
बहुविकल्पीय परीक्षा : सफलता की रणनीति Publish Date : 08/12/2025
बहुविकल्पीय परीक्षा : सफलता की रणनीति
प्रोफेसर आर.एस. सेंगर
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प्रश्न को हल करने के दौरान प्रश्न-पत्र पर विकल्प न देखें, बल्कि स्वयं उसका उत्तर मन में याद करने का प्रयास करें-
कॉलेज प्रवेश परीक्षा से लेकर रेलवे, बैंक, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और कई अन्य परीक्षाओं में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। बहुविकल्पीय परीक्षा कम समय में उत्तर दिए जाने वाले सैकड़ों प्रश्नों के माध्यम से अभ्यर्थियों की क्षमता को मापने का एक लोकप्रिय तरीका है। यदि आपको परीक्षा के सभी विषयों की संपूर्ण जानकारी है, लेकिन बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करने की सुनियोजित रणनीति नहीं मालूम, तो यकीनन आपके लिए कोई भी परीक्षा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसलिए बहुविकल्पीय परीक्षा की रूपरेखा को समझने के लिए आपको गहन अध्ययन व ज्ञान के साथ-साथ प्रश्नों को हल करने की एक कारगर रणनीति भी बनानी चाहिए, ताकि यह रणनीति लक्ष्य को हासिल करने में आपकी मदद कर सके।
नकारात्मक अंकन क्यों जरूरी?
परीक्षा में ऐसे भी उम्मीदवार होते हैं, जो बिना पढ़े केवल अनुमान से ही पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हैं, वहीं ऐसे भी उम्मीदवार होते हैं, जिनके पास अधिक ज्ञान एवं परीक्षा में सफल होने के लिए बेहतर दृष्टिकोण होता है। हालांकि कुशल उम्मीदवारों के परीक्षा में सफल होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। वहीं इसके विपरीत अभ्यर्थियों के ज्ञान एवं अध्ययन को प्रोत्साहित करने और अनुमान लगाने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने के लिए बहुविकल्पीय परीक्षाओं में नकारात्मक अंकन का प्रावधान किया जाता है, ताकि गलत उत्तर के लिए अंक काटकर, बेहतर अभ्यर्थियों का चयन किया जा सके।
अध्ययन का तरीका
किसी भी परीक्षा का शेड्यूल लगभग तीन महीने पहले आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित कर दिया जाता है। इसलिए परीक्षा में सफल होने के लिए अभ्यर्थियों को बेहतर दृष्टिकोण के साथ परीक्षा की तैयारी काफी पहले से ही शुरू कर देनी चाहिए। इसके अलावा आप जिस भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उस परीक्षा से संबंधित पुराने प्रश्न-पत्र व मॉक टेस्ट के अभ्यास से बहुविकल्पीय परीक्षा की तैयारी को एक नया आयाम दे सकते हैं।
परिचित प्रश्नों को प्राथमिकता दें

बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करने की सही रणनीति यह है, कि आप जिस भी प्रश्न के बारे में शत-प्रतिशत सुनिश्चित हैं, पहले उस प्रश्न को हल करें और सही उत्तर दें। इस रणनीति से जटिल प्रश्नों के लिए काफी समय बचाया जा सकता है।
मन में तलाशें उत्तर
प्रश्न को हल करने के दौरान उसका उत्तर प्रश्न-पत्र पर न देखें और प्रश्न को पढ़ने के दौरान स्वयं उसका उत्तर मन में याद करने का प्रयास करें। फिर स्वयं को जांचते हुए, यह परखें कि क्या उस प्रश्न का उत्तर प्रश्न-पत्र के विकल्प में दिया गया है। इस प्रक्रिया में आप गलत उत्तर के चयन से बच सकते हैं।
निराकरण की विधि का उपयोग
आपको सही उत्तर ज्ञात नहीं है, तो असंगत या अतार्किक विकल्पों को हटाकर एक सटीक उत्तर खोजें। जैसे कोणार्क सूर्य मंदिर किस राज्य में स्थित है? मान लीजिए इस प्रश्न के विकल्प है:- अ. कर्नाटक, ब. आंध्र प्रदेश, स. तमिलनाडु, द. ओडिशा। आप इसका सही उत्तर नहीं जानते। लेकिन, आप यह तो जानते हैं कि यह दक्षिण भारत में नहीं है। यदि इन्हें एक-एक करके हटा दिया जाए, तो आप सही उत्तर की खोज कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
