
बायोगैस स्लरी: मृदा उर्वरता सुधार और रासायनिक उर्वरकों का वैकल्पिक समाधान Publish Date : 20/07/2026
बायोगैस स्लरी: मृदा उर्वरता सुधार और रासायनिक उर्वरकों का वैकल्पिक समाधान
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
वर्तमान समय में फसल उत्पादकता में निरंतर गिरावट एक गंभीर कृषि समस्या बन चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप कृषि क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग में तीव्र वृद्धि हुई है। ये रासायनिक इनपुट न केवल मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, बल्कि मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को भी कुप्रभावित करते हैं। विशेष रूप से नाइट्रोजन युक्त रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से उत्पादन लागत में वृद्धि, किसानों को आर्थिक हानि तथा पर्यावरणीय प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। अतः मृदा स्वास्थ्य के दीर्घकालिक संरक्षण एवं सतत कृषि विकास के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों- जैसे जैविक खेती तथा वैकल्पिक जैव-उर्वरकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
पोषक तत्वों से समृद्ध इस जैव-उत्पाद के कारण चीन सहित अनेक एशियाई देशों में बायोगैस स्लरी का कृषि-आधारित उपयोग तीव्र गति से बढ़ा है, जहाँ यह पोषक-तत्व पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट से संसाधन रणनीतियों का एक महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है। भारत के परिप्रेक्ष्य में, केवल गोवंशीय गोबर से ही लगभग 76.8 मिलियन टन बायोगैस स्लरी के वार्षिक उत्पादन की क्षमता विद्यमान है। इसके अतिरिक्त, देश में प्रतिमाह लगभग 335 मिलियन टन गोबर उत्पन्न होता है, किंतु संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में लगभग 110 मिलियन टन गोबर अपशिष्ट के रूप में नष्ट हो जाता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बायोगैस स्लरी के कुशल प्रबंधन एवं कृषि-आधारित अनुप्रयोग के द्वारा न केवल अपशिष्ट न्यूनीकरण संभव है, बल्कि मृदा उर्वरता संवर्धन एवं पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्रभावी रूप से सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

बायोगैस स्लरीः निर्माण, संरचना एवं पोषक तत्व बायोगैस स्लरी जैविक पदार्थों के अवायवीय किण्वन से प्राप्त उप-उत्पाद है, जिसे डाइजेस्टेट अथवा स्लज भी कहा जाता है। बायोगैस से ऊर्जा उत्पादन के पश्चात डाइजेस्टर आउटलेट से निकलने वाला तरल पदार्थ बायोगैस स्लरी के रूप में प्राप्त होता है। बायोगैस स्लरी के निर्माण हेतु सामान्यतः फसल अवशेषों को गोबर के साथ मिक्सिंग टैंक में मिलाया जाता है, तत्पश्चात इसे किण्वन टैंक में रखा जाता है। प्रतिदिन ताजे गोबर और जल के मिश्रण से बायोडाइजेस्टर को फीड किया जाता है, जिसे 2-3 महीनों तक अवायवीय अवस्था में रखा जाता है, जिसके बाद बायोगैस स्लरी प्राप्त होती है। बायोगैस स्लरी मुख्यतः विभिन्न फसलों के अवशेषों तथा पशुओं के मल का मिश्रण होती है। इसके उत्पादन में पशु, वनस्पति एवं घरेलू अपशिष्ट- जैसे गोबर, खाद तथा बचा हुआ चारा का उपयोग किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस उत्पादन के लिए पशुधन का गोबर सबसे सामान्य सब्सट्रेट है। बायोगैस स्लरी में लगभग 93 प्रतिशत जल, 4.5 प्रतिशत शुष्क पदार्थ तथा 2.5 प्रतिशत अकार्बनिक पदार्थ पाया जाता है।
बायोगैस स्लरी, जिसे बायोगैस उत्पादन प्रक्रिया के बाद बचा द्रव्य कहा जाता है, में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम सहित कई सूक्ष्म पोषक तत्वों का समृद्ध स्रोत बचता है। नाइट्रोजन पौधों में क्लोरोफिल तथा प्रोटीन संश्लेषण का प्रमुख घटक है, जो पत्तियों एवं वायवीय भागों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण की दक्षता को बढ़ाता है, फास्फोरस जड़ तंत्र के विकास, ऊर्जा संचरण तथा कोशिकीय चयापचय प्रक्रियाओं के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि पोटैशियम एंजाइम सक्रियण, जल संतुलन, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा फलों की गुणवत्ता में सुधार कर पौधों की समग्र उत्पादकता और सहनशीलता को सुदृढ़ करता है।

पोषण पैकेज के रूप में कार्य करती है, जो मृदा स्वास्थ्य में सुधार एवं फसल उत्पादन में वृद्धि करती है। जैव-उर्वरक के रूप में इसके प्रमुख लाभों में मृदा पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि, मृदा संरचना में सुधार, जल धारण क्षमता, कैटायन विनिमय क्षमता तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों (जैसे फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया) की वृद्धि शामिल है। बायोगैस स्लरी मृदा अपरदन को कम करती है तथा मृदा की भौतिक विशेषताओं जैसे जल धारण क्षमता, वायु पारगम्यता, एग्रीगेट स्थिरता एवं पैठ प्रतिरोध में सुधार करती है। यह पौधों की वृद्धि, कुल उपज एवं उत्पादकता बढ़ती है।
सिंथेटिक उर्वरकों का विकल्प बायोगैस स्लरी रासायनिक उर्वरकों का एक टिकाऊ विकल्प है। बायोगैस स्लरी का प्रभाव सिंथेटिक उर्वरकों के समान होता है तथा इसके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की खपत में 15-20 प्रतिशत तक की कमी की जा सकती है। इसका मिश्रित उपयोग फसल उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरणीय स्वास्थ्य बनाए रखता है। निष्कर्षतः, बायोगैस स्लरी मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं सतत कृषि के लिए एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल जैव-उर्वरक है। यह स्लरी सिंथेटिक उर्वरकों तथा पारंपरिक जैविक खादों (जैसे गोबर खाद एवं कम्पोस्ट) की तुलना में अधिक मात्रा में मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करती है। बायोगैस स्लरी का उपयोग रासायनिक उर्वरकों की खपत को 15-20 प्रतिशत तक कम कर सकता है, जिससे उत्पादन की लागत घटती है और पर्यावरणीय जोखिम कम होते हैं। अतः बायोगैस स्लरी का समुचित एवं वैज्ञानिक उपयोग मृदा संरक्षण, टिकाऊ कृषि तथा किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने का उत्तम साधन साबित हो सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
