
एग्री स्टार्टअप्स से सशक्त होते किसान Publish Date : 13/03/2026
एग्री स्टार्टअप्स से सशक्त होते किसान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
भारत के कृषि क्षेत्र में एक नया बदलाव देखने को मिला है। एग्री स्टार्टअप्स नवाचार, तकनीक और उद्यमशील ऊर्जा का उपयोग करके कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों को हल कर रहे हैं। सक्रिय सरकारी नीतियों, लक्षित विकास कार्यक्रमों और मज़बूत इनक्यूबेटर व एक्सेलरेटर नेटवर्क के सहयोग से ये स्टार्टअप्स ऐसे समाधान दे रहे हैं जो उत्पादकता बढ़ाते हैं, फसल नुकसान को कम करते हैं और बाज़ार से जोड़ने वाले तंत्र को मज़बूत करते हैं। इन प्रयासों से समावेशी विकास होता है और भारतीय कृषि का भविष्य मजबूत और टिकाऊ बनता है। भारत में एग्री स्टार्टअप्स से उद्यमशीलता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जो नवाचार को देश की स्थायी कृषि परम्परा से जोड़ते हैं। ये स्टार्टअप्स कंपनी, पार्टनरशिप व अस्थायी संगठनों को नए और विस्तारित व्यवसाय मॉडल पेश करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जो आर्थिक रूप से टिकाऊ उद्यम बन सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर, नवाचार ही स्टार्टअप की सफलता की कुंजी हैं और भारत तेजी से दुनिया के शीर्ष पाँच स्टार्टअप हब में शामिल हो गया है। 'स्टार्टअप इंडिया' जैसी प्रमुख पहलों का उद्देश्य भारत की घरेलू उद्यमशीलता को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना है जिससे देश ने महान उपलब्धियाँ हासिल की हैं और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा यूनिकॉर्न हब बनने की दिशा में अग्रसर हुआ है।
भारत में कृषि क्षेत्र 42.3% लोगों की मुख्य आजीविका है और यह देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 18% का योगदान देता है। पिछले पाँच वर्षों में कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.18% रही है। पिछले दशक में, एग्री-स्टार्टअप्स और नवाचार-प्रधान उद्यमों में एक परिवर्तनकारी बदलाव आया है, जो आधुनिक तकनीकों और व्यावसायिक मॉडल का उपयोग करके कृषि मूल्य श्रृंखला में मौजूद चुनौतियों को हल कर रहे हैं।
डेटा-आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप्स भारत जैसे देशों में महत्वपूर्ण हैं जहाँ वे सप्लाई चेन की अक्षमता, इनपुट की कीमतों में अस्थिरता और श्रमिकों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान करते हैं। ये स्टार्टअप्स तकनीक का उपयोग करके खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, उत्पादकता बढ़ाते हैं और विभिन्न कृषि-परिस्थितिकी क्षेत्रों व कृषि प्रणालियों में मजबूती लाते हैं।
तालिका 1: भारत में कृषि स्टार्टअप्स में निवेश (2018-2024)
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वर्ष |
कुल निवेश (मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
डील की संख्या |
मुख्य फोकस क्षेत्र |
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2018 |
66.3 |
43 |
आपूर्ति श्रृंखला, इनपुट मार्केटप्लेस |
|
2019 |
112.6 |
57 |
फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, सटीक कृषि |
|
2020 |
142.0 |
61 |
कृषि ऋण, आउटपुट मार्केटप्लेस |
|
2021 |
250.2 |
84 |
फार्म-टू-फोर्क, कोल्ड चेन, ट्रेसेबिलिटी |
|
2022 |
178.4 |
71 |
ड्रोन तकनीक, कृषि-बायोटेक, जलवायु-स्मार्ट कृषि |
|
2023 |
199.8 |
68 |
फसल-उत्पादन पश्चात तकनीक, कृषि सेवाएँ |
|
2024* |
₹215.0 (अनुमानित) |
70+ |
