जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: मौसम फिर बिगड़े मौसम के मिजाज मार्च में मानसून जैसी बारिश      Publish Date : 21/03/2026

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: मौसम फिर बिगड़े मौसम के मिजाज मार्च में मानसून जैसी बारिश

                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य

देशभर में रबी की फसलों को हुआ काफी नुकसान-

मार्च के महीने में अभी कुछ दिनों पहले तक गर्मी जहाँ अपना प्रचंड रूप दिखा रही थी, वहीं अब अचानक जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम ने फिर से करवट ली और एक बार फिर से मार्च के महीने में होने वाली बारिश ने मानसून की बारिश के जैसा रूप धारण कर लिया है। पश्चिमी विक्षोभ, ऊपरी हवाओं के चक्रवर्ती प्रसार और पोस्ट कटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम के संयुक्त प्रभाव से उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण तक बारिश, तेज हवाएं, बज्रपात, ओला वृष्टि और आंधी तूफान का दौर सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटे में कई राज्यों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी कर दी गई है। किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

                                

पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बे-मौसम बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि ने कृषि और बागवानी के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी है। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज हवाओं से गेहूं की खड़ी फसल को काफी स्थानों पर नुकसान हुआ है, क्योंकि हवा के कारण फसलें खेत में गिर गई हैं। इसी प्रकार मसूर और चने की तैयार फसल में नमी से दानें कम और फलियों के चटखने का भय पैदा हो गया है।

उत्तर भारत के मौसम में सबसे तीखा बदलाव दर्ज किया गया

पहाड़ों में जोरदार बर्फबारी और ओलावृष्टि के साथ तेज चलने वाली हवाओं ने भी लोगों को परेशान किया हुआ है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम का असर और अधिक तीव्र रूप से देखने को मिला है। इन राज्यों में भारी बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में जोरदार बर्फबारी भी हुई है, जिससे क्षेत्र के 10 हाईवे बंद हो गए हैं। उत्तराखंड में तेज आंधी और ओलावृष्टि के साथ हवाओं की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई है, जिससे जनजीवन भी बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है।

वहीं जम्मू कश्मीर और लद्दाख में लगातार बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, यहां का तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे की गिरवट दर्ज की गई है।

हाल ही में मौसम में हो रहे बदलाव के कारण भारत सरकार के द्वारा विशेष एतिहाती कदम उठाए गए हैं। भारत सरकार के कृषि सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह राज्य सरकारों के साथ संबंध बनाकर क्राफ्ट कटिंग प्रयोग और नुकसान के आकलन का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करें। मौसम विभाग को भी समय पर सूचना साझा करने के लिए भी कहा गया है, ताकि कृषक समय रहते ही बचाव के आवश्यक उपाय कर सके।

                                

आगामी दो पश्चिमी विक्षभों की संभावना को देखते हुए इस दौरान किसानों के लिए आवश्यक सलाह और जोखिम प्रबंधन पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई।

फसल नुकसान पर किसानों को तुरंत सहायता और बीमा लाभ दिया जाए             - कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

प्रतिकूल मौसम और बे-मौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फसलों को हुए नुकसान की भरपाई, बीमा के माध्यम से तुरंत की जाएगी। इस सम्बन्ध में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि फसल क्षति का वैज्ञानिक का आकलन कर उसके लिए बीमा क्लेम की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं बल्कि किसानों की आय में स्थिरता और जोखिम के समय तुरंत सहायता प्रदान करना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कल से मौसम साफ रहने की उम्मीद

मेरठ और आसपास के इलाकों में मौसम में अचानक हुए परिवर्तन ने दोहरी स्थिति पैदा कर दी है, जहां चिलचिलाती गर्मी से परेशान आम जनमानस को बरसात ने राहत दी है, वहीं खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल और अन्य फसलों में नुकसान होने की आशंका ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हुए इस बदलाव ने कृषि क्षेत्र के लिए एक संकट खड़ा कर दिया है। चूँकि इस समय सरसों की फसल पककर खेतों में तैयार खड़ी है, जबकि गेहूं की फसल भी अब कटाई के काफी करीब पहुंच चुकी है। वहीं आलू की फसल भी अभी कुछ खेतों में खड़ी हुई है।

ऐसे समय में हुई बरसात और तेज हवाओं से फसल के गिरने तथा उसके दानें खराब होने का खतरा भी काफी हद तक बढ़ गया है। मेरठ में मौसम ने करवट बदली और हवा के साथ हुई इस बरसात ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। आज मौसम सुबह ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोहरा फिर से पड़ने लगा है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले का अधिकतम तापमान 18 और न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। बारिश के कारण हवा में नमी का स्तर भी 94 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसके चलते वातावरण में ठंडक महसूस की जा रही है। इस बारे में जिला कृषि अधिकारी राजीव सिंह का कहना कि इस बे-मौसम बरसात से विशेष रूप से गेहूं, सरसों, मटर, आलू, टमाटर और जीरा आदि की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंकाएं काफी हद तक बढ़ गई है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।