‘हम’ में भी ‘मैं’ बना रहे      Publish Date : 28/10/2026

              ‘हम’ में भी ‘मैं’ बना रहे

                                                                                                  प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं सरिता सिंह

‘‘हम सभी जानते हैं कि खुशहाल दाम्पत्य की नींव प्यार एवं विश्वास पर टिकी हुई होती है। हालांकि कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नि एक दूसरे पर सन्देह करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में दोनेां के बीच ‘माइक्रो प्राईवेसी’ का होना बहुत आव/यक होता है।’’

वर्तमान समय के माडर्न रिश्तों में पारदर्शिता के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का महत्व बढ़ता जा रहा है। पहले जहाँ पति-पत्नि से प्रत्येक बात को आपस में साझा करने की अपेक्षा की जाती थी, वहीं अब ‘माईक्रो प्राईवेसी’ के जैसी अवधारणाएं उभरकर सामने आ रही हैं। ‘माईक्रो प्राईवेसी’ अवधारणा के अन्तर्गत दोनों साथी एक दूसरे की पसंद के अनुसार अपने आप को पूरी तरह से बदलने के स्थान पर अपनी व्यक्तिगत पहचान को बनाए रखते हुए आपसी समझ और सम्मान के साथ अपने सम्बन्ध का विस्तार करते हैं।

  • 20-30 प्रतिशत तक व्यक्तिगत स्पेस मिलने से रिलेशनल स्ट्रेस कम होता है।

  • 70 प्रतिशत से अधिक विवाहित जोड़ों ने बताया कि एक-दूसरे की निजता का सम्मान करने से रिश्ते विश्वास बढ़ता है।

  • 25 प्रतिशत तक रिश्तों में सुतुष्टि का भाव स्वस्थ सीमाएं रखने वाले कपल्स में पाया गया है।

बढ़ता है आपसी विश्वास

                                 

जब दो अलग-अलग परिवारों से आने वाले व्यक्ति आपस में विवाह के बन्धन में बन्धते हैं, तो उनके व्यक्तित्व, सोच और रूचियों में भिन्नता का होना कोई असामान्य बात नहीं है। ऐसी स्थिति में दोनों साथी एक-दूसरे के साथ सामजस्य स्थापित करने का प्रयास करते हैं, लंकिन पूरी तरह से बदल पाना किसी भी व्यक्ति के लिए सम्भव नहीं होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि पति-पत्नि एक-दूसरे को उनके शौक, रूचियों और अधूरे सपनों का पूरा करना करने अवसर देते हुए उसका सम्मान करना चाहिए।

इसके साथ ही छोटी-छोटी बातों पर अनावश्यक रोक-टोक करने से बचें, जिससे सत्बन्धों में आपसी विश्वास एवं स्वतंत्रता दोनों ही बने रहें। ‘माइक्रो प्राइवेसी’ का अर्थ है अपने साथी को व्यक्तिगत स्थान देना, लेकिन इसका मतलब यह कतई भी नहीं है कि दोनों साथी एक-दूसरे से दूरी बना लें या साथह के द्वारा दी गई स्वतंत्रता का उपयोग गलत तरीके से करें। सही मानयनों में यह एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए सीमित लेकिन एक स्वस्थ्य स्वतंत्रता प्रदान करना होता है, जिससे सम्बन्धों में मजबूती आती है।    

क्यों है ‘माईक्रो प्राईवेसी’ की आवश्यकता

                               

दाम्पत्य जीवन में अक्सर छोटी-छोटी बातों पर रोक-टोक करने की आदतों के चलते आपसह रिश्तों में तनाव उत्पन्न हो जाता है, हालांकि, एक सच्चई यह भी है कि प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव एवं आदते अलग-अलग होती हैं। इसलिए शादी के बाद अपने जीवन साथी से पूरी तरह से बदल जाने की आशा करना कतई भी उचित नहीं हैं। इसके लिए आपसी सामंजस्य को बनाए रखना आवश्यक होता है, और इसके साथ ही दोनों साथियों एक-दूसरे की पसंद और स्वतंत्रता का भी सम्मान करना चाहिए।

कभी-कभी पति और पत्नि दोनों ही चाहते हैं कि उन्हें अपने लिए भी कुछ समय मिलना चाहिए, जैसे कि कोई किताब पढ़ना, अपने दोस्तों के साथ समय बिताना या अपनी रूचियों में व्यस्त रहना आदि। ऐसे में एक-दूसरे की निजता का ध्यान रखना और उसका सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बार-बार पूछताछ करना या अपने साथी का मोबाइल चेक करना रिश्ते में कटुता और अविश्वास को बढ़ावा देता है। इसलिए एक मजबूत एवं स्वस्थ्य रिश्ते के लिए विश्वास सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ संतुलन को बनाए रखना भी बहुत आवश्यक होता है, जिससे कि आपका दाम्पत्य जीवल सुखद एवं स्थिर बना रहे।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।