मोलिब्डेनम की भूमिका – वृद्धि एवं विकास      Publish Date : 27/02/2026

  मोलिब्डेनम की भूमिका – वृद्धि एवं विकास

                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

मोलिब्डेनम (Mo) पौधों के लिए एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं, वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि पौधों को स्थूल पोषक तत्वों की तुलना में मोलिब्डेनम की बहुत कम मात्रा की आवश्यकता होती है, फिर भी यह पौधों के कई प्रमुख कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। मोलिब्डेनम नाइट्रोजन चयापचय और अन्य जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल एंजाइमों का एक आवश्यक घटक है। पौधों की वृद्धि और विकास में मोलिब्डेनम की भूमिकाओं का विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:

1. नाइट्रोजन स्थिरीकरण और आत्मसात्करण:

  • मोलिब्डेनम नाइट्रोजिनेज के लिए एक कोफ़ैक्टर है, जो एक एंजाइम है जो फलीदार पौधों और अन्य नाइट्रोजन-स्थिरीकरण बैक्टीरिया में नाइट्रोजन स्थिरीकरण को सुगम बनाता है।
  • यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को ऐसे रूप में परिवर्तित करने में मदद करता है जिसे पौधे अपनी वृद्धि और विकास के लिए उपयोग कर सकें।

2. नाइट्रेट अपचयन और अमोनियम आत्मसात्करण:

  • मोलिब्डेनम नाइट्रेट (NO3-) को अमोनियम (NH4+) में अपचयित करने के लिए आवश्यक है, जो नाइट्रोजन आत्मसात्करण में एक महत्वपूर्ण चरण है।
  • यह नाइट्रेट को अमोनिया में परिवर्तित करने में सहायता करता है, जिसका उपयोग पौधे अमीनो एसिड और प्रोटीन के संश्लेषण के लिए करते हैं।

3. एंजाइम सक्रियण और चयापचय:

  • मोलिब्डेनम विभिन्न जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं में शामिल एंजाइमों के लिए एक कोफ़ैक्टर के रूप में कार्य करता है, जिसमें ज़ैंथिन डीहाइड्रोजनेज और एल्डिहाइड ऑक्सीडेज शामिल हैं।
  • यह एंजाइम सक्रियण के लिए महत्वपूर्ण है, जो पौधों के भीतर रेडॉक्स प्रतिक्रियाओं और चयापचय प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है।

4. सल्फाइट ऑक्सीकरण और सल्फर चयापचय:

  • मोलिब्डेनम सल्फाइट (SO3^2-) के सल्फेट (SO4^2-) में ऑक्सीकरण में शामिल होता है, जो सल्फर चयापचय में एक महत्वपूर्ण चरण है।
  • यह सल्फाइट को सल्फेट में परिवर्तित करने में भाग लेता है, जो सल्फर युक्त यौगिकों के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।

5. लौह का अवशोषण और उपयोग:

  • पौधों द्वारा लोहे (Fe) के अवशोषण और उपयोग में मोलिब्डेनम की भूमिका होती है।
  • यह आयरन के अवशोषण को सुगम बनाता है, पौधों के ऊतकों के भीतर इसकी गति को बढ़ावा देता है और विभिन्न चयापचय प्रक्रियाओं के लिए आयरन के उपयोग को बढ़ाता है।

6. फास्फोरस चयापचय और न्यूक्लियोटाइड संश्लेषण:

  • मोलिब्डेनम फास्फोरस चयापचय में शामिल होता है, जो न्यूक्लियोटाइड और न्यूक्लिक एसिड के संश्लेषण को प्रभावित करता है।
  • यह न्यूक्लियोटाइड निर्माण और न्यूक्लिक एसिड संश्लेषण में सहायता करता है, जो आनुवंशिक स्थिरता और कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक है।

7. तनाव सहनशीलता और एंटीऑक्सीडेंट रक्षा:

मोलिब्डेनम विभिन्न पर्यावरणीय तनावों से निपटने की पौधे की क्षमता को बढ़ाकर तनाव सहनशीलता में योगदान देता है।

यह एंटीऑक्सीडेंट रक्षा तंत्रों को सहायता प्रदान करता है, जिससे प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) के कारण होने वाली ऑक्सीडेटिव क्षति कम होती है।

पौधों की इष्टतम वृद्धि, विकास और उत्पादकता के लिए  मोलिब्डेनम का संतुलित स्तर अत्यंत महत्वपूर्ण है। उचित उर्वरक और मृदा संशोधकों के माध्यम से मोलिब्डेनम का सही प्रबंधन टिकाऊ कृषि के लिए आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पौधों को इस महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व की पर्याप्त मात्रा प्राप्त हो।

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लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।