
मिट्टी की संरचना ही सब कुछ नियंत्रित करती है Publish Date : 05/04/2026
मिट्टी की संरचना ही सब कुछ नियंत्रित करती है
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 वीरेन्द्र सिंह गहलान
- आप सबसे अच्छा उर्वरक डाल सकते हैं।
- सबसे अच्छे बीज इस्तेमाल कर सकते हैं।
- यहाँ तक कि सिंचाई भी पूरी तरह सही कर सकते हैं।
- लेकिन अगर मिट्टी की संरचना (Soil Structure) खराब है।
- तो कुछ भी सही तरीके से काम नहीं करेगा।
मिट्टी की संरचना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मिट्टी की संरचना ही तय करती है कि:
- पानी मिट्टी में कैसे प्रवेश करेगा और कैसे आगे बढ़ेगा।
- हवा जड़ों तक कैसे पहुँचेगी।
- जड़ें कैसे बढ़ेंगी और फैलेंगी।
- पोषक तत्व पौधों को कितनी आसानी से उपलब्ध होंगे
खराब मिट्टी संरचना के नुकसान:

- पानी मिट्टी में जाने की बजाय बह जाता है।
- मिट्टी सख्त होकर जड़ों को रोकती है।
- जड़ क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी होती है।
- पोषक तत्वों की हानि और कम उपयोग दक्षता होती है।
सच्चाई जो अधिकतर लोग नजरअंदाज करते हैं:
- खेती की सफलता ऊपर से नहीं बनती।
- इसकी शुरुआत नीचे मिट्टी की संरचना से होती है।
- उपज की समस्या सतह पर ठीक नहीं होती।
- इसका समाधान मिट्टी की पूरी प्रणाली में होता है।
- स्वस्थ मिट्टी संरचना = मजबूत जड़ें + बेहतर पानी उपयोग + अधिक उत्पादन
बताइए:
क्या आपने कभी देखा है कि सब कुछ सही होने के बावजूद फसल कमजोर पड़ रही हो?
आपको यह बताया गया है — लेकिन यह अधूरा है।
“बस खाद डालो और फसल बढ़ेगी।” अधिकतर किसानों को यही सिखाया जाता है। लेकिन यह कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है।
इसमें क्या कमी है?
- खाद अकेले काम नहीं करती।
- यह आपकी मिट्टी की पूरी प्रणाली (soil system) पर निर्भर करती है।
अगर आपकी मिट्टी में:
- खराब संरचना (structure) है।
- सख्त परत/कंप्रेक्शन (compaction) है।
- जैविक गतिविधि कम है।
- रासायनिक असंतुलन है
तो पोषक तत्व वैसा काम नहीं करेंगे जैसा आप उम्मीद करते हैं।
असली सच्चाई:
- खाद सीधे पौधे को नहीं खिलाती, मिट्टी की प्रणाली उसे पौधे तक पहुंचाती है।
- इसलिए जब मिट्टी का सिस्टम कमजोर होता है, तो सबसे अच्छे इनपुट भी फेल हो जाते हैं।
- यही कारण है कि कुछ किसान बार-बार खाद बढ़ाते हैं, लेकिन रिजल्ट वही के वही रहते हैं।
- असली सुधार ज्यादा इनपुट में नहीं है — बल्कि बेहतर मिट्टी के वातावरण में है।
बताइए:

आपने कौन-सी खेती की सलाह अपनाई जो उम्मीद के मुताबिक काम नहीं आई?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
