पौधों के वाष्पशील पदार्थों का कीट प्रबंधन में महत्व      Publish Date : 24/07/2026

पौधों के वाष्पशील पदार्थों का कीट प्रबंधन में महत्व

                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

कृषि में फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए कीटों का नियंत्रण करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि कीट फसलों को नुकसान पहुंचाकर उनके उत्पादन में भारी गिरावट करते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को खतरा होता है। इसलिए आज पर्यावरण -संवेदनशील, टिकाऊ और प्रभावी विकल्पों की निरंतर खोज की जा रही है। पौधों अंदर मौजूद वाष्पशील पदार्थ इस संदर्भ में एक क्रांतिकारी भूमिका निभा रहे हैं, जो पारंपरिक रासायनिक तरीकों के विपरीत एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करते हैं।

                                  

प्रस्तुत लेख में यह यह समीक्षा पौधों और कीटों के बीच जटिल संबंधों की खोज करती है, जिसमें कीटों को रोकने, आकर्षित करने और उनके व्यवहार को बाधित करने में पौधों के अन्दर मौजूद वाष्पशील पदार्थों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके साथ ही, कीटों से होने वाले नुकसान को कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बकव्हीट, और टमाटर में टमाटर फल बोरर को आकर्षित करने के लिए गेंदा या ककड़ी के पौधों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही पौधारोपण में दो या अधिक फसलों को एक साथ लगाकर भी कीट नियंत्रण किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, प्याज और गाजर को साथ लगाने से, जहाँ प्याज की गंध गाजर में लगने वाले कीटों को दूर रखती है और गाजर की खुशबू प्याज कीटों से प्याज की रक्षा करती है।

सेमीकेमिकल-आधारित ट्रैप और निगरानीः वाष्पशील पदार्थों की नकल करके बनाए गए सेमीकेमिकल ट्रैप कीटों की उपस्थिति और संख्या का पता लगाने तथा नियंत्रण के लिए बहुत उपयोगी सिद्व हो रहे हैं। जैसे कि फेरोमोन-बेटेड ट्रैप का उपयोग स्प्रूस बडवर्म की निगरानी करने के लिए किया जाता है।

                                    

मास ट्रैपिंगः इस ट्रैप का उद्देश्य ट्रैप में बड़े पैमाने पर कीटों को फंसा कर उनकी संख्या कम करना होता है।

कीटों को आकर्षित करके मारनाः कीटों को ट्रैप की ओर आकर्षित करके उन्हें मारा जा सकमा है।

मेटिंग डिसरप्शनः कीटों के प्रजनन व्यवहार को बाधित कर उनकी आबादी को नियंत्रित करने के लिए इस विधि को प्रयोग में लाया जाता है।

प्रेरित पौध रक्षा: कीटों के हमल कर देने के बाद पौधे वाष्पशील पदार्थ उत्सर्जित करते हैं जो आसपास के पौधों को अपनी रक्षा तंत्र सक्रिय करने का संकेत देते हैं। चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ:

पौधों के अन्दर मौजूद वाष्पशील पदार्थों का स्थिर उत्पादन, विशिष्टता और पर्यावरणीय कारकों पर प्रभाव आदि जैसी के जैसी चुनौतियाँ भी इस प्रक्रिया में सामने आती हैं। परंतु निरंतर शोध से इन चुनौतियों की सीमाओं को दूर कर इनका व्यापक उपयोग संभव हो सकता है। भविष्य में ये तकनीकें सतत और पर्यावरण-हितैषी कृषि की दिशा में भी अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।

निष्कर्षः पौधों के अन्दर मौजूद वाष्पशील पदार्थ कीट प्रबंधन के लिए एक प्राकृतिक, प्रभावी और टिकाऊ विकल्प हो सकेते हैं। यह कीटों को भगाने, प्राकृतिक शिकारी को आकर्षित करने और कीटों का जैविक नियंत्रण करने की प्रक्रिया में बहुत अधिक सहायक हो सकते हैं। इनके सही और वैज्ञानिक उपयोग निरंतर करने से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे कृषि अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनेगी और यह पर्यावरण के भी अनुकूल रहेंगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।