'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव'      Publish Date : 21/02/2026

'आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव'

                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

■ 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग का सामना करने में आर्द्रभूमि जैसे दलदल तथा मंग्रोव के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है।

■ आर्द्रभूमि (जिसमें झीलें, नदियाँ, दलदल, तालाब, धान के खेत, नमक के मैदान, मुहाने, मैंग्रोव, लैगून, प्रवाल भित्तियाँ आदि शामिल हैं) ऐसे सतही क्षेत्र हैं जो स्थायी रूप से या मौसमी रूप से पानी से संतृप्त या जलमग्न रहते हैं। इनमें विश्व की 40% प्रजातियाँ पाई जाती हैं और ये अनेक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करती हैं।

■ आर्द्रभूमि पारिस्थितिक स्वास्थ्य और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ताजे पानी की आपूर्ति और खाद्य उत्पादन के अलावा, ये वर्षा जल के संधारण, बाढ़ नियंत्रण, जल शोधन, भूजल पुनर्भरण, अपरदन संरक्षण, कार्बन पृथक्करण और जलवायु विनियमन के लिए प्राकृतिक समाधान प्रदान करती हैं। 

■ जनसंख्या वृद्धि और अत्यधिक उपभोग के कारण, दुनिया भर में कई आर्द्रभूमि नष्ट हो रही हैं या महत्वपूर्ण रूप से खराब हो रही हैं, जो जैविक विविधता और लोगों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

■ आर्द्रभूमि पर रामसर सम्मेलन के सचिवालय के अनुसार, 20वीं शताब्दी में वैश्विक आर्द्रभूमि में 64-71% की कमी आई है। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस प्रवृत्ति को पलटना अत्यंत आवश्यक है।

■ विश्व की 90% आपदाएं जल से सम्बंधित होती हैं तथा यह तटीय क्षेत्रों में रहने वाले 60% लोगों को बाढ़ अथवा सूनामी से प्रभावित करती है।

■ आर्द्रभूमि एक प्राकृतिक व कुशल कार्बन सिंक के रूप में कार्य करता है। उदाहरण के लिए दलदलीय काई भूमि के केवल 3% हिस्से पर फैली हुई है, परन्तु यह विश्व भर सभी वनों के मुकाबले दोगुनी मात्र में कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता रखती है।

■ आर्द्रभूमि जलवायु सम्बन्धी आपदाओं के विरुद्ध बफर के रूप में कार्य करती हैं, इससे जलवायु परिवर्तन के आकस्मिक प्रभावों से बचा जा सकता है।

■ विश्व आर्द्रभूमि दिवस का उद्देश्य आर्द्रभूमि के संरक्षण की ओर ध्यान केन्द्रित करना है जो मानव गतिविधि से प्रभावित हो सकता है। आर्द्रभूमि की नष्ट होने की दर लगभग 1% है जो की वनों के नष्ट होने की दर से काफी अधिक है।

■ नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड (Wetland) कहा जाता है। दरअसल, वेटलैंड्स वैसे क्षेत्र हैं जहाँ भरपूर नमी पाई जाती है और इसके कई लाभ भी हैं।

■ आर्द्रभूमि जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है। आर्द्रभूमि वह क्षेत्र है जो वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णतः जल से भरा रहता है।

■ भारत में आर्द्रभूमि ठंडे और शुष्क इलाकों से लेकर मध्य भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है।

■ वेटलैंड्स को बायोलॉजिकल सुपर-मार्केट कहा जाता है, क्योंकि ये विस्तृत भोज्य-जाल (Food-Webs) का निर्माण करते हैं।

■ फूड-वेब्स यानी भोज्य-जाल में कई खाद्य श्रृंखलाएँ शामिल होती हैं और ऐसा माना जाता है कि फूड-वेब्स पारिस्थितिक तंत्र में जीवों के खाद्य व्यवहारों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करते हैं।

■ एक समृद्ध फूड-वेब समृद्ध जैव-विविधता का परिचायक है और यही कारण है कि इसे बायोलॉजिकल सुपर मार्केट कहा जाता है।

■ वेटलैंड्स को ‘किडनीज़ ऑफ द लैंडस्केप’ (Kidneys of the Landscape) यानी ‘भू-दृश्य के गुर्दे’ भी कहा जाता है।

■ जिस प्रकार से हमारे शरीर में जल को शुद्ध करने का कार्य किडनी द्वारा किया जाता है, ठीक उसी प्रकार वेटलैंड तंत्र जल-चक्र द्वारा जल को शुद्ध करता है और प्रदूषणकारी अवयवों को निकाल देता है। जल एक ऐसा पदार्थ है जिसकी अवस्था में बदलाव लाना अपेक्षाकृत आसान है।

■ जल-चक्र पृथ्वी पर उपलब्ध जल के एक रूप से दूसरे में परिवर्तित होने और एक भंडार से दूसरे भंडार या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने की चक्रीय प्रक्रिया है।

■ जलीय चक्र निरंतर चलता है तथा स्रोतों को स्वच्छ रखता है और पृथ्वी पर इसके अभाव में जीवन असंभव हो जाएगा।

