
मिट्टी के तापमान और फसल उत्पादन का आपसी सम्बन्ध Publish Date : 08/04/2026
मिट्टी के तापमान और फसल उत्पादन का आपसी सम्बन्ध
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 वीरेन्द्र सिंह गहलान
मिट्टी का तापमानः फसल की सफलता और अच्छे उत्पादन का छुपा हुआ रहस्य, परन्तु क्या आप जानते हैं कि मिट्टी का तापमान बीज के अंकुरण, पौधों की जड़ों का विकास और मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की सक्रियता पर सीधा प्रभाव डालता है।
तापमान कम होने पर पडने वाले प्रभाव

- बीज अंकुरण मेद पड़ जाता है।
- पौधो की जड़ की वृद्धि कम होती है।
- सूक्ष्मजीवों की गतिविधि कम हो जाती है।
तापमान के अधिक होने पर पडने वाला प्रभाव
- मृदा का तापमान अधिक होने पर पौधों की जड़ों का तनाव बढ़ जाता है।
- इससे मिट्टी में नमी का स्तर तेजी से कम होता है।
- मृदा का तापमान अधिक होने से मिट्टी में उपलब्ध जैविक पदार्थ शीघ्र ही नष्ट होता है।
गन्ने की फसल में विशेष ध्यान दें-
खुली मिट्टी तेज धूप में जल्दी गर्म होती है, जिससे नमी का नुकसान और जड़ों के दबाव में वृद्धि होती है।
समस्या का समाधानः
- खेत में मल्चिंग का कार्य अविलम्ब पूर्ण करना चाहिए।
- फसल के अवशेष से मिट्टी को ढककर रखें।
- कवर क्रॉप का उपयोग आवश्यक रूप से करें।
ऐसा करने से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जमीन की नमी भी सुरक्षित रहती है और मृदा के अन्दर मौजूद सूक्ष्मजीव भी सक्रिय बने रहते हैं।
फसल की सफलता का सूत्रः

स्वस्थ मिट्टी = मजबूत जड़ें = बेहतर पोषण = अधिक उत्पादन।
गन्ना-खेती के अन्तर्गत
मिट्टी-स्वास्थ्य (Soil Temperature/Mulching) (Sugarcane Farming and Sustainable Agriculture):
क्या आप जानते हैं प्रयाप्त मात्रा में खाद डालने के बाद भी आपका गन्ना कमजोर क्यों है?
यह समस्या सिर्फ खाद की कमी ही नहीं होती है-
अक्सर मिट्टी की पूरी प्रणाली (Soil System) ही असंतुलित हो जाती है।
जब मिट्टी की जैविक क्रियाएँ और सूक्ष्मजीव (Soil Biology) दबाव में होते हैं, तो पोषक तत्व गन्ने की जड़ों तक सही तरीके से नहीं पहुँच पाते हैं।
ऐसे में या तो वह
✔ मिट्टी में बंध जाते हैं।
✔ आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
✔ गलत समय पर उपलब्ध होते हैं।
इसी कारण आपको यह देखने को मिलता है।
- मिट्टी रिपोर्ट अच्छी, लेकिन फसल कमजोर होती है।
- शुरुआत में तेज बढ़वार, बाद में फसल की वृद्धि में रुकावट आने लगती है।
- ऐसे में फसल की लागत तो बढ़ती जाती है, परन्तु उत्पादन कम मिलता है।
- इसका समाधान अधिक खाद डालना तो कतई भी नहीं है। बल्कि इसका उचित समाधान वह है जो खाद डाल रहे हैं उसे प्रभावी बनाने के लिए उचित प्रयास करना है।
इसके लिए-
- मिट्टी का जैविक संतुलन में आवश्यक सुधार करें।
- सूक्ष्मजीव की सक्रियता को बढ़ाने वाले कार्य करें।
- जड़ों का विकास हेतु आवश्यक कार्य करें।
- पोषक तत्वों की उपलब्धता उचित संतुलन बनाकर रखें।
- पहले मिट्टी को ठीक करें, फिर गन्ने की खेती से अच्छे परिणाम प्राप्त होगे।
गन्ना-खेती: (Soil Health Sugarcane Farming): जैविक-खेती #FertilizerManagement सही कृषि-ज्ञान।
असल में आपकी यह समस्या खाद की नहीं बल्कि मिट्टी की है।
जब फसल का प्रदर्शन कमजोर होता है तो इसके सम्बन्ध में अधिकांश किसान एक ही प्रतिक्रिया देते हैं, और अधिक खाद डालो। लेकिन क्या हो अगर समस्या खाद की हो ही न तो-
असली समस्या अक्सर मिट्टी की होती हैः
- खराब मिट्टी संरचना, जिससे जड़ों की वृद्धि सीमित हो जाती है।
- मिट्टी का सख्त होना (कम्पैक्शन), जो पोषक तत्वों को पौधों तक पहुंचने से रोकता है।
- पोषक तत्वों का असंतुलन, जिससे उनकी उपलब्धता प्रभावित होती है।
- कम जैविक सक्रियता, जिससे खाद की कार्य क्षमता कम हो जाती है।
- इसलिए पर्याप्त पोषक तत्व होने के बावजूद, पौधे फिर भी संघर्ष करते हैं और उत्पादन में सुधार नहीं होता, और किसान की लागत लगातार बढ़ती जाती है।
जबकि सच्चाई यह हैः
खाद कभी भी असफल नहीं होती, मिट्टी की पूरी प्रणाली उसे पौधों तक पहुँचाने में असफल होती है। केवल अधिक इनपुट डालने से टूटी हुई मिट्टी प्रणाली ठीक नहीं होती।
इसलिए, सबसे पहले खेत की मिट्टी की दशा को सुधारिए तो फिर खाद अपने आप सही तरीके से काम करने लगेगी
चिंता
चिंता बड़ी भयानक चीज है। किसान को MSP की चिंता सबसे अधिक होती है। क्योकि यह उन्हें सीधे तौर से नजर आती है रुपये के रूप में और अपनी आय के रूप में। लेकिन कभी नीचे दी गई बातो को लेकर चिंता जाहिर करते हुए किसी को नहीं देखा। क्योकि यह उन्हें नजर नहीं आती है।
- अपनी ख़राब होती मिटटी के बारे में चिंता?
- गिरते भूजल स्तर के बारे में चिंता?
- जल संरक्षण और संवर्धन के बारे में चिंता?
- स्वयं के स्वास्थ्य के बारे में चिंता?
- पर्यावरण के बारे में चिंता?
- अपनी उपज के बारे में चिंता?
- नयी तकनिकी अपनाने के बारे में चिंता ?
- मूल्य संवर्धन के बारे में चिंता?
- मार्केटिंग के बारे में चिंता ?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
