खेत बचाओ अभियान      Publish Date : 10/06/2026

                खेत बचाओ अभियान

                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

वैज्ञानिक खेती की ओर एक मजबूत कदम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ जीवन ICAR का संकल्प – भारतीय कृषि को रासायनिक निर्भरता से निकालकर सतत, लाभकारी और जलवायु-सहिष्णु बनाना।

मुख्य लाभ:

  • मिट्टी की सेहत बेहतर
  • लागत में कमी, आय में वृद्धि
  • पर्यावरण संरक्षण
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता

अभियान के 5 मुख्य स्तंभ

                             

1. मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड और डेटा आधारित खेती

  • मिट्टी परीक्षण से पता चलता है:
  • pH (अम्लीयता/क्षारीयता)
  • कार्बनिक कार्बन
  • नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश
  • जिंक, बोरॉन, आयरन आदि
  • लवणीयता और क्षारीयता

संदेश:इसी आधार पर दें खेत को उचित पोषण, सही मात्रा में।

2. INM और Precision Farming

  • ड्रोन आधारित स्प्रे
  • सेंसर आधारित सिंचाई
  • GIS मैपिंग
  • वेरिएबल रेट फर्टिलाइजेशन

संदेश: संसाधनों का सही उपयोग, लागत कम - उत्पादन अधिक।

3. जैविक और प्राकृतिक तत्वों का वैज्ञानिक उपयोग

  • वर्मी-कम्पोस्ट
  • ग्रीन मैन्योर
  • एज़ोटोबैक्टर
  • राइजोबियम
  • PSB (फॉस्फेट सॉल्व्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया)

संदेश: मिट्टी में सूक्ष्मजीव गतिविधि बढ़े, पोषक तत्वों की उपलब्धता सुधरे।

4. जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में भूमिका

  • नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन घटता है
  • मिट्टी में कार्बन संग्रहण बढ़ता है
  • सूखा, बाढ़, गर्मी जैसी स्थितियों में सहनशीलता बढ़ती है

संदेश: Climate-Smart Agriculture की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

5. किसानों की आय पर सकारात्मक प्रभाव

  • उर्वरक लागत में कमी
  • उपज की गुणवत्ता में सुधार
  • बाजार मूल्य में वृद्धि
  • मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बरकरार

संदेश: मिट्टी बचाओ – आय बढ़ाओ, सतत विकास पाओ।

मिट्टी परीक्षण की पूरी प्रक्रिया

  • नमूना संग्रह:खेत के 8-10 स्थानों से 0-15 सेमी गहराई तक मिट्टी लें।
  • नमूना तैयार करना: मिट्टी को छांव में सुखाकर, कंकड़ आदि निकालें और बारीक करें।
  • प्रयोगशाला में जांच: pH, EC, OC, NPK, सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच की जाती है।
  • रिपोर्ट और सिफारिश: मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड में पोषक तत्वों की स्थिति और उर्वरक की सिफारिश दी जाती है।

NPK अनुपात कैसे समझें?

  • NPK = नाइट्रोजन (N) : फॉस्फोरस (P) : पोटाश (K)
  • N (नाइट्रोजन): पौधों की पत्तियों की वृद्धि, हरा रंग, प्रोटीन निर्माण में सहायक।
  • P (फॉस्फोरस): जड़ों की वृद्धि, फूल, फल और बीज बनने में महत्वपूर्ण।
  • K (पोटाश): पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, जल संतुलन, दाना भराव और गुणवत्ता बढ़ाता है।
  • संतुलित NPK = बेहतर वृद्धि + अधिक उपज + अच्छी गुणवत्ता

जैव-उर्वरकों का व्यावहारिक उपयोग

  • एज़ोटोबैक्टर: गैर दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (2-2.5 किग्रा/एकड़)
  • राइजोबियम: दलहनी फसलों की जड़ों में नोड्यूल बनाकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण (बीजोपचार करें)
  • PSB (फॉस्फेट सॉल्व्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया): फॉस्फोरस को घुलनशील बनाकर पौधों के लिए उपलब्ध कराता है (2-2.5 किग्रा/एकड़)
  • पोटाश मोबिलाइज़र: मिट्टी में बंधे पोटाश को उपलब्ध कराता है (2-2.5 किग्रा/एकड़)
  • उपयोग विधि: बीजोपचार, मिट्टी में मिश्रण या ड्रेंचिंग के रूप में प्रयोग करें।

वर्मी कम्पोस्ट बनाने की वैज्ञानिक विधि

  • आकार: 10ft x 4ft x 3ft का बेड बनाएं।
  • सामग्री: गोबर, फसल अवशेष, पत्ती, रसोई कचरा।
  • परत दर परत सामग्री भरें।
  • नमी: 60-70% रखें।
  • केचुए डालें: (Eiseniafetida - 1 किग्रा प्रति 100 किग्रा गोबर)।
  • 45-60 दिन में तैयार।
  • छांव में रखें और नमी बनाए रखें।
  • फायदे: मिट्टी की उर्वरता बढ़े, जल धारण क्षमता बढ़े, पौधों की वृद्धि बेहतर हो।

      फसलों के लिए संतुलित पोषण योजना (उदाहरण)

फसल

N (किग्रा/एकड़)

P2​O5​ (किग्रा/एकड़)

K2​O (किग्रा/एकड़)

जैविक खाद

जैव-उर्वरक

धान (धान/चाहत/कोमल)

40

20

20

FYM 2-3 टन/एकड़

एज़ोटोबैक्टर, PSB

गेहूं

50

25

25

FYM 2-3 टन/एकड़

एज़ोटोबैक्टर, PSB

गन्ना

75

40

40

प्रेसमड/कम्पोस्ट 5-10 टन/एकड़

एज़ोटोबैक्टर, PSB

मूंग/चना (दलहन)

20

40

20

FYM 2 टन/एकड़

राइजोबियम, PSB

नोट: यह सामान्य सिफारिश है, वास्तविक मात्रा मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार तय करें।

स्वस्थ मिट्टी से ही स्वस्थ फसल, स्वस्थ फसल से ही समृद्ध किसान, समृद्ध किसान से ही समृद्ध भारत!

         आओ मिलकर प्रण लें – खेत बचाएँ, भविष्य बचाएँ!

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।