यूएन में लगी गुहार, मानवता के लिए एआई की रफ्तार घटाएं      Publish Date : 20/10/2026

यूएन में लगी गुहार, मानवता के लिए एआई की रफ्तार घटाएं

                                                                                          प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित खतरों को लेकर दुनिया की चिंता अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) तक पहुंच गई है। परिषद की पहली विशेष बैठक में एआई क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों ने भी माना कि तकनीक के विकास के साथ उसके सुरक्षित इस्तेमाल और नियंत्रण के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है।

दिग्गजों ने कहा कि एआई को हमने बना तो दिया, लेकिन इसके नियंत्रण से बाहर होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बैठक में ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई ने चेताया कि एआई से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऑल्टमैन ने कहा कि यह तकनीक रचनात्मकता और खोज के नए दौर की शुरुआत कर सकती है, लेकिन गलत दिशा में बढ़ी तो समाज में उथल-पुथल और अव्यवस्था भी पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि एआई से मानवता को तबाही का जोखिम एक प्रतिशत हो, 10 प्रतिशत हो या उससे भी कम—कोई भी स्तर स्वीकार्य नहीं है।

                               

मीनाब स्कूल पर हमला : एआई पर भरोसे ने कराई बड़ी चूक

ईरान के मीनाब शहर में 28 फरवरी को एक स्कूल पर हुआ मिसाइल हमला अमेरिकी सेना की खुफिया और लक्ष्य निर्धारण प्रक्रिया में गंभीर चूक की ओर इशारा करता है। एक अमेरिकी जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हमले में इस्तेमाल लक्ष्य संबंधी जानकारी पुरानी थी और एआई आधारित प्रणाली पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया गया। हमले में 150 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें कम से कम 123 बच्चे थे।

ऑस्ट्रेलिया की सरकारी स्वास्थ्य वेबसाइट तक पहुंचा एआई एजेंट

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बताया कि 18 जून को ओपनएआई के एआई एजेंटों ने सरकारी स्वास्थ्य से जुड़ी एक वेबसाइट में सेंध लगाई और गैर-सार्वजनिक सूचनाओं तक पहुंच बनाई।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।