
पीएसबी कल्चर से पाएं बंपर उपज Publish Date : 02/07/2026
पीएसबी कल्चर से पाएं बंपर उपज
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
पौधों की जड़ों के विकास व बेहतर उपज के लिए फॉस्फोरस जरूरी है। डीएपी या सिंगल सुपर फॉस्फेट से मिला अधिकतर फॉस्फोरस मिट्टी में लॉक हो जाने के कारण पौधों तक नहीं पहुंच पाता। पीएसबी कल्चर इसे घुलनशील बनाकर पौधों को उपलब्ध कराता है।
फॉस्फोरस पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह जड़ों के विकास, पौधों की मजबूती, फूल एवं फल बनने, बीज निर्माण और फसल के समय पर पकने में बड़ी भूमिका निभाता है। मिट्टी में फॉस्फोरस उपलब्ध होने के बावजूद इसका अधिकांश हिस्सा अघुलनशील रहता है। इसी कारण पौधे उपलब्ध फॉस्फोरस का मात्र 0.1 फीसदी हिस्सा ही उपयोग कर पाते हैं। कृषि वैज्ञानिक प्रो0 आर. एस. सेंगर बताते हैं, किसानों द्वारा खेतों में डाले जाने वाले डीएपी और अन्य फॉस्फेट उर्वरकों का 10-25% हिस्सा ही फसलें ग्रहण कर पाती हैं, जबकि 75-90% फॉस्फोरस मिट्टी में कैल्शियम, आयरन और एल्युमिनियम जैसे तत्वों के साथ मिलकर स्थिर हो जाता है। फॉस्फेट सोलबिलाइजिंग बैक्टीरिया (पीएसबी) इसे घुलनशील बनाकर पौधों को उपलब्ध कराता है।
लाभकारी सूक्ष्मजीवों से पाएं समाधान

पीएसबी में बैसिलस मेगाटेरियम, स्यूडोमोनास स्ट्रायटा, बैसिलस पॉलीमिक्सा और एस्परजिलस अवामोरी जैसे लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं। ये साइट्रिक, ग्लूकोनिक, ऑक्सैलिक और लैक्टिक जैसे जैविक अम्ल बनाकर अघुलनशील फॉस्फेट को घुलनशील बनाते हैं। इससे पौधों को फॉस्फोरस आसानी से मिलता है, जड़ों का विकास बेहतर होता है और फसल की उपज व गुणवत्ता में सुधार होता है।
सभी फसलों के लिए उपयोगी
पीएसबी कल्चर लगभग सभी प्रमुख फसलों में लाभकारी है। इसका उपयोग गेहूं, धान, मक्का, बाजरा जैसी अनाज फसलों और चना, अरहर, मूंग व उड़द जैसी दलहनी फसलों में किया जा सकता है। सरसों, तिल व सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों; आलू, प्याज, टमाटर व मिर्च जैसी सब्जियों सहित बागवानी फसलों में भी यह फॉस्फोरस की उपलब्धता बढ़ाता है।
बीज, भूमि और जड़ों का ऐसे करें उपचार
पीएसबी का उपयोग बीज, भूमि और जड़ों के उपचार के रूप में कर सकते हैं। बुआई से पहले प्रति किग्रा बीज पर 20-25 ग्राम पीएसबी कल्चर या 10-20 मिलीलीटर तरल पीएसबी का प्रयोग करें। भूमि उपचार के लिए 4-5 किग्रा पीएसबी को सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट में मिलाकर खेत में डालें। धान, सब्जियों और अन्य रोपाई वाली फसलों में जड़ों को पीएसबी घोल में 20-30 मिनट तक डुबोकर रोपाई करें।
रासायनिक फफूंदनाशी के साथ सीधे न मिलाएं

पीएसबी कल्चर कृषि विभाग और बीज भंडारों पर आसानी से उपलब्ध है। खरीदते समय एक्सपायरी डेट देख लें। इसे छांव में रखें और रासायनिक फफूंदनाशी के साथ सीधे न मिलाएं। फफूंदनाशी के प्रयोग के 24 घंटे बाद उपयोग करें। अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय मिट्टी, सूखी भूमि, रासायनिक कीटनाशकों का अधिक प्रयोग तथा मिट्टी में जैविक पदार्थों की कमी इसकी प्रभावशीलता को कम कर सकती है।
अच्छी गुणवत्ता के पीएसबी की पहचान
अच्छी गुणवत्ता के पीएसबी में प्रति ग्राम 1 से 10 करोड़ जीवित लाभकारी बैक्टीरिया होने चाहिए। इसका पीएच मान 6.5 से 7.5, शेल्फ लाइफ 6 से 12 माह तथा अशुद्धियां बहुत कम होनी चाहिए। यह पर्यावरण-अनुकूल जैव उर्वरक है, जो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है। इसके उपयोग से मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
