सच्ची बुद्धिमत्ता और तकनीक के सही उपयोग से की मिलेगी तरक्की      Publish Date : 04/09/2026

सच्ची बुद्धिमत्ता और तकनीक के सही उपयोग से की मिलेगी तरक्की

                                                                                                                        प्रो0 आर. एस. सेंगर

जब मैं क्लास में बच्चों को देखता हूँ, तो उनके चेहरे पर नई चीजें जानने की उत्सुकता के साथ-साथ स्क्रीन की दुनिया में बढ़ता हुआ भटकाव भी दिखाई देता है। पढ़ने की सामग्री, गृहकार, शैक्षणिक संसाधन, ऑनलाइन कक्षाएं और सीखने की असीमित अवसर हमारी उंगलियों पर उपलब्ध है। आज तकनीक ने शिक्षा को सरल, सुविधाजनक और व्यापक बनाया है, किंतु सुविधा के बीच हमारे सामने प्रश्न खड़ा होता है कि क्या हम डिजिटल संसाधनों का उपयोग अपने विकास के लिए कर रहे हैं या धीरे धीरे इनके द्वारा नियंत्रित होते जा रहे हैं।

इक्कीसवीं सदी के युग में तकनीक से दूरी बनाना हमारा उद्देश्य नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया का बहिष्कार करना ना तो संभव है ही है और ना ही आवश्यक इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वास्तविक आवश्यकता है कि हम तकनीक का उपयोग सजगता, जागरूकता और अपने सीखने के लक्ष्यों के अनुरूप करें। स्टूडेंट के पास जानकारी की कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि वे सही जानकारी का चयन करना सीखें। क्योंकि इंटरनेट पर उपलब्ध हर सामग्री ज्ञानवर्धक नहीं हो सकती। सच्ची बुद्धिमता इस बात में नहीं है कि हम तकनीक का कितना अधिक उपयोग करते हैं।

इसमें हम उसका उपयोग कब क्यों और कितनी समझदारी के साथ करते हैं। यदि तकनीक हमारे ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व के विकास का माध्यम बनती है, तो वह वरदान है, लेकिन यदि हम इसके उपयोग के बजाय उसके आकर्षण के नियंत्रण में आ जाते हैं, तो वही तकनीक हमारे लिए बाधा बन सकती है। एक छात्र यदि पढ़ाई के लिए मोबाइल उठाता है, तो कुछ ही समय बाद वह मनोरंजन गेम एवं इंटरनेट मीडिया में उलझ जाता है, तो वहां उपकरण उसके उद्देश्य को नियंत्रित करने लगा है, इसलिए डिजिटल उपकरण का उपयोग करते समय हमें स्वयं से पूछना चाहिए। मैं यह क्यों कर रहा हूं और इससे मुझे क्या सीखने या प्राप्त करने में सहायता मिलेगी, इसलिए एक फैसिलिटेटर के रूप में मेरा उद्देश्य केवल क्लास में निर्देश देना या ज्ञान बांटने तक सीमित नहीं है, अपितु मेरा वास्तविक उत्तरदायित्व स्टूडेंट्स को एक ऐसा वातावरण देना है, जहाँ वह डिजिटल अनुशासन सुविधा के साथ विवेक गति के साथ धैर्य और पर्याप्त जानकारी के साथ चिंतन का संतुलन बनाकर रख सकें।

मैं छात्रों से केवल यह कहना और बताना चाहता हूं कि तकनीकी क्या कर सकती है, बल्कि उन्हें यह सिखाना चाहता हूँ कि तकनीक के साथ उनका खुद का संबंध कैसा होना चाहिए। उनके भीतर विवेक आलोचनात्मक सोच और डिजिटल अनुशासन को जगाना है। पढ़ाई, खेल परिवार के साथ संवाद, प्रकृति से जुड़ाव और स्वयं के लिए शांत समय।इन सभी का संतुलन बनाने में जब हम उनके सहयात्री और मार्गदर्शक बनते हैं, तो वे तकनीक के प्रति डरे बिना उसका समझदारी से संचालन करना सीखते हैं और जब एक विद्यार्थी तकनीक को अपना स्वामी नहीं बल्कि अपने विकास का माध्यम बनाता है और हम एक मार्गदर्शक के रूप में उनकी इस यात्रा को सुगम बनाते हैं।तभी डिजिटल युग में विचारपूर्ण शिक्षा का सही उद्देश्य सिद्ध हो पाता है।

