हर व्यक्ति तक एआई की 88 देशों ने ली शपथ      Publish Date : 23/10/2026

हर व्यक्ति तक एआई की 88 देशों ने ली शपथ

                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

  • 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण का संकल्प

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी वर्चस्व की दौड़ के बीच नई दिल्ली से एक अलग संदेश उभरा है। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्राजील सहित 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एआई को शक्ति संतुलन का औजार नहीं, बल्कि मानवता के साझा भविष्य का आधार मानते हुए "नई दिल्ली घोषणा-पत्र" को अपनाया है।

यह घोषणा पत्र 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की भावना पर आधारित है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि एआई के लाभ कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित न रहकर पूरी मानवता के लिए सुलभ और किफायती होने चाहिए।

सात स्तंभों पर आधारित वैश्विक ढांचा:

इस घोषणा पत्र को सात प्रमुख स्तंभों पर संरक्षित किया गया है। इनमें एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण, सुरक्षित और विश्वसनीय एआई, विज्ञान के लिए एआई, सामाजिक सशक्तिकरण हेतु पहुंच, मानव पूंजी विकास, सक्षम, लचीला और नवोन्मेषी एआई तंत्र का निर्माण आदि शामिल है।

'डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर और ग्लोबल प्लेटफॉर्म':

                             

सम्मेलन में "एआई के लोकतांत्रिक प्रसार के लिए चार्टर" को स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी ढांचे के रूप में स्वीकार किया गया। उद्देश्य बुनियादी एआई संसाधनों तक सस्ती पहुंच, स्थानीय समाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए मजबूत एआई ढांचा तैयार करना है।

इसके साथ "ग्लोबल एआई इंपैक्ट काम्पस" की स्थापना की घोषणा की गई, जो विभिन्न देशों में सफल एआई उपयोग मामलों को साझा करने और उन्हें अन्य देशों में लागू करने में सहयोग करेगा। "ट्रस्टेड एआई काम्पस" को सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय एआई प्रणालियों के लिए मानकों, उपकरणों और सर्वोत्तम प्रथाओं के भंडार के रूप में विकसित किया जाएगा।

विज्ञान, कौशल और ऊर्जा पर जोर:

घोषणा-पत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को गति देने के लिए "इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशंस" के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। मानव पूंजी विकास के तहत एआई स्किलिंग, री-स्किलिंग और एआई साक्षरता को प्राथमिकता दी गई है। "एआई वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्लेबुक" और री-स्किलिंग सिद्धांतों को एआई-चालित अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी का आधार माना गया।

एआई पर पीएम मोदी के विजन के मुरीद हुए सेम आल्टमैन

                               

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेज रफ्तार प्रगति के बीच सेम आल्टमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एआई विजन की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि एआई को लोकतांत्रिक बनाकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की प्रधानमंत्री की सोच न केवल दूरदर्शी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक संतुलित और जिम्मेदार तकनीकी भविष्य की दिशा भी तय करती है।

भारत दौरे पर आए ओपन एआई के सीईओ आल्टमैन ने कहा कि भारत में एआई को लेकर जो ऊर्जा, नवाचार और उत्साह दिखाई दे रहा है, वह अद्भुत है। उन्होंने विशेष रूप से आइआइटी दिल्ली में अपने संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवा नवप्रवर्तक एआई की पूरी तकनीकी श्रृंखला पर तेजी से काम कर रहे हैं। आल्टमैन ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन से बेहद प्रभावित हूं।

एआई को लोकतांत्रिक बनाना, यह सुनिश्चित करना कि समाज का हर वर्ग इसका लाभ उठाए और साथ ही संभावित जोखिमों को संतुलित ढंग से नियंत्रित करना यह नेतृत्व की परिपक्व सोच को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भारत ओपनएआई के लिए दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बन चुका है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।