
पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक होना जरूरी है Publish Date : 14/07/2026
पर्यावरण बचाने के लिए जागरूक होना जरूरी है
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
"टायलेट : एक प्रेम कथा, फिल्मों की अभिनेत्री भूमि पेडनेकर सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर भी मुखर रही हैं। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की चुनौती बन चुका है और इससे निपटने के लिए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभानी होगी। पर्यावरण दिवस के मौके पर भूमि से बातचीत"।
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
मैं बचपन से ही पर्यावरण को लेकर सजग रही हूं। स्कूल में हमें जलवायु परिवर्तन के बारे में पढ़ाया जाता था, लेकिन उस वक्त हममें से किसी ने नहीं सोचा नहीं होगा कि यह इतनी तेजी से होगा कि हमारी पीढ़ी को इसके परिणामों को झेलना होगा। उसमें भी हम केवल इंसानों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में सोचते हैं, जानवरों, समुद्री जीवों पर होने वाले असर पर शायद ही हमारा ध्यान जाता होगा। जब मैं अभिनय के पेशे में आई, तब मुझे अहसास हुआ कि मैं ऐसे मुकाम पर हूं, जहां लोग मेरी बात सुनते हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण पर बात करने के लिए अपने मंच (इंटरनेट मीडिया) का प्रयोग करना मुझे सही लगा।
कई लोग मानते हैं कि सितारे पर्यावरण संरक्षण की बात तो करते हैं, लेकिन वह अपने जीवन में पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाने वाली चीजों को शामिल नहीं करते। इस पर आपका क्या कहना है?
कोई भी परफेक्ट नहीं होता। मेरे अनुसार, टिकाऊ जीवनशैली का मतलब हर काम पूरी तरह सही करना नहीं है, बल्कि जागरूक रहना है कि कैसे यात्रा करनी है, क्या खरीदारी करनी है या संसाधनों का उपयोग कम कैसे करना है। हम सभी सीख रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि क्या आप प्रयास कर रहे हैं?
पर्यावरण को संभालने को लेकर सबसे बड़ी चुनौती क्या है? प्रदूषण, जल संकट, कचरा प्रबंधन या कुछ और?
सिर्फ एक समस्या चुनना मुश्किल है, क्योंकि ये सभी एकदूसरे से जुड़े हैं। जैव विविधता का नुकसान और प्लास्टिक प्रदूषण मुझे सबसे ज्यादा परेशान करते हैं। जंगल कट रहे हैं, इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है। प्लास्टिक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। वनों की कटाई, प्रदूषण यह केवल पर्यावरण पर ही नहीं, बल्कि हम सब पर प्रभाव डाल रहा है।
भारत में पर्यावरण संरक्षण की राह में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग जो काम करते हैं, उसे करते वक्त उसके परिणाम के बारे में नहीं सोचते हैं। अगर एक प्लास्टिक की बोतल हमारे घर से बाहर जाती है, तो हम यह नहीं देखते कि वह आखिर कहां पहुंचती है। एक रिपोर्ट में मैंने पढ़ा कि हमारे जलाशयों में बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं, लेकिन हम यह जानने की कोशिश नहीं करते कि ऐसा क्यों हो रहा है। महासागरों और वन्यजीवों पर हमारी वजह से पड़ रहे प्रभावों को हम प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाते हैं।
क्या विजुअल इफेक्ट्स और एआई की मदद से फिल्मों में बड़े-बड़े सेट और संसाधनों की जरूरत कम करके पर्यावरण संरक्षण को मजबूती दी जा सकती है।
तकनीक मदद कर सकती है, लेकिन हर चीज को तकनीक से बदल देना भी सही नहीं होगा। कला के पेशे में मानवीय स्पर्श भी बहुत महत्वपूर्ण है। यहां संतुलन बनाने और जहां संभव हो लोगों को जागरूक फैसले करने की जरूरत है।
रोजमर्रा की जिंदगी में आप किन बातों का ख्याल रखती हैं, जिससे प्रदूषण न हो?
कई सारी बातों का ख्याल रखती हूं, जैसे सूखे और गीले कचरे को अलग रखना, जहां तक संभव हो, एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से बचना। दोबारा प्रयोग किए जा सकें, ऐसे विकल्पों का चुनाव करना, फिर चाहे कपड़े, घरेलू सामान हों या रोजमर्रा की खरीदारी।
पर्यावरण पर आधारित कौन सी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री ने आपको प्रभावित किया है?
सबसे प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री 'एन इनकंविनिएंट ट्रुथ' थी। इसने दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को चर्चा का विषय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। 'सीसपायरेसी' जैसी डॉक्यूमेंट्री भी आंखें खोलने वाली रही है। वो हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम अपने समुद्र की पारिस्थितिकी पर क्या प्रभाव डाल रहे हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