डिजिटल प्लेटफॉर्म, वैश्विक मूल्य श्रृंखला सुविधा |
भारत में कृषि स्टार्टअप्स का विकास
हाल के वर्षों में, भारत ने स्टार्टअप इकोसिस्टम में उल्लेखनीय वृद्धि की है और यह दुनिया में युवा उद्यमियों के लिए अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा हब बनकर उभरा है। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 82 देशों में बिजनेस एनवायरनमेंट रैकिंग (BER) में दसवें स्थान पर है। इसके अलावा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स 2020 में भारत ने 190 देशों में 63वाँ स्थान प्राप्त किया है।'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को साकार करने और वर्ष 2024-25 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर भारतीय अर्थव्यवस्था हासिल करने के लिए स्टार्टअप्स को मुख्य प्रेरक माना गया है। ये स्टार्टअप्स नवाचार के माध्यम से प्रभावशाली समाधान देते हैं और सामाजिक व आर्थिक विकास में मदद करते हैं।
वर्ष 2016 में शुरू की गई 'स्टार्टअप इंडिया' पहल ने शानदार सफलता हासिल की है। मई 2024 तक, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा 131,211 स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई जिससे लगभग 0.89 मिलियन लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। भारत में वर्तमान में 108 यूनिकॉर्न्स भी मौजूद हैं। इंडियन स्टार्टअप इकोसिस्टम में वेंचर कैपिटल डील्स की संख्या में 7.5% की वृद्धि हुई जिसके परिणामस्वरूप $27.5 बिलियन का निवेश हुआ।भारत के कृषि क्षेत्र में वर्ष 2018 से वर्ष 2021 के बीच निवेश लगभग चार गुना बढ़कर यूएसडी 66.3 मिलियन से 250.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। यह असाधारण वृद्धि निवेशक विश्वास में स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है, जो व्यापक डिजिटल रूपांतरण, स्टार्टअप इंडिया और एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी सहायक सरकारी पहलों और विस्तारित किए जा सकने वाले एग्रीटेक व्यवसाय मॉडल के उदय द्वारा प्रेरित है।
निवेशकों का भरोसा इस बात से साफ दिखाई देता है किOmnivore जैसी कंपनियाँ लगातार कई वर्षों से निवेश कर रही हैं, जो भारतीय एग्रीटेक क्षेत्र में उनकी स्थायी रुचि और विश्वास को दर्शाता है। Ankur Capital, Sequoia और Accelजैसे निवेश करने वाले निवेशक भी इस क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी को और मज्जबूत रूप से साबित करते हैं।पिछले दस सालों में कृषि स्टार्टअप्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसका कारण कृषि में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल, सरकार की मदद और निवेशकों की रुचि है। स्टार्टअप इंडिया (2024) के अनुसार, वर्ष 2016 से हर साल लगभग 25% की दर से बढ़ते हुए 3,000 से ज्यादा कृषि स्टार्टअप्स पंजीकृत हो चुके हैं। ये स्टार्टअप्स सटीक कृषि, फसल प्रबंधन, बीज और अन्य इनपुट की आपूर्ति, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सप्लाई चेन, ट्रैसेबिलिटी और कृषि फिनटेक जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में तकनीक और नवाचार तेजी से अपनी पकड़ मज्जबूत बना रहे हैं।
तालिका 2: भारत में कृषि स्टार्टअप्स की वृद्धि
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वर्ष |
पंजीकृत कृषि स्टार्टअप्स की संख्या |
वार्षिक वृद्धि (%) |
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2016 |
180 |
— |
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2018 |
540 |
40.0 |
