एआई पर अंधा विश्वास न करें, टूल की तरह करें उपयोग      Publish Date : 21/10/2026

एआई पर अंधा विश्वास न करें, टूल की तरह करें उपयोग

                                                                                           प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

एकेटीयू में एआई पर मंथनः विशेषज्ञों ने बताया कि इंसानी दिमाग की पांच लाख फोन से अधिक तेज प्रोसेसिंग पावर होती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करना बेहद आसान है, लेकिन हमें एआई पर अंधा विश्वास नहीं करना चाहिए। इसमें भी गलतियां होती हैं। बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए इसका उपयोग किसी टूल की तरह करना चाहिए। कलाम सेंटर के संस्थापक सृजन पाल सिंह ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) में विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एआई मंथन के दौरान ये बातें कहीं।

उच्च व तकनीकी शिक्षा में एआई को चुनौतियां व संभावनाएं विषयक सत्र में उन्होंने कहा कि एआई टूल का इस्तेमाल सामाजिक, आर्थिक हालात से परे कोई भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, एलन मस्क के मुताबिक आने वाले समय में हर घर में दो रोबोट होंगे लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा दिमाग रोबोट या एआई से एक लाख गुना ज्यादा तेजी से काम करता है। हमारा दिमाग पांच लाख आईफोन से ज्यादा तेजी से प्रोसेसिंग करता है। 1500 टेराबाइट वाली हार्ड डिस्क से ज्यादा क्षमता हमारे दिमाग में है।

                                   

इस मौके पर सृजन पाल ने कहा कि एआई बिना कमांड के काम नहीं कर सकता है। इंसानी दिमाग खुद सृजन करता है। इमोशंस नहीं होने के कारण एआई निर्णय लेने में गलती करता है। इसलिए एआई को सहयोगी और टूल की तरह प्रयोग करें।

एआई प्रयोग के बेहतर तरीके

  • एआई ऐप को सही निर्देश दें।
  • सही कंटेंट, फॉर्मेट व लेंथ बताएं।
  • एआई से तैयार सामग्री को दोबारा से जरूर चेक करें।
  • सोशल मीडिया के प्रयोग में बरते सावधानी।
  • व्यक्तिगत डेटा एआई से साझा कदापि न करें।
  • जरूरी चैनल सब्सक्राइब कर प्रयोग करें।
  • सूचनाओं के विस्फोट से बचें।
  • बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने पर ध्यान दें।
  • बच्चों को गुड और बैड इंटरनेट के बारे में बताएं।
  • माइंडसेट से दिमाग को सही दिशा मिलेगी।

नोटिफिकेशन रखें ऑफ, 40% कम हो रही प्रॉडक्टिविटी

एकेटीयू में आयोजित एआई मंथन में राहस फाउंडेशन दिल्ली के संस्थापक मधुकर पांडे ने कहा कि हम दैनिक जीवन में गूगल मैप, यूट्यूब, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम इसके नोटिफिकेशन ऑन रखते हैं। इससे हमारी उत्पादकता प्रभावित हो रही है। प्रॉडक्टिविटी कंसल्टेंट और स्पेशल मीडिया के प्रयोग में सावधानी सत्र में उन्होंने कहा कि ज्यादातर यूजर्स काम के बीच नोटिफिकेशन देखने लगते हैं और फिर उसी में उलझ जाते हैं।

एक अंतरराष्ट्रीय शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि नोटिफिकेशन की वजह से हर 20-30 सेकंड में यूजर्स डिस्ट्रैक्ट होते हैं। इसलिए हमें नोटिफिकेशन ऑफ रखने चाहिए। मधुकर ने कहा कि सोशल मीडिया नशा बन गया है। यह हमारी मानसिक अशांति बढ़ा रहा है। हमें खाने-पीने के समय सोशल मीडिया का प्रयोग बंद करना होगा। उन्होंने कहा कि एआई अपनी बुद्धि नापकर उससे जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराता है। एआई डेटा और पैटर्न पर आधारित तकनीक है। एआई मानव से ही सीखता है। लिहाजा आप सृजनात्मक और बुद्धिमत्ता से इसका बेहतर प्रयोग कर सकते हैं।

600 एआई डाटा लैब बना रहे, फेलोशिप भी दे रहे हैं-

एकेटीयू में आयोजित दो दिवसीय मंथन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि एआई के करिकुलम के जरिये उच्च शिक्षा में अहम बदलाव लाया जा सकता है। एआई के मामले में अमेरिका और चीन काफी आगे हैं। हमें इस गैप को तेजी से कम करना होगा। एआई को बनाने के लिए सुपर कंप्यूटर की जरूरत होती है। आज सारा विश्व अमेरिका के मॉडल पर निर्भर है। इसे कम करने के लिए भारत अपने मॉडल पर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एआई में एप्लीकेशन बनाने का भी काम हो रहा है। अब तक 50 ऐप बनाए जा चुके हैं। एक्यूब में काम करने वाले छात्रों को फेलोशिप दी जा रही है। देशभर में 600 डाटा लैब बना रहे हैं, ताकि छोटे शहरों के छात्रों को डाटा साइंटिस्ट बनाया जा सके। ध्यान देने की जरूरत है कि छात्र किस एआई टूल का प्रयोग कर रहे हैं।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस मौके पर कहा कि विभिन्न विभागों की समस्याएं विश्वविद्यालयों में भेजकर समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। नई नीतियों को तेजी से बनाने के साथ ही लागू करने पर जोर देने की जरूरत है। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पीपी चक्रवर्ती ने कहा कि आत्मनिर्भर एआई भारत के लिए सबसे जरूरी है। कार्यशाला में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडेय, आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट को विशेष सचिव व यूपीडेस्को की एमडी नेहा जैन, प्राविधिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण, विज्ञान व तकनीकी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव, एक्सेंचर की विनोला डॉनिअल, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के डॉ. अहलाद कुमार और राज्यपाल के ओएसडी डॉ. सुधीर एम बोबडे ने अपने विचार रखे।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।