही कंपनी में बार-बार अलग-अलग पदों या विभागों पर रहे हैं, तो सभी बदलावों को एक हेडिंग के तहत ही रखें। अगर अलग-अलग कंपनियों में जॉब बदली है, तो हर मौके को करियर वृद्धि, सीखने, बेहतर मौके या सैलरी आदि के तौर पर लिखें। किसी अन्य कारण से ऐसा करना पड़ा, तो वह भी जरूर लिखें।
इंटरव्यू की प्रैक्टिस ना करना
क्या करें: यह भी हो सकता है कि आप इंटरव्यू में मात खा रहे हो। ऐसे में प्रश्नों के उत्तर देने की प्रैक्टिस करना आपकी मदद करेगा। इसमें आप अपने किसी वरिष्ठ अधिकारी, कलीग या इंटरनेट की मदद भी ले सकते है। इंटरव्यू कक्ष में साक्षात्कार करने वालों के सामने अपने बैठे होने और उत्तर देने की कल्पना करें।
इसमें किसी चुनौतीपूर्ण सवाल के आते ही अपनी प्रतिक्रिया को समझे। अपनी बॉडी लैंग्वेज, शब्दों के चयन, आवाज की तीव्रता आदि पर काम करें। चुनौतीपूर्ण सवालों के जवाब में क्या कहना है, इस पर अनुभवी लोगों की मदद लें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
