जानलेवा कीटनाशक बनाने एवं बेचने वालों को पाँच साल की जेल      Publish Date : 21/05/2026

जानलेवा कीटनाशक बनाने एवं बेचने वालों को पाँच साल की जेल

                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

  • खेती-किसानी के लिए सरकार का एक बड़ा कदम

देश की खेती और किसानों को अवैध एवं जानलेवा कीटनाशक रसायनों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार 57 वर्ष पुराना एक कानून बदलने जा रही है। इसके लिए सरकार कीटनाशक प्रबन्धन विधेयक लाने जा रही है, जो 1968 के कीट कानून का स्थान ग्रहण करेगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिल जाने के बाद इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा।

आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान समय में देश में कीटनाशकों के विषाक्त प्रभावों के चलते लगभग 7500 किसानों की मौत हो रही है, साथ ही हमारे प्रतिदिन सेवन करने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थ भी दूषित हो रहे हैं। इस प्रक्रिया को रोकने के लिए ही इस नए बिल में कीटनाशकों की डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके तहत हर प्रकार के पेस्टीसाइड को सरकार के डिजिटल डेशबोर्ड पर रजिस्टर कराना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था देशी और विदेशी समस्त प्रकार के कीटनाशकों पर लागू की जाएगी। किसान के जीवन को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नए बिल में प्रोटेक्टिव गियर, छिड़काव करने के लिए समुचित ट्रेनिंग और इनके हैंडलिंग के तौर-तरीके भी निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बिल में सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर घातक कीटनाशक बनाने और बेचने वालों को पाँच वर्ष की जेल और रू. 40 लाख तक के जुर्माने की सजा का प्रावधन भी किया गया है।

                                    

इस प्रकार से काम करेगा सरकार द्वारा पेश किया गया नया बिल

  • देश में अभी 0.5 कि.ग्रा. प्रति एकड़ भूमि की दर से कीटनाशकों का प्रयोग करने की छूट दी जा रही है। लेकिन, किसान गैर नियमित कीटनाशकों का भी बहुत अधिक प्रयोग करते हैं, जो कि किसानों के लिए जानलेवा भी सिद्व हो रहे हैं।
  • नए बिल के आने से पेस्टिसाउड्स की नेशनल रजिस्ट्री तैयार की जाएगी। दिशा-निर्देश जारी करने के लिए एक बोर्ड का गठन भी किया जाएगा। यह सारा डेटा केन्द्रीय स्तर पर रहेगा कि किस राज्य के लिए कितना कीटनाशक सप्लाई किया गया है और कहां-कहां किसकी बिक्री की गई है।
  • कीटनाशकों की लेबलिंग, पैकेजिंग और परिवहन आदि पर 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी।
  • यदि कोई कीटनाशक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों पर खरा नहीं पाया जाता है और उसका उपयोग करने से किसी की मौत हो जाती है तो सम्बन्धित निर्माता एवं विक्रेता पर सजा और जुर्माना आदि लगाया जाएगा।
  • भविष्य में दोबार से यही अपराध करने पर दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है और तीसरी बार यही अपराध करने पर सम्बन्धित कंपनी का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा और कंपनी के डायरेक्टर अथवा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को दोषी माना जाएगा।
  • कीटनाशकों का निर्माण, आयात, वितरण, बिक्री और स्टॉक आदि के नियमों के विरूद्व होने पर इनके बनाने वाले पर 2 लाख रूपये तक के जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
  • गैर रजिस्टर्ड, प्रतिबन्धित, एक्सपायर अथवा रद्द किए गए लाइसेंस वाला कीटनाशक बेचने पर भी 50 हजार से 2 लाख रूपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
  • बिना किसी वैद्य लाइसेंस के उत्पादन/आयात अथवा बैन किए गए कीटनाशकों को बनाने पर अधिकतम 3 वर्ष की सजा का प्रावधान भी किया गया है और इसमें 40 लाख रूपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • एक बार संसद से इस बिल के पारित हो जाने के बाद इस बिल का क्रियान्वयन करने के लिए केन्द्रीय स्तर पर दो निकायों का गठन किया जाएगा। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।