डंग बीटल अर्थात गोबर भृंग या गुबरैला      Publish Date : 14/05/2026

         डंग बीटल अर्थात गोबर भृंग या गुबरैला

                                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

क्या है डंग बीटल, जिसे (गोबर भृंग या गुबरैला भी कहते है), जो कि प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण सफाईकर्मियों में से एक हैं। ये छोटे कीट पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

मुख्य जानकारी और विशेषताएं

आहारः यह कीट मुख्य रूप से शाकाहारी और सर्वाहारी जानवरों के गोबर (मल) पर निर्भर रहता हैं।

अद्भुत ताकतः यह कीट अपने वजन से 1,141 गुना अधिक वजन खींच सकता हैं। यह एक इंसान द्वारा छह डबल डेकर बसों को खींचने के बराबर है।

नेविगेशनः कुछ प्रजातियां रात में आकाशगंगा (Milky Way) का उपयोग करके अपनी दिशा को तय करती हैं।

आवासः यह कीट अंटार्कटिका को छोड़कर दुनिया के प्रत्येक महाद्वीप पर पाया जाता हैं।

कीट के काम करने के तरीके (तीन प्रमुख समूह)

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वैज्ञानिकों के द्वारा इस कीट को इनके काम करने के तरीके के आधार पर तीन समूहों में बांटा गया हैः

(1) रोलर्स (Rollers): इस प्रजाति के कीट गोबर का गोला बनाते हैं और उसे लुढ़काकर दूर ले जाते हैं ताकि वहां वह अंडे दे सकें।

(2) टनलर्स (Tunnelers): इस समूह के कीट सीधे गोबर के ढेर के नीचे सुरंग खोदते हैं और गोबर को वहीं जमीन के नीचे दफन कर देते हैं।

(3) ड्वेलर्स (Dwellers): इस समूह के कीट गोबर के ढेर के अंदर ही रहते हैं और वहीं अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।

कीट का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्व

(1) मिट्टी की उर्वरताः गोबर को जमीन के नीचे दफनाने से मिट्टी को प्राकृतिक खाद मिलती है।

(2) बीज प्रसारः यह कीट गोबर के साथ बीजों को भी इधर-उधर ले जाते हैं, जिससे नए पौधे उगते रहते हैं।

(3) बीमारी नियंत्रणः गोबर को जल्दी साफ करके ये मक्खियों और परजीवियों को पनपने से भी रोकते हैं।

संरक्षण और खतरे

                                            

आधुनिक खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और पशुओं को दी जाने वाली कृमिनाशक दवाएं (जैसे आइवरमेक्टिन) इनके लिए घातक साबित हो रही हैं। गोबर में मौजूद रसायनों के कारण इनकी प्रजनन क्षमता और जीवन पर बुरा असर पड़ता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।