
वन महोत्सव सप्ताह – 2026: वृक्ष लगाएं और पर्यावरण बचाएं Publish Date : 04/07/2026
वन महोत्सव सप्ताह – 2026: वृक्ष लगाएं और पर्यावरण बचाएं
प्रो0 आर. एस. सेंगर
वनों और वातारण की गोद में मानव और अन्य जीव जन्तुओं का जीवन सदा से ही फलता-फूलता आया है। वन एवं वृक्ष हमारे पर्यावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड गैस को सोखकर वातावरण को स्वच्छ एवं संतुलित बनाने में अपना महत्पूर्ण योगदान प्रदान करते हैं। इसलिए अधिक से अधिक संख्या में पौधारोपण करना अत्यंत आवश्यक है। यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। हमारे प्रदेश में इस वर्षाकाल के दौरान ‘वृक्षारोपण महोत्सव’ के अन्तर्गत समस्त प्रदेशवासियों के सहयोग एवं सहभागिता से 35 करोड़ पौधा का रोपण किया जा रहा है।

वन महोत्सव के मनाने का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की जनता में प्रकृति के प्रति जागरूकता और प्रेम को विकसित करना है। वन महोत्सव प्रत्येक वर्ष 01 जुलाई से 07 जुलाई तक औपचारिक शुभारम्भ करने के पश्चात् पूरे वर्षाकाल में चलने वाले एक कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है। जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में मानसून के आगन के साथ ही चारों ओर वर्षा होने लगती है और मिट्टी में नमीं आ जाती है। इसके चलते ही वर्षाकाल पौधारोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है।
‘‘मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है कि वृक्षारोपण को एक जनअभियान बनाने के लिए दिनांक 01 से 07 जुलाई, 2026 तक वन महोत्सव के पावन अवसर पर सम्पूर्ण प्रदेश में सघन पौधरोपण अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
हमारे दूरदर्शी मनीषियों ने पर्यावरण के संरक्षण में वनों एवं वृक्षों के महत्व, भूमिका और आवश्यकता के दृष्टिगत वनों एवं वृक्षों को देव तुल्य मानते हुए समस्त प्राकृतिक संसाधनों को समेकित रूप से परम्परा, संस्कृति को धार्मिक कार्यों का एक अभिन्न अंग माना है। वट सावित्री व्रत पर बरगद और आँवला नवमी के अवसर पर आँवल के वृक्षों की पूजा की जाती है। हमारे धार्मिक कार्यों में आम, केला, अशोक, बेल और कुश आदि वनस्पतियों के अंगों के प्रयोग ने वृक्षों के संरक्षण करते हुए इन्हें जन मानस से जोड़ने का कार्य भी किया गया है। परिणाम स्वरूप जनसंख्या का दबाव अधिक होने के बाद भी आज हमारा देश प्राकृतिक संपदा के क्षेत्र में समृद्व एवं सम्पन्न है।
सरकार विकास एवं प्राक्रतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ही हरीतिमा संवर्धन तथा वृक्षारोपण एवं वानिकी गतिविधियों के माध्यम से रोजगार एवं आजीविका के सृजन की दिशा में तीव्र गति से कार्य कर रहा है। विगत 9 वर्षों के दौरान 247 करोउ़ से अधिक पौधों का रोपण, प्राकृतवास में सुधार, वनाच्छादित क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्वि, माँ की स्मृति व सम्मान में प्रदेश के अन्दर सर्वाधिक पौधों का रोपण, विगत वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय महत्व वाले 13 वेटलैंड्स को रामसर साइट के रूप में विशिष्ट पहचान प्रदान की गई है। मुझे प्रसन्नता है कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक दिन में पाँच करोड़ पौधों का रोपण कर प्रदेश में ‘वृक्षारोपण महायज्ञ’ का शुभारम्भ हो चुका है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि ‘वन महोत्सव’ के अवसर पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों में वृक्षों के प्रति स्नेह, सद्भावना एवं संवेदना को उत्पन्न कर ‘वृक्षारोपण महायज्ञ’ के अन्तर्गत 35 करोड़ पौधों का रोपण के लक्ष्य को प्राप्त करने में आवश्यक रूप से सहायक सिद्व होंगे।
- योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश।
वन महोत्सव के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों से मेरी अपील है कि वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के सुखद भविष्य एवं धरती के हरित आवरण में वृद्वि हेतु अधिक से अधिक पौधारोपण करें।
आइए, हम सभी मिलकर ‘एक पेड़ माँ के नाम’; हरित उत्तर प्रदेश-समृद्व उत्तर प्रदेश’ तथा ‘वृक्ष है तो भविष्य है’ के संकल्प को साकार रूप प्रदान करें और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण का निर्माण करें। वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की सफलता हेतु मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
-अरूण कुमार सक्सेना
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वन एवं पर्यावरण,
जन्तु उद्यान एवंज लवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश।
‘‘वन महोत्सव-2026 के अवसर पर वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवंज लवायु परिवर्तन विभाग, उत्त्र प्रदेश सरकार के द्वारा पूरे प्रदेश में व्यापक पौधरोपण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
जब-जब मानव ने प्रकृति के साथ अपना सामंजस्य स्थापित किया है, तब-तब समृद्वि, शांति और विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। इसके ठीक विपरीत जब भी हमारे प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुध दोहन किया गया है, तब पर्यावरणीय असंतुलन, जल-संकट, जैव विधिता हा ह्रास एवं जलवायु परिवर्तन के जैसी गम्भीर चुनौतियों का समाना मानव समाज को करना पड़ा है। आज की परिस्थितियों में सम्पूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के जैसी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के वन न केवल लाखों वन्य जीवों और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, बल्कि जल-संरक्षण, मृदा-संरक्षण, स्वच्छ वायु तथा जैव-विधिता के संवर्धन में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदेश को हरितिमा से पूर्ण एवं समृद्व बनाने, प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा भावी पीढ़ियों को एक सुरक्षित पर्यावरण प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम व्यापक पौधारोपण है। वृक्ष केवल एक पर्यावरण संरक्षण का साधन मात्र ही नहीं है, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य, आजीविका और आर्थिक समृद्वि का आधार भी हैं। इसी उददेश्य के साथ उत्तर प्रदे/ा सरकार के द्वारा दीर्घ स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
मैं प्रदेशवासियों, विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों, स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य सामाजिक संगठनों से आह्नान करता हूँ वह इस जन-अभियान में अपनी सक्रिय सहभागिता प्रदान करें। प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा आवश्यक रूप से लगाए और साथ ही उसे संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प भी ले। केवल पौधरापण ही नहीं, अपितु उन पौधो के वृक्ष बनने तक उनकी उचित देखभाल करना भी हमस ब की सामूहिक जिम्मेदारी है।’’
वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित समस्त कार्यक्रमों की सफलता हेतु मेरी हार्दिक शुभकामनाए।
- के. पी. मलिक
राज्य मंत्री, वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान
एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
