
डंग बीटल या गुबरैला Publish Date : 19/06/2026
डंग बीटल या गुबरैला
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
डंग बीटल, (जिन्हें हिंदी में गोबर भृंग या गुबरैला कहा जाता है) जो प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण सफाई कर्मियों में से एक हैं। ये छोटे कीट पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
मुख्य जानकारी और विशेषताएं

(1) आहार: ये मुख्य रूप से शाकाहारी और सर्वाहारी जानवरों के गोबर (मल) पर निर्भर रहते हैं।
(2) अद्भुत ताकत: ये अपने वजन से 1,141 गुना अधिक वजन खींच सकते हैं। यह एक इंसान द्वारा छह डबल डेकर बसों को खींचने के बराबर है।
(3) नेविगेशन: कुछ प्रजातियां रात में आकाशगंगा (Milky Way) का उपयोग करके दिशा तय करती हैं।
(4) आवास: ये अंटार्कटिका को छोड़कर दुनिया के हर महाद्वीप पर पाए जाते हैं।
काम करने के तरीके (तीन प्रमुख समूह):
वैज्ञानिकों ने इनके काम करने के तरीके के आधार पर इन्हें तीन समूहों में बांटा है:
(1) रोलर्स (Rollers): ये गोबर का गोला बनाते हैं और उसे लुढ़काकर दूर ले जाते हैं ताकि वहां अंडे दे सकें।
(2) टनलर्स (Tunnelers): ये सीधे गोबर के ढेर के नीचे सुरंग खोदते हैं और गोबर को वहीं जमीन के नीचे दफन कर देते हैं।
(3) ड्वेलर्स (Dwellers): ये गोबर के ढेर के अंदर ही रहते हैं और वहीं अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र में महत्व
(1) मिट्टी की उर्वरता: गोबर को जमीन के नीचे दफनाने से मिट्टी को प्राकृतिक खाद मिलती है।
(2) बीज प्रसार: ये गोबर के साथ बीजों को भी इधर-उधर ले जाते हैं, जिससे नए पौधे उगते हैं।
(3) बीमारी नियंत्रण: गोबर को जल्दी साफ करके ये मक्खियों और परजीवियों के पनपने को रोकते हैं।
संरक्षण और खतरे

आधुनिक खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और पशुओं को दी जाने वाली कृमिनाशक दवाएं (जैसे आइवरमेक्टिन) इनके लिए घातक साबित हो रही हैं। गोबर में मौजूद रसायनों के कारण इनकी प्रजनन क्षमता और जीवन पर बुरा असर पड़ता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