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2020 |
1,250 |
58.3 |
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2022 |
2,300 |
38.4 |
|
2024 |
3,200 |
28.3 |
सक्रिय सरकारी नीतियाँ और सहायक कृषि स्टार्टअप इकोसिस्टम
भारत ने नवाचार-आधारित स्टार्टअप तैयार किया है, जिसे कई सक्रिय सरकारी नीतियों ने आगे बढ़ाया है। इन नीतियों का उद्देश्य देश को नौकरी खोजने वालों से नौकरी देने वालों का राष्ट्र बनाना है।वर्ष 2014 में शुरू की गई 'मेक इन इंडिया' पहल का उद्देश्य भारत को निर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाना था। इस पहल ने निवेश, कौशल विकास, बौद्धिक संपदा संरक्षण और आधुनिक बुनियादी ढाँचे पर जोर देकर तकनीक-आधारित नवाचारों की मजबूत नींव रखी, जिनमें एग्रीटेक विनिर्माण भी शामिल है। साथ ही, वर्ष 2016 में स्टार्टअप इंडिया आंदोलन ने 19 सूत्रीय कार्ययोजना के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया है।नवाचार की धारा को और मज्जबूत करने में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। यह स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय चुनौतियों को हल करने के लिए इन्क्यूबेटर, टिंकरिंग लैब्स और उद्यमशीलता समर्थन प्रणालियों के माध्यम से काम करता है।इसी तरह, न्यूजेन इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर (NewGen IEDC) जैसी योजनाएँ, जिन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का समर्थन प्राप्त है, शैक्षणिक संस्थानों को युवा नवाचारकों को प्रोत्साहित करने और प्रारंभिक चरण की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाती हैं।
कृषि स्टार्टअप क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव वित्तीय वर्ष 2018-19 में RKVY-RAFTAAR के तहत इनोवेशन और एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम की शुरुआत के साथ आया। यह पहल विशेष रूप से कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है और स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन सहायता और वित्तीय अनुदान प्रदान करती है।ज्ञान साझेदारों के नेटवर्क और 24 R-ABI केंद्रों के माध्यम से, इस कार्यक्रम ने अब तक 1100 से अधिक कृषि स्टार्टअप्स का समर्थन किया है और 3500 से अधिक उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया है। इसने स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों से लेकर सटीक कृषि उपकरणों तक नवाचारी विचारों को व्यावसायिक रूप में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है, जिससे किसानों की आय बढ़ी और ग्रामीण रोजगार सृजन में मदद मिली।नीतिगत हस्तक्षेपों के साथ-साथ, कृषि स्टार्टअप इकोसिस्टम ने भी तेजी से विकास किया है, जिसका कारण कृषि के लिए समर्पित इन्क्यूबेटर, एक्सेलरेटर और नवाचार प्लेटफॉर्म्स का उदय है। संस्थान जैसे MANAGE का सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एग्रीप्रेन्योरशिप, a-IDEA@NAARM और ICRISAT एग्रीबिज्जनेस एंड इनोवेशन प्लेटफॉर्म उद्यमियों को विचार से लेकर प्रोटोटाइप विकास और व्यावसायीकरण तक पूरा समर्थन प्रदान करते हैं। ये प्लेटफॉर्म्स ज्ञान, तकनीक और वित्त के अंतर को पाटते हैं, जिससे स्टार्टअप्स अपनी तैयारी की अवधि कम कर विस्तार योग्य व्यवसाय बना सकें।
