यूरिया का अत्याधिक उपयोगः इसके खतरे एवं नाइट्रोजन के टिकाऊ विकल्प      Publish Date : 07/04/2026

यूरिया का अत्याधिक उपयोगः इसके खतरे एवं नाइट्रोजन के टिकाऊ विकल्प

                                                                                       प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 निधि सिंह

नाइट्रोजन खाद क्या होती है?

नाइट्रोजन से युक्त उर्वरक फसलीय पौधों की वृद्वि, हरियाली और फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। मुख्य रूप् से नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों को चार भागों में बांटा जाता हैः

1. अमोनिकल खाद (NH+4)

  • यह खाद मिट्टी में धीरे-धीरे चलती है अर्थात यह कम गतिशील होती हैं।
  • अमोनियम सल्फेट - 20%N, 24% S
  • अमोनियम क्लोराइड - 25-26% N
  • एनहाइड्रस अमोनिया - 82% N

लाभः इसका प्रभाव धीरे-धीरे नजर आता है।

  • लीचिंग (पानी में बहने) की समस्या कम होती है।

2. नाइट्रेट खाद (NO3-)

मृदा में बहुत तेजी के साथ विस्तारित होती है।

  • सोडियम नाइट्रेट - 16% N
  • कैल्शियम - 15-5% N, 19% Ca
  • पोटेशियम नाइट्रेट - 13% N, 45% K

इनका प्रयोग करने से पौधों के लिए नाइट्रोजन तुरंत उपलब्ध हो जाती है।

3. अमोकिल + नाइट्रट खाद

यह अमोनिया और नाइट्रोजन दोनों का मिश्रण होता है (NH4+ + NO3-)

  • अमोनियम नाइट्रेट - 33% N
  • ब्।छ (कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट) - 25% N
  • अमोनियम सल्फेट नाइट्रेट - 26% N, 12% S

4. अमाइड खाद

मिट्टी के अन्दर जाकर पहले अमोनिया में बदलती है।

  • यूरिया - 46% N
  • कैल्शियम सायनामाइड - 21% N

विशेषताः

नाइट्रोजन खाद का उचित उपयोग करने से फसल हरी-भरी, मजबूत और अधिक उपज प्रदान करने वाली बनती हैं।

केवल सस्ता होने के चलते यूरिया पर अति निर्भर रहना मृदा के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। नाइट्रोजन फसलों की वृद्वि एवं प्रोटीन के उत्पादन के लिए एक आवश्यक अवयव है, परन्तु इसकी पूर्ति के लिए रायायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक और कार्बनिक स्रोतों का उपयोग कर पौधों के लिए नाइट्रोजन को संतुलित मात्रा में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

यूरिया का अत्याधिक मात्रा में उपयोग करने से उत्पन्न खतरे

                                      

यूरिया का अत्याधिक उपयोग मृदा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैः

यूरिया की सस्ती एवं सहज उपलब्धता के कारण अधिकतर किसान भाई युरिया का प्रयोग अपने खेतों में अविवेकपूर्ण तरीके से करते हैं, जो कि मिट्टी की संरचना को बिगाड़ देता है और मृदा की प्राकृतिक उर्वर शक्ति को कम कर देता है। 

लाभकारी जीवाणुओं का नाश

रासायनिक दवाओं और यूरिया आदि के अधिक मात्रा में प्रयोग में लाने से मृदा में उपलब्ध विभिन्न लाभकारी जीवाणुओं का नाशा होता है। जबकि अत्याधिक रासायनिक जल निकासी के द्वारा मृदा में नाइट्रोजन के स्थिरीकरण करने वाले इन प्राकृतिक जीवाणुओं की संख्या में भारी वृद्वि होती है।

जैविक संसाधन ही पर्याप्त नहीं

जैसे गेहूँ की फसल के लिए नाइट्रोजन की कुल आवश्यकता लगभग 50 किलोग्राम तक होती है, जबकि जीवाणु युक्त उर्वरकों से केवल 12-20 किलोग्राम तक नाईट्रोजन की पूर्ति ही की जा सकती है।

नाइट्रोजन की पूर्ती हेतु स्थाई विकल्प

                                   

जैविक जीवाणुओं का उपयोग करें: एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम और राइजोबियम जैसे जीवाणु वतावरण से सीधे नाइट्रोजन को प्राप्त कर उसे पौधों के लिए उपलब्ध कराने में सक्षम होते हैं।

जैविक खाद एवं गोबर की खाद का उपयोग करें: नीम, गन्ना या अरंडी के बीज आदि जैविक आदान मृदा में नाइट्रोजन को धीरे-धीरे रिलीज करते हैं, जिससे खेतों में लगाई गई फसलों को यह नाइट्रोजन अधिक लम्बे समय तक प्राप्त होती रहती है।

नाइट्रोजन की फैक्ट्री का निर्माण इस प्रकार से करें:

मृदा में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में वृद्वि करने से नाइट्रोजन का मृदा में स्थिरीकरण करने वाले बैक्टीरिया की अपेक्षित वृद्वि होती है और मृदा की उर्वरता भी उत्तम ही बनी रहती है।  

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।