
ईंधन ही रोकेगा परमाणु कचरे को Publish Date : 15/06/2026
ईंधन ही रोकेगा परमाणु कचरे को
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय
वैज्ञानिकों ने ऐसा परमाणु ईंधन विकसित किया है, जो यूरेनियम नाइट्राइड के नैनोकणों की मदद से खतरनाक बायप्रोडक्ट को अपने अंदर ही समाकर परमाणु कचरे को फैलने से रोक सकता है। परमाणु ऊर्जा की गिनती पृथ्वी पर उपलब्ध सबसे स्वच्छ और प्रभावी ऊर्जा स्रोतों में होती है। यह कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य के बराबर करती है, सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में कम भूमि घेरती है और जीवाश्म ईंधनों की अपेक्षा कहीं कम प्रदूषण फैलाती है। इसके बावजूद, परमाणु ऊर्जा के व्यापक उपयोग में सबसे बड़ी चुनौती इसका ईंधन और उससे उत्पन्न रेडियोधर्मी कचरा है, जो लंबे समय तक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम बना रहता है।
इसी चुनौती के समाधान की दिशा में एक नया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन सामने आया है, जो अगली पीढ़ी के परमाणु रिएक्टरों के लिए अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले ईंधन का आधार बन सकता है। इस शोध में मिसिसिपी विश्वविद्यालय के मैकेनिकल, इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक पहल की है। उनका लक्ष्य परमाणु रिएक्टरों को लंबे समय तक उपयोग के लिए अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाना है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि यदि धात्विक परमाणु ईंधन में यूरेनियम नाइट्राइड के सूक्ष्म नैनोकण मिलाए जाएं, तो यह ईंधन रिएक्टर के भीतर मौजूद अत्यधिक विकिरण, तापमान और कठोर परिस्थितियों को कहीं बेहतर ढंग से सहन कर सकता है।
वर्तमान में उपयोग किए जा रहे धात्विक ईंधनों की एक बड़ी समस्या यह है कि विकिरण के प्रभाव से वे फूलने लगते हैं। इसके कारण ईंधनरॉड, उसके चारों ओर मौजूद क्लैडिंग से टकराने लगती है। दरअसल क्लैडिंग एक सुरक्षात्मक आवरण होती है, जिसका काम रेडियोधर्मी ईंधन. और उससे निकलने वाले खतरनाक उप-उत्पादों को रिएक्टर के भीतर सुरक्षित रखना है। समय के साथ फिशन से उत्पन्ने गैसें और कण क्लैडिंग को कमजोर और भंगुर बना देते हैं, जिससे रिएक्टर की कार्यक्षमता और आयु दोनों प्रभावित होती हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस शोध का मूल विचार फिशन से बनने वाले हानिकारक उत्पादों को क्लैडिंग तक पहुंचने से पहले ही ईंधन के भीतर रोक देना है। यूरेनियम नाइट्राइड के नैनोकण ठीक यही काम करते हैं- वे फिशन गैसों और अन्य उप-उत्पादों को अपने भीतर कैद कर लेते हैं। इससे ईंधन की विफलता की संभावना कम होती है और रिएक्टर अधिक सुरक्षित तरीके से लंबे समय तक काम कर सकता है। वैश्विक स्तर पर देखा जाएतो दुनिया भर में हर साल हजारों, टन परमाणु ईंधन पैदा होता है, जिसे दशकों और सदियों तक सुरक्षित भंडारण की जरूरत होती है। यही रेडियोधर्मी कचरा परमाणु ऊर्जा के विस्तार में सबसे बड़ी - बाधाओं में से एक है।

यूनिवर्सिटी ऑफ इडाहो के परमाणु इंजीनियरिंग और औद्योगिक प्रबंधन विभाग के वैज्ञानिक का मानना है कि यदि परमाणु ईंधन को अधिक टिकाऊ और कुशल बनाया जाए, तो न केवल अधिक ऊर्जा निकाली. जा सकेगी, बल्कि खर्च हो चुके ईंधन के जमा होने की गति भी धीमी होगी। इससे वैश्विक परमाणु कचरे का दबाव कम हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है, यह शोध सुरक्षित, टिकाऊ और अधिक स्वीकार्य परमाणु ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में दुनिया भर में पैदा होने वाले परमाणु कचरे की समस्या को कम कर सकता है। यह शोध एडवांस्ड मेटेरियल्स इंटरफेसेस जर्नल में छपा है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
