
दो सिर वाले गेको का परिचय Publish Date : 02/11/2026
दो सिर वाले गेको का परिचय
प्रो0 डी. के. सिंह एवं अन्य
दो सिर वाले गेको (Two-headed gecko या छिपकली) प्रकृति का एक बेहद दुर्लभ और अनोखा चमत्कार हैं। विज्ञान की भाषा में इस शारीरिक स्थिति को पॉलीसिफेली (Polycephaly) या डाइसिफेली (Dicephaly) कहा जाता है। हाल ही में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में एक दुर्लभ दो सिर वाला क्रेस्टेड गेको (Crested Gecko) पैदा हुआ है, जिसका नाम 'साइमन एंड गारफंकल' (Simon and Garfunkel) रखा गया है और आजकल यह इंटरनेट पर काफी वायरल हो रहा है।

यह स्थिति क्यों होती है? (वैज्ञानिक कारण): यह स्थिति तब पैदा होती है जब गर्भ या अंडे के अंदर एक ही भ्रूण (Embryo) दो जुड़वां बच्चों में टूटने की कोशिश करता है, लेकिन वह विभाजन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को 'एक्सियल बाइफर्केशन' (Axial Bifurcation) कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप जीव का शरीर, आंतरिक अंग और पैर तो एक ही रहते हैं, लेकिन उसके पास दो अलग-अलग चालू सिर और दो स्वतंत्र दिमाग होते हैं।
शारीरिक और व्यावहारिक विशेषताएं: सिर वाले गेको के दोनों मुंह पूरी तरह काम कर सकते हैं। दोनों सिरों के अपने अलग-अलग दिमाग होने के कारण उनका व्यवहार भी अलग हो सकता है। शुरुआत में दो अलग-अलग दिमाग होने के कारण इन्हें चलने में परेशानी होती है क्योंकि दोनों सिर शरीर को अलग-अलग दिशा में ले जाना चाहते हैं। लेकिन समय के साथ वे एक टीम की तरह तालमेल बिठाना सीख जाते हैं।
जीवित रहने की चुनौतियाँ (Survival Odds):

प्रकृति या जंगलों में ऐसे जीवों का जीवित रहना बेहद कठिन होता है और वे जन्म के कुछ ही दिनों बाद मर जाते हैं। यदि इन्हें किसी विशेषज्ञ या प्रजनक (Breeders) की देखरेख में रखा जाए, तो ये जीवित रह सकते हैं।
प्रकृति के नियमों से छेड़छाड़ का परिणाम हमेशा नुकसान होता है। जब हम मिट्टी, पानी, हवा और जैव-विविधता का संतुलन बिगाड़ते हैं, तो प्रकृति किसी न किसी रूप में उसका जवाब देती है—सूखा, बाढ़, प्रदूषण, घटती मिट्टी की उर्वरता और बदलता मौसम।
प्रकृति को जीतने की नहीं, समझने और उसके साथ चलने की जरूरत है।
जो किसान प्रकृति के नियमों का सम्मान करता है, वही लंबे समय तक स्वस्थ मिट्टी, अच्छी फसल और समृद्ध भविष्य पा सकता है।
लेखकः प्रोफेसर डी. के. सिंह, पशु चिकित्सा महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मोदीपुरम, मेरठ।