
तकनीक की ताकत Publish Date : 09/03/2026
तकनीक की ताकत
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय
कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थात एआई के शिखर सम्मेलन का नई दिल्ली में शुरू होना, ऐसी ऐतिहासिक घटना है, जिससे देश में एआई को बहुत बल मिलने वाला है। यहां यह तथ्य किसी खुशखबरी से कम नहीं कि एआई के मामले में दुनिया में भारत तीसरे स्थान पर है। भारत से आगे केवल अमेरिका और चीन हैं। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के ग्लोवल एआई वाइब्रेंसी टूल के अनुसार, भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे प्रतिस्पर्दी देश बनकर उभरा है।

भारत के तेजी से बढ़ते तकनीकी तंत्र, उसके लिए उचित परिवेश और सशक्त प्रतिभाओं का इसमें बड़ा योगदान है। यह एक सर्वज्ञात तथ्य है कि भारत अच्छे कंप्यूटर इंजीनियरों का देश है। एआई के मोर्चे पर हमारे इंजीनियर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हालांकि, यहां हमें बहुत कुछ करने की जरूरत है। ध्यान रहे, एआई के मोर्चे पर अमेरिका का वाइब्रेंसी स्कोर 78.6 है, जबकि चीन का 36.95 और भारत का स्कोर 21.59 है। हम एआई के मोर्चे पर दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, जापान, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस सहित कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से आगे चल रहे हैं।
भारत एआई में तीसरी सबसे बड़ी ताकत होने के साथ ही, चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है, इसलिए भी भारत में एआई शिखर सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण है। भारत ऐसा पहला देश है, जो विकसित नहीं है, पर जिसे एआई में विकसित माना जाता है। एआई शिखर सम्मेलन अब तक विकसित देशों में ही होते आए थे, यह पहला मौका है, तीसरी दुनिया के एक ऐसे देश में आयोजन किया गया। यह विशाल आयोजन 16 फरवरी से शुरू हुआ है और 20 फरवरी तक चला।
इस 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के साथ-साथ एक एक्सपो या मेले का आयोजन भी नई दिल्ली में हो रहा है। इस मेले में 13 देशों के पवेलियन हैं और कुल पवेलियन की संख्या 300 बताई जा रही है। इससे भी एआई क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत स्पष्ट हो जाती है। वाकई आंज एआई के सहारे आम आदमी को मदद पहुंचाने, पृथ्वी की सुरक्षा करने और प्रगति सुनिश्चित करने की जरूरत है। यह शिखर सम्मेलन यदि आम आदमी को लाभ देने की दिशा में थोड़ी भी पहल कर सका, तो यह आयोजन सार्थक होगा।
आज दुनिया के अनेक देश और विशेषज्ञ गौर से इस शिखर सम्मेलन की ओर देख रहे हैं। तमाम गरीब और विकासशील देश भी उम्मीद लगाए बैठे हैं और उन्हें यह आशंका भी है कि एआई का लाभउन तक कैसे पहुंचेगा? विकसित देशों में अगर तकनीक व विकसित उत्पाद किफायत में साझा करने का भाव होता, तो दुनिया में इतनी आर्थिक व सामाजिक असमानता नहीं होती। ऐसे में, एआई क्षेत्र में भारत का विकास तकनीक और उसके उत्पादों की कीमतों को भी कम रखने में सहायक होगा।
अभी ज्यादा वर्ष नहीं बीते हैं, कोरोना वैक्सीन व दवाओं के मामले में हमने देखा है, जब दुनिया को जरूरत थी, तब भारत ने आपूर्ति की। भारत की यह ताकत स्थानीय स्तर पर ज्यादा बढ़नी चाहिए। चुनौती बहुत बड़ी है, अपने इंजीनियरों को भारत में ही रोकना होगा, ताकि तकनीक का भारतीय स्वरूप निखरे। भारत में एआई में निवेश बढ़ाना और उसके लिए परिवेश सुधारना होगा। नई दिल्ली में एआई का यह शिखर सम्मेलन हमारे लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होना चाहिए। हमारे लिए सही और किफायती लक्ष्य यही है कि भारतीय एआई प्रतिभाएं भारत को तेजी से आगे लाने में पूरा जोर लगा दें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
