
गन्ने की फसल की बंधाई के बाद Publish Date : 02/09/2026
गन्ने की फसल की बंधाई के बाद
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
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गन्ना बंधाई के बाद कौन-सी खाद दें, जिससे गन्ना मोटा, वजनदार और अच्छी रिकवरी वाला बने?
अगस्त का महीना गन्ने की फसल के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस समय यदि बंधाई के बाद सही मात्रा में खाद और पोषण दिया जाए, तो गन्ने की मोटाई, वजन और चीनी की रिकवरी में अच्छा सुधार देखा जा सकता है।
1. Co-0238 (नई फसल – 18 अप्रैल बुवाई)
प्रति एकड़:
I. यूरिया – 55–60 किग्रा
II. MOP (पोटाश 0:0:60) – 25 किग्रा
III. बेंटोनाइट सल्फर – 8–10 किग्रा (यदि पहले न डाला हो)
खाद देने के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें, ताकि पोषक तत्व जड़ों तक आसानी से पहुँच सकें।
2. Co-0118 (पेड़ी)
प्रति एकड़:
I. यूरिया – 60–65 किग्रा
II. MOP (पोटाश) – 25–30 किग्रा
पेड़ी की फसल में जड़ें पहले से विकसित होती हैं, इसलिए इस अवस्था में पोटाश देने से गन्ने की मोटाई और वजन बढ़ाने में अच्छी मदद मिलती है।
3. Co-0238 (पेड़ी)
प्रति एकड़:
I. यूरिया – 60 किग्रा
II. MOP (पोटाश) – 25–30 किग्रा
4. पत्तियों पर स्प्रे कब करें?
बंधाई के लगभग 20–25 दिन बाद इनमें से किसी एक का छिड़काव करें—
1. 13:00:45 (पोटैशियम नाइट्रेट) – 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1% घोल)
या
2. 00:00:50 (SOP) – 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1% घोल)
यदि पत्तियों में किसी सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी दिखाई दे रही हो, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार माइक्रोन्यूट्रिएंट मिश्रण का भी छिड़काव किया जा सकता है।
अधिक उपज के लिए केवल खाद ही पर्याप्त नहीं होता है-
यदि आपका लक्ष्य 500–600 क्विंटल प्रति एकड़ या उससे अधिक उत्पादन लेना है, तो इन बातों का भी ध्यान रखें—
I. खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें।
II. खरपतवार को समय पर नियंत्रित करें।
III. कीट एवं रोग का नियमित निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत नियंत्रण करें।
IV. वर्षा न होने पर 8–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें (मिट्टी की स्थिति के अनुसार)।
V. यदि मिट्टी में सिलिकॉन की कमी हो, तो सिलिकॉन आधारित उत्पादों का उपयोग गन्ने को मजबूत बनाने और गिरने की संभावना कम करने में सहायक हो सकता है।
गन्ने की अच्छी पैदावार केवल अधिक खाद डालने से नहीं मिलती, बल्कि संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई और सही फसल प्रबंधन से मिलती है। यदि बंधाई के बाद इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो गन्ना मोटा, वजनदार और बेहतर रिकवरी वाला बनने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कृषि सलाह: किसी भी उर्वरक का प्रयोग करने से पहले अपनी मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें, ताकि फसल की आवश्यकता के अनुसार सही मात्रा का उपयोग किया जा सके।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
