उचित फसल चक्र को अपनाने के लाभ एवं उसके सिद्वांत      Publish Date : 09/07/2026

उचित फसल चक्र को अपनाने के लाभ एवं उसके सिद्वांत

                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

  • फसल चक्र (Crop Rotation) के मूल सिद्धांत, जो कि हर किसान भाई को जरूर अपनाने चाहिए।

1. एक खेत से बार-बार एक ही फसल को नहीं लेनी चाहिएः

किसी खेत में कई वर्षों तक लगातार एक ही फसल लगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, कीट एवं रोगों का प्रकोप काफी हद तक बढ़ जाता है।

2. फसल चक्र में दलहनी फसल को शामिल करें:

किसान भाई अपने फसल चक्र में चना, अरहर, मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलों को आवश्यक रूप से शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे खेत की उर्वर क्षमता काफी हद तक बढ़ जाती है।

3. अलग-अलग कुल (Famly) की फसलों को उगाएँ:

एक ही परिवार की फसलें लगातार लेने के स्थान पर अलग परिवार की फसलें लेनी चाहिए, जिससे कि रोग और कीटों की वृद्वि चक्र टूट जाता है।

4. अधिक एवं कम पोषक तत्व लेने वाली फसलों के क्रम को बनाए रखें:

धान, गेहूं जैसी अधिक पोषक तत्व लेने वाली फसलों के बाद दलहन या कम पोषक तत्व ग्रहण करने वाली फसलें लेंगे तो मिट्टी की उर्वर क्षमता बनी रहती है।

5. स्थानीय जलवायु और बाजार के अनुसार फसल चुनाव करना चाहिए

फसल चक्र को अपनाते समय खेत मिट्टी के प्रकार, पानी की उपलब्धता, मौसम और बाजार की मांग का ध्यान में रखें ताकि आपका फसलीय उत्पादन और लाभ दोनों अच्छी वृद्वि हो सके।

फसल चक्र अपनाने से प्राप्त होने वाले लाभः

1. उचित फसल चक्र के अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।

2. उचित फसल चक्र के अपनाने से कीट एवं रोगों का प्रकोप भी कम होता है।

3. इसके अलावा उचित फसल चक्र से खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिलती है।

4. सही फसल चक्र अपनाने से उर्वरकों की आवश्यकता भी काफी कम हो जाती है।

5. उचित फसल चक्र के अपनाने से कुल मिलाकर फसल की उपज और किसान की आय में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।