
क्या है मृदा की विषाक्तता Publish Date : 01/06/2026
क्या है मृदा की विषाक्तता
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
खेत की मिट्टी में छिपी कुछ समस्याएं, जो कि फसलों को नुकसान पहुँचाती हैं-
विषाक्त मृदा के प्रमुख लक्षणः

- मृदा में विषाक्तता बढ़ जाने से फसलों की वृद्वि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- पौधों की पत्तियों के किनारे किनारे पीले पड़ जाते हैं अथवा वह जले हुए से प्रतीत होने लगते हैं।
- पौधों की जड़ पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाती हैं।
- ऐसे खेत में प्रयोग की खाद भी अच्छे परिणाम प्रदान नहीं करती हैं।
1. उर्वरकों का अधिकतम प्रयोग
- उर्वरकों का अधिक प्रयोग करने से पौधें की जड़ें जल जाती हैं।
- उर्वरकों का अधिक मात्रा में प्रयोग करने से भूमि में मौजूद पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है।
- भूमि में नमक के स्तर को बढ़ाने से लाभ मिलता है।
2. नमक का जमाव अर्थात भूमि में लवणता का बढ़ना
- सिंचाई करने से लवण जमीन में एकत्र हो जाते हैं।
- पौधों की जड़ें पानी को अवशोषित करने के लिए संघर्ष करती हैं।
3. भारी धातुएं
- लैड (पीबी)।
- कैडमियम (सीडी)।
- आर्सेनिक (एएस)।
- फसलों के अन्दर जाकर मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं।
4. पीएच का असंतुलित होना
- मृदा अत्याधिक अम्लीय अथवा क्षारीय हो जाती है।
- इससे वातावरण में विषैले तत्व मुक्त होते हैं।
विशेषः विषाक्त मृदा सदैव ही क्षतिग्रस्त दिखाई नहीं देती है, जबकि पौधों की जड़ें ही इसे तुरंत ही महसूस कर सकती हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
