कृषि-उद्यमिता में युवा और महिला सशक्तिकरण      Publish Date : 11/08/2026

कृषि-उद्यमिता में युवा और महिला सशक्तिकरण

                                                                                    प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़ी हुई है। वर्तमान समय में कृषि को केवल एक पारंपरिक पेशा न मानकर उद्यमिता के रूप में देखा जा रहा है। इस संदर्भ में युवा और महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कृषि-उद्यमिता का अभिप्राय है खेती और कृषि से जुड़े व्यवसायों में उद्यमिता को बढ़ावा देना है। कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर, निरंतर विकास और महिला सशक्तिकरण की व्यापक संभावनाएँ हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण, देश की अर्थव्यवस्था मजबूती प्रदान करने और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित् करने की दिशा में कृषि का विकास अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण हो जाता है।

वन की मिट्टी और सूक्ष्मजीव

मतलब जंगल के पेड़ अकेले नहीं बढ़ते। जड़ के नीचे करोड़ों ‘अच्छे बैक्टीरिया-फंगस’ होते हैं जो पेड़ की मदद करते हैं। इसे ‘राइजोस्फीयर’ कहते हैं।

1. बरगद + बरगदः एजोटोबैक्टर, बैसिलस, माइकोराइज़ा 

काम: हवा से नाइट्रोजन खींचकर मिट्टी में डालते हैं + जड़ का एरिया बढ़ाते हैं। बरगद 100 साल तक जीता है इसी वजह से।

2. पीपलः लैक्टोबैसिलस, एक्टीनोमाइसेट्स, ट्राइकोडर्मा 

काम: मिट्टी को बीमारी से बचाते हैं। ट्राइकोडर्मा तो फंगस का दुश्मन है। पीपल की जड़ बहुत गहरी जाती है।

3. गूलरः नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया + माइकोराइज़ा 

काम: गूलर की जड़ गांठ बनाकर नाइट्रोजन फिक्स करती है। बिल्कुल दलहन की तरह। इसलिए गूलर के नीचे की मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है।

4. आमः स्यूडोमोनास, बैसिलस सबटिलिस 

काम: ये ‘पौधे के डॉक्टर’ हैं। जड़ सड़न, डाईबैक जैसी बीमारी नहीं लगने देते। आम के बगीचे में ये बैक्टीरिया बहुत जरूरी हैं।

5. नीम: स्यूडोमोनास, बैसिलस 

काम: कीट और फंगस से बचाव करते हैं। नीम की कड़वाहट + ये बैक्टीरिया = डबल सुरक्षा।

6. इमलीः फॉस्फेट बैक्टीरिया + एक्टीनोमाइसेट्स 

काम: मिट्टी में फंसे फॉस्फोरस को पौधे के खाने लायक बनाते हैं। इमली को फॉस्फोरस बहुत चाहिए फल के लिए।

किसान के लिए 3 सीखः

1. जंगल की मिट्टी जादू हैः बरगद-पीपल के नीचे की मिट्टी लेकर आओ और नर्सरी में मिलाओ। उसमें ये सारे अच्छे सूक्ष्मजीव फ्री में मिल जाएंगे।

2. रसायन कम डालोः ज्यादा यूरिया-डीएपी डालने से ये दोस्त बैक्टीरिया मर जाते हैं। फिर पेड़ बीमार पड़ता है।

3. जैविक खाद डालोः गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट डालोगे तो ये बैक्टीरिया खुद बढ़ जाएंगे और फिर पौधा भी बढ़ेगा।

अपने आम के पौधे के लिए ‘बैसिलस सबटिलिस + स्यूडोमोनास’ वाली जैविक दवा मिट्टी में डालो। ये आम वाले बैक्टीरिया ही हैं। जड़ मजबूत होगी, फल ज्यादा लगेगा। प्रकृति ने हर पेड़ का डॉक्टर पहले से सेट कर रखा है, हमें तो बस उसको जिंदा रखना होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।