आज की इस आधुनिक दुनिया में डिजिटल उपकरण हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से हमें पढ़ाई की सामग्री, असाइनमेंट, शैक्षिक संसाधन और सीखने के अन्य अवसर मिलते हैं। ये उपकरण हमारे ज्ञान बढ़ाने में बहुत सहायक हैं। लेकिन डिजिटल उपकरणों का उपयोग हमेशा एक निश्चित उद्देश्य के साथ करना चाहिए।

हमें इनसे दूरी बनाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने सीखने के लक्ष्यों के अनुसार उनका उचित और सही उपयोग करना चाहिए। हमें अपनी प्राथमिकताओं को समझना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि हमारे लिए क्या आवश्यक है और अंत में हम यही कहना चाहते हैं कि तकनीकी हमारे लिए बहुत उपयोगी है यदि इसका उपयोग सही उद्देश्य और सही समय पर किया जाए। इस पर डिजिटल उपकरणों का समझदारी से उपयोग हमारे भविष्य के लिए अच्छा साबित हो सकता है। जीवन में यदि प्राथमिकता देखें तो स्टूडेंट्स का पहला स्थान पढ़ाई का होता है। दूसरा स्वास्थ्य और तीसरा परिवार और चौथा समय का सदुपयोग होता है। हमारी प्राथमिकता स्पष्ट होती है, तो हम सही निर्णय ले पाते हैं। हर दिन हमारे सामने डिजिटल कंटेंट विकल्पों की भरमार लगा देता है रीज गेम्स वीडियो। यह मन में भ्रम पैदा करती है, इसलिए मैं एक छोटा नियम अपनाता हूं। पहले जरूरी काम फिर मोबाइल जब हम तकनीक को उद्देश्य से चलाएंगे तभी वह हमें सफल बनाएगी, नहीं तो समय बर्बाद करेगी।

अपना Time Table बनाकर पढ़ाई का समय निर्धारित करें और अपने ध्यान को भटकने न दें।तकनीकी मालकिन बनकर रहना होगा। गुलाम बनकर नहीं, तभी आपके पास सच्चा संस्कार होगा।

इस युग में डिजिटल उपकरणों की मदद से हमें ऑनलाइन कक्षाएँ, ई बुक्स। शैक्षिक वीडियो, असाइनमेंट, क्विज, शिक्षक, एप्लिकेशन और अनेक प्रकार की शैक्षिक सामग्री डिजिटल माध्यम से ही मिलती हैं। इन साधनों की मदद से हम किसी भी विषय को लेकर बेहतर तरीके से समझ सकते हैं, पढ़ सकते हैं और अपने ज्ञान को भी बढ़ा सकते हैं और नई नई जानकारी में काफी इजाफा कर सकते हैं। इसलिए डिजिटल संसाधनों का उपयोग करना हमारी शिक्षा के लिए बहुत लाभकारी भी साबित हुआ है, लेकिन इन संसाधनों का उपयोग उद्देश्य के साथ करना बहुत जरूरी है। उद्देश्य से भटके तो हमारा समय बर्बाद होगा और ध्यान भटक सकता है। इंटरनेट, मीडिया गेम्स, मनोरंजन वीडियो और अनावश्यक वेबसाइट हमारा समय और ऊर्जा नष्ट कर सकते हैं। इसलिए हमें यह तय करना ही होगा कि हमें डिजिटल संसाधनों का उपयोग किस लिए करना है और कितना करना है। इससे हमारा अनुशासन बना रहेगा और हमारे जो लक्ष्य हैं वो पूरे हो सकेंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।