भारत का पहला शैवाल वृक्ष      Publish Date : 06/06/2026

            भारत का पहला शैवाल वृक्ष

                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

भोपाल में भारत का पहला शैवाल वृक्ष (Algae Tree) लगाया गया, जो माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) और सौर-ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ता है, इसकी एक यूनिट 20-25 पेड़ों जितना ऑक्सीजन पैदा करती है।

एल्गी ट्री (Algae Tree) एक अत्यधिक उन्नत और फ्यूचरिस्टिक अर्बन फोटोबायोरिएक्टर (Photobioreactor) मशीन है। यह कृत्रिम पेड़ की तरह काम करता है, जो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखता है और प्रकाश संश्लेषण के जरिए ऑक्सीजन छोड़ता है। भारत का पहला एल्गी ट्री मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के स्वामी विवेकानंद पार्क में लगाया गया है।

एल्गी ट्री और फोटोबायोरिएक्टर की कार्यप्रणाली:

                             

यह तकनीक निम्न प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है:

(1) संरचना: फोटोबायोरिएक्टर (PBR), एक पारदर्शी कांच या प्लास्टिक का टैंक, जिसमें पानी, पोषक तत्व और माइक्रोएल्गी/स्पीरुलीना (सूक्ष्म शैवाल या काई) भरे होते हैं।

(2) हवा का शुद्धीकरण: यह प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करता है। दूषित हवा पानी के अंदर जाती है, जहाँ शैवाल कार्बन डाई आक्साइड को अवशोषित करके ताज़ा ऑक्सीजन बाहर छोड़ते हैं।

(3) कृत्रिम वातावरण: यह एक नियंत्रित वातावरण प्रदान करता है जहां शैवाल बहुत तेजी से बढ़ते हैं और प्राकृतिक पौधों के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से कार्बन सोखते हैं।

(4) दक्षता: एक छोटा सा एल्गी ट्री लगभग 25 बड़े पेड़ों या 200 वर्ग मीटर घास के मैदान के बराबर कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता रखता है।

यह कैसे काम करता है? (Work Mechanism):

(1) हवा को सोखना: मशीन के अंदर लगे वैक्यूम पंप आसपास की प्रदूषित हवा को टैंक के अंदर खींचते हैं।

(2) प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): टैंक में मौजूद माइक्रोएल्गी सूर्य के प्रकाश और पानी का उपयोग करके हवा से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करती है।

(3) ऑक्सीजन छोड़ना: प्रकाश संश्लेषण की प्राकृतिक प्रक्रिया के बाद यह मशीन शुद्ध ऑक्सीजन बाहर वातावरण में छोड़ती है।

(4) धूल के कणों को कैद करना: यह हवा में मौजूद खतरनाक प्रदूषक कणों जैसे PM-2.5 और PM-10 को भी फिल्टर करके अपने अंदर रोक लेती है।

एल्गी ट्री के प्रमुख फायदे (Benefits of Algae Tree):

                               

(1) 25 पेड़ों की क्षमता: एक छोटा एल्गी ट्री अकेले लगभग 20 से 25 बड़े और परिपक्व पेड़ों के बराबर कार्बन सोखने और ऑक्सीजन देने की क्षमता रखता है।

(2) सालाना प्रभाव: यह मशीन हर साल वातावरण से लगभग 1.5 टन कार्बन डाइआक्साइड सोख सकती है और करीब 1 टन शुद्ध ऑक्सीजन पैदा करती है।

(3) कम जगह की आवश्यकता: घनी आबादी वाले शहरी इलाकों, बस स्टॉप, या ट्रैफिक सिग्नलों पर जहां असली पेड़ लगाने की जगह नहीं होती, वहां इसे आसानी से लगाया जा सकता है।

(4) प्रदूषण में कमी: यह अपने आसपास के 15 मीटर के दायरे में वायु प्रदूषण को लगभग 45% से 55% तक कम कर सकता है।

शहरी क्षेत्रों में उपयोग:

घनी आबादी वाले शहरों में जहाँ असली पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती, वहाँ यह तकनीक बहुत कारगर है। इसे बस स्टॉप, फुटपाथ या सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से स्थापित किया जा सकता है। यह सौर ऊर्जा (Solar-powered) से संचालित होता है।

भारत में पहली शुरुआत

भारत का पहला 'एल्गी ट्री' मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में स्वामी विवेकानंद पार्क में स्थापित किया गया है। यह देश का पहला स्मार्ट इको-फ्रेंडली समाधान है जो गंभीर वायु प्रदूषण से लड़ने में मदद कर रहा है।

Algae Tree Machine: देश का पहला लिक्विड पेड़, जिसमें ना टहनियां हैं ना पत्ते और फिर भी 25 पेड़ों जितनी साफ हवा मिलती है।

नोट: विशेषज्ञों का मानना है कि एल्गी ट्री कभी भी प्राकृतिक जंगलों का विकल्प नहीं हो सकता, लेकिन शहरों के उन कंक्रीट वाले हिस्सों के लिए यह एक बेहतरीन शॉर्ट-टर्म समाधान है जहाँ असली पेड़ लगाना नामुमकिन है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।