गंदे पानी से बनेगी बिजली, जल भी मिलेगा शुद्ध      Publish Date : 29/05/2026

गंदे पानी से बनेगी बिजली,  जल भी मिलेगा शुद्ध

                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य

स्वच्छ पेयजल की बढ़ती समस्या और गहराते बिजली संकट के बीच एक राहत भरी खबर है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो इन दोनों बड़ी समस्याओं का एक साथ समाधान करेगी। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार फ्यूल सेल को पेटेंट के साथ कॉपीराइट भी मिल चुका है। यह फ्यूल सेल जहां गंदे पानी से बिजली उत्पन्न करेगा वहीं इसी प्रक्रिया में पानी भी शुद्ध कर देगा।

वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार ने बताया कि फ्यूल सेल गंदे पानी को ऑक्सीडाइज कर उसमें हाइड्रोजन की मदद से ऊर्जा पैदा करता है।वहीं, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाहर निकलने वाला पानी साफ मिलता है। इसमें हानिकारक तत्त्व समाप्त हो जाते हैं। इससे जहां वैकल्पिक ऊर्जा का स्रोत मिलेगा, वहीं पेयजल संकट से भी राहत मिलेगी।

                                  

इस शोध के लिए वैज्ञानिकों को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधानबोर्ड (सर्ब) से पचास लाख रुपये तथा ट्रिपलआईटी, इलाहाबाद से दस लाख रुपये की ग्रांट मिली है। यह शोध न्यूयॉर्क से प्रकाशित जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स नेचर में प्रकाशित हो चुका है।फ्यूल सेल को ट्रिपल आईटी के अप्लाइड साइंस विभाग के फिजिक्स अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार के नेतृत्व में शोध छात्र राज कुमार, विपिन कुमार और वेदिका यादव ने विकसित किया है। डॉ. कुमार का नाम स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की हालिया वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल है।

                                

वर्तमान में यह प्रोटोटाइप दस वोल्ट बिजली उत्पन्न कर रहा है।वैज्ञानिकों का दावा है कि बड़े स्तर पर विकसित होने पर इस तकनीक की एक यूनिट एक गांव की बिजली और शुद्ध जल की जरूरत पूरी कर. सकेगी। यह फ्यूल सेल चार हजार आठ सौ किलोवाट प्रति मिनट बिजली उत्पन्न करेगा। इस प्रक्रिया में एक किलो पानी से दस किलोवाट बिजली तैयार की जा सकेगी।

वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नई उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगी, जहां गर्मी में बिजली कटौती और दूषित जल की समस्या रहती है। शोधकर्ताओं के अनुसार भविष्य में इसे जल शोधन संयंत्रों और छोटे बिजली उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे जल प्रदूषण में कमी आएगी और ऊर्जा उत्पादन के लिए नए संसाधन उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का दावा है कि यह खोज स्वच्छ भारत और स्वच्छ ऊर्जा अभियानों को मजबूती देने वाली है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।