एक्सेलरेटर जैसे AGRI UDAAN, IIM अहमदाबाद का CIIE, IIIT हैदराबाद का CIE और MANAGE एक्सेलरेटरमेंटरशिप, बाजार से जोड़ने और निवेश तैयार करने जैसी सुविधाएँ प्रदान करके अवसरों का विस्तार करते हैं। आज भारत में 100 से अधिक कृषि-केंद्रित इन्क्यूबेटर हैं जिन्हें DST, ICAR, स्टार्टअप इंडिया और RKVY-RAFTAAR का समर्थन प्राप्त है, जो मिलकर कृषि खाद्य क्षेत्र में सैकड़ों प्रारंभिक चरण के उद्यमों को बढ़ावा दे रहे हैं।सरकार ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय-स्तर के प्लेटफॉर्म्स भी शुरू किए है, जैसे एग्री इंडिया हैकथॉन जो स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और उद्योग के नेताओं को AI, IOT और उन्नत यंत्रीकरण का उपयोग करके समाधान देता है। डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म्स, मौसम पूर्वानुमान उपकरण, सौर ऊर्जा से चलने वाले कोल्ड स्टोरेज, वर्टिकल फार्मिंग और बायोगैस सिस्टम जैसे कृषिटेक समाधान के माध्यम से, स्टार्टअप्स अब भारतीय कृषि में मौजूद संरचनात्मक बाधाओं को तेजी से हल करने में सक्षम हो रहे हैं।
भारत में कृषि स्टार्टअप्स
कृषि क्षेत्र जिसमें फसलें, पशुपालन और मत्स्य पालन शामिल है, में कई स्टार्टअप्स उभरे हैं, जिन्हें सामान्यतः 'एग्री-स्टार्टअप्स' कहा जाता है। इन उद्यमों को उनके विशेष कार्यक्षेत्रों के आधार पर विभाजित किया जा सकता है जैसे एग्रीटेक, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक कृषि और अन्य। इसके अलावा, इन्हें उनके विकास चरणों के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता हैः विचार, सत्यापन, प्रारंभिक गति और विस्तार।एग्री स्टार्टअप्स से पारम्परिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव आया है, छोटे किसान सशक्त हुए है, फसल कटाई के बाद का नुकसान कम हुआ है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मूल्यवर्धित सेवाओं के माध्यम से बाज्जार से जोड़ने में सुधार आया है। इनके प्रमुख प्रभाव क्षेत्र इस प्रकार है:
- सटीक कृषिः इसमें IOT, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग का उपयोग किया जाता है। उदाहरणः Fasal, CropIn.
- सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्सः यह फार्म-टू-फोर्क डिलीवरी को बेहतर बनाता है। उदाहरण: DeHaat, Ninjacart.
- इनपुट रिटेलिंग और सलाहः इसमें ऐप-आधारित कृषि इनपुट्स और फसल सलाह शामिल हैं। उदाहरणः Agro Wave, Agri Bazaar.
- फिनटेक और बीमाः यह ऋण और मौसम-आधारित बीमा तक पहुँच प्रदान करता है। उदाहरण: Samunnati, Gram Cover.
तालिका 3 : कृषि स्टार्टअप्स की कार्यात्मक श्रेणियाँ और प्रभाव क्षेत्र
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श्रेणी |
उदाहरण |
मुख्य प्रभाव |
|
सटीक कृषि |
Fasal, CropIn |
उत्पादन में वृद्धि, जल उपयोग की दक्षता बढ़ाना |
|
आपूर्ति श्रृंखला |
DeHaat, Ninjacart |
फसल हानि में कमी, बेहतर मूल्य प्राप्ति |
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डिजिटल बाजार |
AgriBazaar, BigHaat |
पारदर्शी मूल्य निर्धारण, किसान और खरीदार का सीधा संपर्क |
|
कृषि फिनटेक |
Samunnati, Jai Kisan |
ऋण की सुविधा, लेन-देन का डिजिटलीकरण |
सप्लाई चेन और मार्केटप्लेस स्टार्टअप्स का प्रभुत्व यहदर्शाता है कि बाजार में असमानताएँ और फसल कटाई के बाद के नुकसान भारतीय कृषि की मुख्य चुनौतियाँ बनी हुई है। हालाँकि सटीक कृषि अभी उभर रही है, पंजाब और तेलंगाना जैसे क्षेत्रों में आशाजनक स्थिति दिखाई देती है, जहाँ ड्रोन-आधारित छिड़काव और सेंसर-आधारित सिंचाई को अपनाया जा रहा है। लेकिन इसकी उच्च निवेश आवश्यकता सीमांत किसानों के लिए इसे अपनाना कठिन बनाती है, जिससे कस्टम हायरिंग सेंटर्स और सब्सिडी की जरूरत बढ़ जाती है।
