
गर्मी की गहरी जुताई और उसके लाभ Publish Date : 31/05/2026
गर्मी की गहरी जुताई और उसके लाभ
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
मई में गहरी जुताई किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, कीट-रोग खत्म होते हैं, नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरीफ फसलों की पैदावार में 40-50% तक बढ़ोतरी संभव है।
क्यों जरूरी है गर्मियों में गहरी जुताई?
गहरी जुताई का सबसे बड़ा फायदा मिट्टी की सेहत सुधारने में मिलता है। जब खेतों की 10 से 12 इंच तक जुताई की जाती है, तो मिट्टी की निचली परत ऊपर आ जाती है। इससे मिट्टी के अंदर मौजूद हानिकारक कीड़े तेज धूप के संपर्क में आकर खत्म हो जाते हैं। वहीं मिट्टी में हवा का संचार भी बेहतर होता है, जिससे पौधों की जड़ों का विकास तेजी से होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जुताई सुबह 7 बजे से 11 बजे तक या फिर शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच करनी चाहिए। इस समय खेतों में पक्षी अधिक सक्रिय रहते हैं और जुताई के दौरान बाहर निकलने वाले कीटों को खा जाते हैं। इससे खेत में प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण हो जाता है और किसानों का रासायनिक दवाओं पर खर्च कम होता है।

गर्मी की जुताई (ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई) रबी की फसल कटने के बाद अप्रैल से जून के महीनों में की जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि क्रिया है। इसमें मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की गहरी जुताई की जाती है, जो खेत से हानिकारक कीड़ों, खरपतवारों को नष्ट कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में मदद करती है।
गर्मी की जुताई के प्रमुख लाभ
कीट और रोगों का नाश: तेज धूप के कारण मिट्टी की निचली सतह पर छुपे हानिकारक कीड़ों के अंडे, लार्वा और प्यूपा ऊपर आ जाते हैं और गर्मी से जलकर नष्ट हो जाते हैं। इससे फसलों में लगने वाले रोगों और फफूंद का खतरा कम हो जाता है।
खरपतवारों पर नियंत्रण: जुताई से जिद्दी खरपतवारों (जैसे मोथा और दूब) की जड़ें उखड़कर सूख जाती हैं। साथ ही, खरपतवारों के बीज जो गहराई में दबे होते हैं, वे ऊपर आकर चिलचिलाती धूप में अपनी अंकुरण क्षमता खो देते हैं।
जल धारण क्षमता में वृद्धि: गहरी जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और उसकी पानी सोखने की क्षमता काफी बढ़ जाती है। बारिश का पानी खेत में अधिक गहराई तक जाता है और भूमिगत जल स्तर में सुधार होता है।
पोषक तत्वों का संतुलन: जब मिट्टी को पलटा जाता है, तो नीचे दबे पोषक तत्व ऊपर की सतह पर आ जाते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है।

मिट्टी का वायु संचार बेहतर होना: सख्त मिट्टी की परत टूटने से जड़ों का विकास अच्छा होता है और फसलों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
किसानों को चाहिए कि मई खत्म होने से पहले खेतों की गहरी जुताई का काम पूरा कर लें। जुताई हमेशा खेत की ढलान के विपरीत दिशा में करनी चाहिए ताकि बारिश का पानी खेत में रुके और मिट्टी का कटाव कम हो। इसके साथ ही खेतों को कुछ दिनों तक खुला छोड़ देना चाहिए ताकि तेज धूप का पूरा फायदा मिल सके। गर्मियों की यह छोटी सी तैयारी खरीफ सीजन में बड़ा लाभ दे सकती है। इससे खेत स्वस्थ बनेंगे, पानी की बचत होगी और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक मुनाफा भी मिलेगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
