चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का नया पैतरा      Publish Date : 15/08/2026

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का नया पैतरा

                                                                                      प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

चीनी की कीमतों में लगातार हो रही वृद्वि के चलते, जल्द ही गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक लग सकती है, चीनी का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार कर रही इसकी तैयारी। चीनी की बढ़ती कीमतों और महाराष्ट्र-कर्नाटक में कम बारिश से उत्पादन घटने की आशंका के बीच सरकार गन्ने से एथेनॉल बनाने की मात्रा सीमित करने पर विचार कर रही है। मौजूदा सीजन में करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई थी। सरकार गन्ने से एथेनॉल कम करके चीनी उत्पादन बढ़ाना चाहती है, जबकि एथेनॉल की कमी की भरपाई मक्का और चावल से करने की तैयारी है। सरकार के द्वारा यह फैसला अगले सीजन से पहले लिया जा सकता है।

देश में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और अगले सीजन में उत्पादन घटने की आशंका के बीच केंद्र सरकार गन्ने के उपयोग को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए चीनी सीजन में गन्ने से एथेनॉल बनाने की मात्रा सीमित करने पर विचार कर रही है। इसका मकसद गन्ने से ज्यादा चीनी बनाकर घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को काबू में रखना है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण अगले साल गन्ने और चीनी के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। दोनों राज्य देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि गन्ने का ज्यादा हिस्सा एथेनॉल के बजाय चीनी उत्पादन में इस्तेमाल हो, ताकि देश में चीनी की कमी न हो और आयात की जरूरत न पड़े।

लगभग 30 लाख टन चीनी का होगा अतिरिक्त उत्पादन

मौजूदा सीजन में चीनी मिलों ने करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट की है। यह देश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 10 फीसदी है। सरकार अगर अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल बनाने पर इसी तरह की सीमा लगाती है, तो करीब 30 लाख टन अतिरिक्त चीनी घरेलू बाजार के लिए उपलब्ध हो सकती है। इससे कमजोर उत्पादन की भरपाई करने में भी पर्याप्त मदद मिल सकती है।

चीनी की कीमतें हैं रिकॉर्ड स्तर पर

देश में चीनी की कीमतें पिछले एक महीने में करीब 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। इसके साथ ही आने वाले महीनों में भी चीनी की कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका है। इसकी एक वजह घरेलू बाजार में चीनी की घटती उपलब्धता है, जबकि त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है। अपनी नीतियों के चलते सरकार चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा चुकी है और पिछले महीने कारोबारियों के पास चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की थी। अब गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को सीमित करने का कदम घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास का ही एक हिस्सा माना जा रहा है।

किन चीजों से एथेनॉल बनाने पर लग सकती है रोक

सूत्रों से प्रप्त जानकारी के अनुसार, सरकार चीनी मिलों को गन्ने के रस (Sugarcane Juice) और B-Heavy Molasses से एथेनॉल बनाने पर भी रोक सकती है। इसके बजाय मिलों को मुख्य रूप से C-Heavy Molasses से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी जा सकती है। C-Heavy Molasses वह उप-उत्पाद है, जिसमें चीनी की मात्रा कम होती है और जिसमें से ज्यादातर चीनी पहले ही निकाल ली जाती है। इस व्यवस्था से गन्ने से ज्यादा चीनी निकालने का रास्ता खुलेगा और उसके बाद बची सामग्री से एथेनॉल बनाया जा सकेगा।

20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य कैसे पूरा होगा

सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। अगर गन्ने से एथेनॉल की उपलब्धता कम होती है, तो इस लक्ष्य को बनाए रखने के लिए मक्का और चावल से एथेनॉल उत्पादन बढ़ाना पड़ सकता है। फिलहाल मक्का और चावल का स्टॉक पर्याप्त बताया जा रहा है। इसलिए सरकार गन्ने से एथेनॉल की कम उपलब्धता की भरपाई इन अनाजों से करने की कोशिश कर सकती है।

फैसला कब तक हो सकता है

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अगले महीने के अंत तक इस मुद्दे पर फैसला ले सकती है। नए मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उद्योग को एथेनॉल का आवंटन सीजन शुरू होने से पहले तय होने की उम्मीद है। इसके बाद सरकारी ईंधन कंपनियां एथेनॉल खरीदने के लिए टेंडर जारी करेंगी। वहीं उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इस फैसले से चीनी मिलों को बड़ा नुकसान होने की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा हालात में चीनी की कीमत ज्यादा होने के कारण मिलों को गन्ने से चीनी बनाकर बेचने में एथेनॉल उत्पादन की तुलना में बेहतर कमाई हो सकती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।