अब हर काम के लिए एआई      Publish Date : 06/11/2026

           अब हर काम के लिए एआई

                                                                                प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

85 फीसदी लोग विश्व में, एआई वाले छह उत्पादों में से कम से कम एक का उपयोग करते हैं, जिसमें शामिल हैं नेविगेशन व राइड शेयरिंग ऐप, डिजिटल असिस्टेंट, वीडियो या म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस, स्मार्ट होम डिवाइस और इंटेलिजेंट होम पर्सनल असिस्टेंट।

अब वो दौर आ पहुंचा है, जब अपनी बुद्धि ना चले तो दूसरे की बुद्धि से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर लोग भरोसा कर रहे हैं। तभी तो घर के कामकाज संभालने से लेकर अन्य कामों के लिए इससे लैस उपकरण ईजाद हो रहे हैं। एआई के इस युग में घर-बाहर के कामकाज में कहां-कहां है एआई और ये कितने सुरक्षित है।

                               

हाल ही में अमेरिका और ट्रेवल ब्लॉग शायद ट्रैवेलज्ञान ने अपने एआई कुकिंग रोबोट के साथ इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर पोस्ट की थी। इस तस्वीर की रोचकता तो किसी ने एआई से पूर्वक के पहले बनाई मार्था, क्योंकि अपने घरेलू साली में आपके घर के कौन-कौन से एआई का राज होगा, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। जैसे एआई और ऑटोमेटेड टेक्नोलॉजी के बढ़ते चलन से घर स्मार्ट हो जाएंगे और खुद को सुरक्षित रखा हुआ है तो सोने जैसा।

अब जब रोबोट कपड़े धोएंगे, तो जिससे जानने के लिए बार-बार पूछना नहीं पड़ेगा होगा, बल्कि मशहूर रोबो की होमोटेक इनमें रखी है तो उपस्थित होकर जिससे बताती जाएगी, यह भी वास्तविक में आ गया है। जाना शुरू हो चुका है ना तो, तो मैं के हाथ का वही स्वाद? रोबोट के हाथ में मिला जायेगा। रोमानिया के कालावाद स्वादिष्ट होगा। 'हां' नामक एक ऐसा रोबोट बन भी चुका है, जो चाय बनाते तो लेकर कपड़े धोने तक सभी काम पूरी दक्षता से कर सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में तैयार किया गया यह रोबोट कम लागत में खासतौर पर रसोई कामकाज में मदद के लिए तैयार किया गया है। यह इनसानों से भी कई तरह संकेतों पर प्रतिक्रिया भी देता है।

खाना पकाने से लेकर सफाई तक

एक ताजा अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में घर के तकरीबन 40 फीसदी काम एआई से होने लगे हैं। पहले से ही भारत के कई शहरों के कुछ रेस्टोरेंट में रोबोटिक खाना परोस रहे हैं, तो अब खाना बनाने के लिए भी रोबोट की मौजूदगी जा रही है। विकास की जो मार्टो, तो अब तक एआई ने ऐसे 35 व्यंजन से ज्यादा बनाना सीखा है। जिसमें कुछ एक समर्पित तरह की डिलीवरी के साथ बनना तैयार।

अब सुरक्षित का लाजिस्टिक इंटेलिजेंस, कई दुनिया में काफी संख्या गोल-गोल कपड़े शामिल हैं। "मार्केट में एआई के आ जाने से किचन में समय व ऊर्जा की काफी बचत हुई। एक अनुमान के मुताबिक एआई/रोबोटिक्स बेस्ड से बर्तन धोने में करीब 47 फीसदी समय की बचत होगी, तो सफाई में खाना पकाने जैसे कामों में 46 फीसदी तक समय

इन्हें बचत होने लगेगी। कपड़े धोने व उनकी तह लगाने में 42 फीसदी तक समय की बचत संभव हो जाएगी। बाजार से सब्जी लाने में भी रोबोट मदद करेंगे, जिससे 59% तक बचत संभव है। धीरे भी आने वाला है, जब एआई शादी करने से लेकर मेहमानों का निर्माण वाइंड मैनेज का काम करने में सक्षम होगा। इसका ताजा उदाहरण अमेरिका के कोलोराडो में हुई एक शादी है, जहां शादी की रस्में किसी पादरी ने नहीं, बल्कि एआई रोबोट ने पूरी कराई।

स्मार्ट उपकरणों की होगी भरमार

घर-बाहर में इस प्रकार कार्य करने वाला डिवाइस खुद-ब-खुद काम करे, ऐसी के दिमाग को सेट करने की मशक्कत ना करनी पड़े, काफी तैयार मिले, अगर वे सड़क दुर्घटना से, तो इस पूरी करने आपसी सहायक एआई से लैस स्मार्ट होम एप्लाइंसेस की जानना भी जरूरी है। ये टेक्नोलॉजी उपकरण खुद में कई खूबियां ओत-प्रोत पहले ही आपकी मर्जी को कर देते हैं। एआई से लैस ओवन, स्मार्ट फ्रिज, कैमरे, एसी, टीवी, कुकिंग एप्लाइंसेस लाइट ही बाजार में आम आम होने वाले है।

एआई संचालित बेबी मॉनिटर भी है, जिसमें कैमरे लगे होते हैं। जिन्हें स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। जब बच्चा जागता है या पशु-पक्षी शोर मचाता है, तो नोटिफिकेशन के लिए उसके पास अलार्म भी है। इसी तरह हैं होम रोबोट, जिनसे बच्चों का मनोरंजन करने और घर की निगरानी करने के लिए बनाया गया है। अगर चिंता कर रहे हैं, तो घबराएं तो लेना करेंगे ही, जो आपके पालतू को पहचान सकता है, कोई दूसरा व्यक्ति घर में दाखिल होता है, तो घर में अलार्म बजाकर या फोन पर अलर्ट भेजकर आपको सचेत कर देता है।

पर, सवाल सुरक्षा का भी

एआई से लैस चूंकि भले ही रोचकता लगे, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर कई चिंताएं भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के पास अपने कोई मत नहीं होते, क्योंकि यह इंसान द्वारा फीड किए गए एल्गोरिदम के हिसाब से चलती है। एपल, गूगल, कोटक, गूगल असिस्टेंट कुछ ऐसे ही एआई सहायक हैं, जिनका हम सभी अपने रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल करते हैं। इस विषय में न्यूयॉर्क टाइम्स के संस्थापक का कहना है कि एआई सिस्टम का चंद हफ्तों में विकसित हुआ। इसका हरविज्ञान उपयोगी है, लेकिन बेचारे के जीवन में एक ऐसे के चलते संवेदनशील जानकारी दूसरों तक पहुंच सकती है।

मंगल कहते हैं कि डेटा पर, मल-प्रल भी हानि का भी खतरा भी हो सकता है। इनसे मानवता संबंधी का भी अभाव भी महसूस हो सकता है। यह सब सोचने पर मजबूर कर देता है कि इस तकनीक का इस्तेमाल किस सीमा तक उचित है। विशेषज्ञ इस पहले को लेकर चिंता जता रहे हैं। जहां तक इसके सुरक्षा इंतजाम का सवाल है, तो वह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कितनी सटीक कलाई चैकेट की हो है।

2033 तक कई घरेलू काम स्वचालित हो जाएंगे, जिससे घर के कामकाज पर खर्च होने वाला समय 39% कम हो जाएगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार। 2025 तक, 95% उपभोक्ता इंटरैक्शन एआई द्वारा संचालित होगा।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।