जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री का विजन      Publish Date : 24/11/2025

               जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री का विजन

                                                                                                                                                      प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रभाव खेती पर ही पड़ेगा प्रभाव

                                                                                                                                                        -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे सत्र में अपने संबोधन के दौरान सतत विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रभाव खेती से जुड़े क्षेत्र पर पड़ रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम ‘‘न्यूट्रिशन सपोर्ट प्रोगाम’’, सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना और फसल बीमा योजना के माध्यम से इन चुनौतियों से निपटा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत श्री अन्न को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा के लिए भी के लिए प्रतिबद्ध है। दुनिया को आपदाओं जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा ट्रांजैक्शन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक मजबूत और टिकाऊ व्यवस्था बनानी होगी। इन वैश्विक चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब दुनिया एकजुट होकर इस परर काम करें। इसी स्पष्ट सोच के तहत भारत ने अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह की स्थापना की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलेटरी इनिशिएटिव का प्रस्ताव रखा। इसके माध्यम से उपयेग किए जा चुके महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा कम मिलने और सेकंड लाइफ बैटरी तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास के लिए भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने की-20 देश के लिए ओपन सैटेलाइट डाटा पार्टनरशिप का प्रस्ताव भी रखा, इसके तहत समूह में शामिल देशों की अंतरिक्ष एजेंसी का सेटेलाइट डाटा वैश्विक दक्षिण के देशों को मुखिया कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सबको साथ लेकर चलने वाले भविष्य को बनाने के लिए आवश्यक सभी मंचों पर लगातार काम कर रहा है।

                                                              

ऐसे समय जब चीन और अमेरिका में वैश्विक स्तर पर अपनी-अपनी प्रौद्योगिकी कंपनियों को बढ़ावा देने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर कब्जा जमाने और दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति पर नियंत्रण करने की होड़ चल रही है ऐसे समय में भारत ने कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में त्रिपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है।

ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पार्टनरशिप नाम से इस फॉर्म की स्थापना का ऐलान जॉइंट्स वर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर पीएम नरेंद्र मोदी कनाडा के पीएम मार्ग कॉलोनी और ऑस्ट्रेलिया पीएम एथेनिक अलवर निजी की बैठक के बाद किया गया। भारतीय अधिकतर अधिकारी मान रहे हैं कि यह फर्म ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारतीय पेशवारों के प्रवेश की रहा आसान करेगा और इन देशों की उन्नत प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों को भारत का व्यापक बाजार देगा।

पीएम मोदी ने टैक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि हम आने वाली वीडियो के बेहतर भविष्य के लिए साथ काम करने को लेकर काफी उत्साहित हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।