इंटरनेट के हमारे जीवन का हिस्सा बनने की कहानी      Publish Date : 05/10/2026

इंटरनेट के हमारे जीवन का हिस्सा बनने की कहानी

                                                                                    प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

इंटरनेट एक ऐसी व्यवस्था है, जिससे दुनिया भर के कंप्यूटर एक-दूसरे को संदेश भेज सकते हैं। व्यावहारिक रूप से इंटरनेट से जुड़ी हर चीज में एक कंप्यूटर होता है। 1960 के दशक में, कंप्यूटर केवल खास कामों (जैसे वैज्ञानिक शोध) के लिए इस्तेमाल होते थे। उस समय, अगर दो कंप्यूटरों को डाटा शेयर करना होता, तो लोग पहले से समय तय करते और फिर टेलीफोन कॉल के जरिये एक कंप्यूटर को दूसरे से जोड़ते। अमेरिका एक ऐसा नेटवर्क चाहता था, जिससे टेलीफोन लाइन खराब होने के बावजूद कंप्यूटर अपने आप संदेश भेज सकें।

वर्ष 1962 में, अमेरिकी इंजीनियर पॉल बरन रैंड कॉर्प ने 'हॉट पोटैटो नेटवर्किंग' नामक एक नया विचार दिया। इसमें संदेश को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया जाता था। इन टुकड़ों में एक क्रम संख्या होती, ताकि दूसरा कंप्यूटर पूरा संदेश समझ सके। इस विचार को आज के इंटरनेट के रूप में लागू किया गया। इन छोटे टुकड़ों को 'पैकेट' और इस प्रणाली को 'पैकेट स्विच्ड नेटवर्किंग' नाम मिला।

                                       

इंटरनेट के जनक विन्ट सर्फ ने ऐसी व्यवस्था बनाई, जिसमें कोई पैकेट गायब हो जाए, तो उसे प्राप्त करने वाला कंप्यूटर भेजने वाले से उसे दोबारा मांग सके। इसे ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल कहते हैं। वर्ष 1990 के आसपास टिम बर्नर्स-ली ने सीईआरएन (यूरोपियन ऑर्गेनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च) में काम करते हुए वर्ल्ड वाइड वेब की शुरुआत की, ताकि उनके सहयोगी आसानी से अपने शोध को एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें।

उन्होंने एक ऐसी प्रणाली बनाई, जिसमें एक कंप्यूटर पर कई 'पेज' हो सकते थे। इसके लिए उन्होंने यूआरएल (यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) का विचार दिया, जो किसी भी कंप्यूटर को इंगित कर सकता था। बर्नर्स-ली ने पहला वेब ब्राउजर और वेब सर्वर बनाया। आज किसी यूआरएल में हम जो 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू' देखते हैं, यह उसी वर्ल्ड वाइड वेब से आया है। उन्होंने इसे मुख्य रूप से टेक्स्ट, तस्वीरें और फाइलें साझा करने के लिए बनाया था, लेकिन इंटरनेट ने इसे वीडियो और ऑडियो के लिए भी उपयुक्त बना दिया।

यूट्यूब व इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म उसी का पालन करते हैं। कंप्यूटर अब सस्ते हो गए हैं, जिसके चलते लाखों-करोड़ों डिवाइस इंटरनेट से जुड़े हैं। इनमें सेंसर शामिल हैं, जैसे सिक्योरिटी कैमरा। इसके अलावा, स्मार्ट थर्मोस्टेट है, जो आपके घर की हीटिंग या कूलिंग को चालू-बंद करता है। इन सभी स्मार्ट डिवाइस को 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' कहा जाता है। आज, लगभग हर चीज इंटरनेट से जुड़ी है। यह एक ऐसा जाल है, जो न सिर्फ कंप्यूटरों को, बल्कि हमारी जिंदगी को भी जोड़ता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।