■ वेटलैंड्स जंतु ही नहीं बल्कि पादपों की दृष्टि से भी एक समृद्ध तंत्र है, जहाँ उपयोगी वनस्पतियाँ एवं औषधीय पौधे भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।

■ ये उपयोगी वनस्पतियों एवं औषधीय पौधों के उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लोगों की आजीविका के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।

■ विश्व की बड़ी सभ्यताएँ जलीय स्रोतों के निकट ही बसती आई हैं और आज भी वेटलैंड्स विश्व में भोजन प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

■ वेटलैंड्स के समीप रहने वाले लोगों की जीविका बहुत हद तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर होती है।

■ पर्यावरण सरंक्षण के लिये महत्त्वपूर्ण वेटलैंड्स ऐसे पारिस्थितिकीय तंत्र हैं जो बाढ़ के दौरान जल के आधिक्य का अवशोषण कर लेते हैं।

■  इस तरह बाढ़ का पानी झीलों एवं तालाबों में एकत्रित हो जाता है, जिससे मानवीय आवास वाले क्षेत्र जलमग्न होने से बच जाते हैं।

■  ये वेटलैंड्स ‘कार्बन अवशोषण’ व ‘भू जल स्तर’ में वृद्धि जैसी महत्त्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन कर वेटलैंड्स पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

■  रामसर वेटलैंड्स कन्वेंशन एक अंतर-सरकारी संधि है, जो वेटलैंड्स और उनके संसाधनों के संरक्षण और बुद्धिमतापूर्ण उपयोग के लिये राष्ट्रीय कार्य और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का ढाँचा उपलब्ध कराती है।

■  2 फरवरी, 1971 को विश्व के विभिन्न देशों ने ईरान के रामसर में दुनिया के वेटलैंड्स के संरक्षण हेतु एक संधि पर हस्ताक्षर किये थे, इसीलिये इस दिन विश्व वेटलैंड्स दिवस का आयोजन किया जाता है।

■  वर्ष 2015 तक के आँकड़ों के अनुसार, अब तक 169 देश रामसर कन्वेंशन के प्रति अपनी सहमति दर्ज़ करा चुके हैं जिनमें भारत भी एक है।

■  वर्तमान में 2200 से अधिक वेटलैंड्स हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के वेटलैंड्स की रामसर सूची में शामिल किया गया है और इनका कुल क्षेत्रफल 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर से भी अधिक है।

■  विलुप्त हो रहे वेटलैंड्स के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिये जाने का आह्वान करने के उद्देश्य से रामसर वेटलैंड्स कन्वेंशन का आयोजन किया गया था।

■  इस कन्वेंशन में शामिल होने वाली सरकारें वेटलैंड्स को पहुँची हानि और उनके स्तर में आई गिरावट को दूर करने के लिये सहायता प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध हैं।

■  इस कन्वेंशन में यह तय किया गया था कि पर्यावरण सरंक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय विचार-विमर्श और सहयोग के ढाँचे की ज़रूरत है।

■  राष्ट्रीय वेटलैंड संरक्षण कार्यक्रम

सरकार ने वर्ष 1986 के दौरान संबंधित राज्य सरकारों के सहयोग से राष्ट्रीय वेटलैंड संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया था।

■  इस कार्यक्रम के अंतर्गत भारत में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 115 वेटलैंड्स की पहचान की गई थी, जिनके संरक्षण और प्रबंधन हेतु पहल करने की ज़रूरत है।

■  इस योजना का उद्देश्य देश में वेटलैंड्स के संरक्षण और उऩका बुद्धिमतापूर्ण उपयोग करना है, ताकि उनमें आ रही गिरावट को रोका जा सके।

■  विदित हो कि वर्ष 2017 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वेटलैंड्स के सरंक्षण से संबंधित नए नियमों को अधिसूचित किया गया है। आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियमावली, 2017 पहले के दिशा-निर्देशों का स्थान लेगी, जो 2010 में लागू हुए थे।

■  दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार, भारत में कुल 98 रामसर स्थल हैं, जो एशिया में सबसे अधिक हैं।

■  भारत के पास अब विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा रामसर नेटवर्क है, जिसमें 2014 के बाद से 67 नए स्थल जोड़े गए हैं। प्रमुख नए स्थलों में उदयपुर और इंदौर (बिहार) शामिल हैं। तमिलनाडु में भारत के सबसे अधिक 20 रामसर स्थल हैं।

■  उत्तर प्रदेश में कुल 10 रामसर स्थल हैं।

■  उत्तराखंड के देहरादून जनपद में स्थित आसन संरक्षण आरक्ष भी एक रामसर स्थल है।

■  इस दिन हमें अपने आसपास स्थित झीलों, पोखरों, तालाबों, जोहड़ों और अन्य छोटे छोटे आर्द्र भूमियों को संरक्षित करने के लिए यथा उपयुक्त प्रयत्न, योजना और कार्यक्रम बनाने चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।