
पौधों में रसारोहण (Ascent of Sap) Publish Date : 16/03/2026
पौधों में रसारोहण (Ascent of Sap)
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
पौधों में रसारोहण (Ascent of Sap) जड़ों द्वारा अवशोषित जल और खनिज लवणों का जाइलम ऊतक के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपरी वायवीय भागों (तने, पत्तियों) तक पहुँचने की एक भौतिक प्रक्रिया है। यह मुख्य रूप से वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (transpiration pull) और जल के संसंजन बल (cohesion force) के कारण होता है, जिसे डिक्सन और जॉली द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
रसारोहण की मुख्य विशेषताएँ:

-
संवाहक ऊतक:
यह जाइलम वाहिनियों के माध्यम से होता है।
- दशा: यह जल को जड़ों से शीर्ष तक ऊपर की ओर ले जाता है (गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध)।
- प्रमुख सिद्धांत: डिक्सन और जॉली का संसंजन-तनाव सिद्धांत (Cohesion-Tension Theory) सबसे अधिक मान्य है, जिसमें वाष्पोत्सर्जन से उत्पन्न खिंचाव मुख्य भूमिका निभाता है।
- बल: इसमें जल के अणुओं के बीच ससंजक बल (Cohesion) और जाइलम भित्ति के साथ अससंजक बल (Adhesion) काम करते हैं।
यह प्रक्रिया पौधों में जल के अवशोषण, पोषक तत्वों के परिवहन और शारीरिक वृद्धि के लिए अनिवार्य है।
रसारोहण की मुख्य विशेषताएँ:
- संवाहक ऊतक:
यह जाइलम वाहिनियों के माध्यम से होता है।
- दशा: यह जल को जड़ों से शीर्ष तक ऊपर की ओर ले जाता है (गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध)।
- प्रमुख सिद्धांत: डिक्सन और जॉली का संसंजन-तनाव सिद्धांत (Cohesion-Tension Theory) सबसे अधिक मान्य है, जिसमें वाष्पोत्सर्जन से उत्पन्न खिंचाव मुख्य भूमिका निभाता है।
- बल: इसमें जल के अणुओं के बीच ससंजक बल (Cohesion) और जाइलम भित्ति के साथ अससंजक बल (Adhesion) काम करते हैं।
यह प्रक्रिया पौधों में जल के अवशोषण, पोषक तत्वों के परिवहन और शारीरिक वृद्धि के लिए अनिवार्य है।
रसारोहण (Ascent of Sap) – पौधों में पानी और खनिज जड़ों से पत्तियों तक कैसे पहुँचते हैं?
पौधों में पानी ऊपर तक पहुँचने की प्रक्रिया कई शक्तियों की वजह से होती है:

- Transpiration Pull – पत्तियों से पानी के वाष्पीकरण से खिंचाव बनता है।
- Cohesion – पानी के अणु आपस में जुड़े रहते हैं।
- Adhesion – पानी पौधे की नलिकाओं (Xylem) से चिपका रहता है।
- Capillary Action – पतली नलिकाओं में पानी ऊपर चढ़ता है।
- इसी प्रक्रिया से पौधों को पानी और जरूरी पोषक तत्व (K⁺, Ca²⁺, Mg²⁺, NO₃⁻, PO₄³⁻) मिलते हैं।
- खेती और पौधों की ग्रोथ समझने के लिए यह प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
