
आरक्षण के जैसी महामारी को समूल समाप्त करने के लिए रामबाण उपाय Publish Date : 03/07/2026
आरक्षण के जैसी महामारी को समूल समाप्त करने के लिए रामबाण उपाय
प्रो0 आर. एस. सेंगर
कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा पात्रताओं के परीक्षण एवं तद्नुसार पदनियोजन की व्यवस्था की जाए- न्यायधर्मसभा
उच्चतम न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर सवाल उठाएं हैं। देश की शीर्ष अदालत ने केन्द्र सरकार से पूछा है कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए आजादी के 7 दशकों में भी कोई कानून क्यों नहीं बना सका? इस प्रक्रिया का अंतिम और न्यायसंगत समाधान न्यायर्धसभा के पास उपलब्ध है। न्यायर्धसभा के संस्थापक एवं 111 प्रस्तावों के प्रतिपादक श्री अरविन्द अंकुर जी का इस सम्बन्ध में कहना है कि आरक्षण के जैसी महामारी को देश में से समूल समाप्त किया जा सकता है। इस पृथ्वी पर केवल चार क्षमताओं से युक्त मनुष्य होते हैं और जीवन यापन के लिए सभी प्रकार के मनुष्यों को रोजगार की आवश्यकता होती है।

इस क्रम में प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की महत्ती जिम्मेदारी होती है और लोगों को रोजगार उनकी क्षमताओं के अनुसार ही दिया जाना चाहिए। इस परिप्रेक्ष्य में पात्रता के अनुसार पद नियुक्ति और जनाधिकार का प्रस्ताव भी केन्द्र सरकार को सौंपा जा चुका है। पूरे विश्व में रहने वाले मानवों का वर्गीकरण इस प्रकार से किया जा सकता है-
PQ- शरीर से बलवान, सुपुष्ट, सुदृढ़ लोगः इसका अर्थ है कि ऐसे लोग खेती, उद्यान, पशु-पालन के साथ ही कृषि के क्षेत्र में काम करने के योग्य अर्थात कृषिकर्मी होते हैं।
IQ- बेहतर मानसिक क्षमता वाले विचारशील, वाकपटु तार्किक लोगः इसका अर्थ यह है कि इस केटेगरी के लोग व्यापार, उद्योग, व्यवसाय आदि के साथ ही वाणिज्यिक क्षेत्र में कार्य करने (वाणिज्य कर्मी) के योग्य होते हैं।
EQ- भावनात्मक क्षमता से युक्त संवेदनशील, व्रतशील और प्रेमपूर्ण लोगः इस केटेगरी के लोग लोकरक्षक, लोकपालक और लोकसेवक इत्यादि राजकीय क्षेत्र में कार्य करने के योग्य होते हैं अर्थात जैसे कि राज्यकर्मी।
SQ- आत्मिक क्षमता से युक्त लोग- इस केटेगरी के लोग विवेकशील, समदर्शी, निष्पक्ष, न्याय प्रिया होते हैं। जैसे विधायन, मंत्रित्व, न्यायिक इत्यादि के क्षेत्र में कार्य करने के योग्य अथवा इन्हें नेतृत्वकर्ता भी कहा जा सकता है।
अब आवश्यकता है कि देश के कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा उपरोक्त वर्णित चारों पात्रताओं के अन्तर्गत अपरीक्षण करने के उपरान्त लोगों की क्षमता के अनुसार ही पदों का नियोजन किया जाना चाहिए। कर्म-पद-संपदा पर स्वामित्व के निर्धारण करने का यह एक सत्यात्मक और न्यायशील आधार होगा।
मानव के अन्दर विकसित हो सकने वाली इन्हीं चार क्षमताओं के माध्यम से ही समाज में क्रमशः चार प्रकार के मानवीय कर्म सम्पादित किए जा सकते हैं यथा कृषि, वाणिज्य, राज्य और नेतृत्व आदि।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन शर्मा ने अवगत करया कि न्यायर्धसभा के द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकारों भेजा गया पात्रता के अनुसार पदनियुक्ति का यह अद्भुत न्यायिक प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव के लागू होते ही जतिवाद, वंशवाद, रंगभेद, लिंगभेद, क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद, नस्लवाद, पूंजीवाद और राष्ट्रवाद के जैसे भयंकर द्वंद्वात्मक संघर्षकारी कुरोग जलद ही समाप्त हो जाएंगे।
इसके बाद किसी भी व्यक्ति को बंदूक, बम, तोप और तलवार आदि हथियारों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके बाद किसी हड़ताल, क्रॉन्ति, जिहाद, युद्व और विनाश आदि की भी आवश्यकता नहीं होगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