एग्री फिनटेक एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन की समस्या को हल करता है। स्टार्टअप्स जैसे Samunnati AI आधारित जोखिम मूल्यांकन का उपयोग करके गिरवी रहित ऋण प्रदान करते हैं, जिससे किसानों की अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम हो सकती है।
भारत में कृषि स्टार्टअप्स का क्षेत्रीय वितरण
भारत में कृषि स्टार्टअप्स में क्षेत्रीय विविधता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। ये मुख्य रूप से पश्चिमी और दक्षिणी राज्योंजैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में केंद्रित हैं। वर्ष 2018 से, DPIIT (MoC&I) राज्यों के स्टार्टअप रैंकिंग अभ्यास का संचालन कर रहा है। कर्नाटक और महाराष्ट्र मिलकर पिछले पाँच वर्षों में स्थापित सभी एग्रीटेक स्टार्टअप्स का लगभग 50% योगदान देते हैं।गुजरात को भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में 'सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाला राज्य' माना गया है जबकि एग्रीटेक स्टार्टअप्स में इसका हिस्सा केवल 7% है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को समर्थन देने के मामले में राज्यों की रैकिंग में गुजरात और कर्नाटक सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे।इसके विपरीत, उत्तर और पूर्वी क्षेत्र आमतौर पर स्टार्टअप्स की गुणवत्ता और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में समेकन के मामले में पीछे हैं। इन स्टार्टअप्स के कार्यक्षेत्र अक्सर उनके क्षेत्रीय कृषि ढाँचे और चुनौतियों से जुड़े होते हैं।
तालिका 4: भारत में राज्यवार कृषि स्टार्टअप्स
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राज्य/केंद्रशासित प्रदेश |
पंजीकृत कृषि स्टार्टअप्स की संख्या |
प्रमुख कार्य क्षेत्र |
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महाराष्ट्र |
265 |
लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, कोल्ड चेन |
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कर्नाटक |
212 |
सटीक कृषि, निर्यात सुविधा |
|
तेलंगाना |
189 |
फार्म-टू-फोर्क, ब्लॉकचेन, ट्रेसेबिलिटी |
|
आंध्र प्रदेश |
177 |
इनपुट प्लेटफॉर्म, निर्यात एग्रीगेशन |
|
उत्तर प्रदेश |
156 |
क्रेडिट, सलाहकार सेवाएँ |
|
तमिलनाडु |
151 |
एग्रो प्रोसेसिंग, फिनटेक |
|
गुजरात |
138 |
IoT, प्रमाणन |
|
राजस्थान |
121 |
कृषि शिक्षा, मिट्टी मानचित्रण |
|
मध्य प्रदेश |
117 |
फसल निगरानी, लॉजिस्टिक्स |
|
अन्य (संयुक्त) |
458 |
एक्सटेंशन, बीमा, जलवायु सेवाएँ |
निष्कर्ष
भारत में कृषि स्टार्टअप्स लगातार कृषि क्षेत्र को बदल रहे हैं। ये नवाचार को बढ़ावा देने, ग्रामीण आजीविका सुधारने और राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों में योगदान देने का काम कर रहे हैं। पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं पर उनका बढ़ता ध्यान और जलवायु-प्रतिरोधी खाद्य प्रणालियों की वैश्विक माँग, भारत के कृषि स्टार्टअप्स को भविष्य में कृषि क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में रखती है।सतत नीतिगत समर्थन, लक्षित निवेश और निरंतर क्षमता निर्माण के साथ ये उद्यम समावेशी विकास को तेज करने और भारत के किसानों की स्थिरता और मज्जबूती बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विकसित होता है, कृषि स्टार्टअप्स भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और भविष्य के लिए तैयार दिशा में ले जाने के मुख्य चालक बने रहेंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
